लालू, नीतीश या मोदी, किसने लगाया सबसे ज्यादा दम?
बिहार चुनावों का राष्ट्रीय परिदृश्य में क्या महत्व है, इसे यों समझा जा सकता है कि तकरीबन 60 दिनों तक चली चुनावी प्रक्रिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 रैलियां की और महागठबंधन के दोनों दिग्गज नेताओं ने नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव ने 200 से भी ज्यादा।
पिछले लोकसभा चुनावों के बाद से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीजेपी के चुनावी अभियान का चेहरा रहे हैं। दिल्ली में बीजेपी ने किरण बेदी को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनाकर परिपाटी बदली थी, हालांकि वो प्रयोग उसे महंगा पड़ गया। नतीजतन पार्टी ने अपने पुराने फार्मूले पर ही भरोसा किया और मोदी को आगे रखकर चुनाव लड़ा।
बिहार में अंतिम चरण का चुनाव प्रचार तीन नवंबर को समाप्त हुआ था, और उस दिन तक सूबे में तकरीबन 2400 रैलियां हुईं। 900 रैलियों केवल भाजपा ने की, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय कैबिनेट के 20 मंत्री और राज्य के सभी आला नेताओं की रैलियां शामिल हैं। बीजेपी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 और सुशील कुमार मोदी ने 190 रैलियां की।
लालू और नीतीश ने की कितनी रैलियां?
चारा घोटाले में सजायाफ्ता होने के बाद लालू यादव को राजनीतिक रूप से 'चुक गया' मान लिया गया था। मगर 67 वर्षीय इस नेता ने इन चुनावों में बिहार का कोना-कोना मापा। 242 रैलियां करके, जो मौजूदा चुनावों में किसी भी नेता द्वारा की गई सर्वाधिक रैलीयां थीं, उन्होंने राजनीति पंडितों को भी चकित कर दिया।
विधानसभा चुनावों का नतीजा जो भी रहे, ये तय है कि लालू के राजनीतिक जीवन का आंकलन नए सिरे से किए जाएगा, जिसे संभवतः दो हिस्सों में बांटा जाय, पहला हिस्सा चारा घोटाले में सजा पाने से पहले का होगा और दूसरा सजा पाने के बाद का।
लोकसभा चुनावों से पहले राजग से अलग होकर अपने राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा जुआ खेल रहे नीतीश कुमार ने मौजूदा चुनावों में 220 रैलियां की। लालू के बाद नीतीश ने ही सबसे ज्यादा रैलियां की। लालू और नीतीश की रैलियों की शुरुआत 27 सितंबर को हुई थी, और तीन नवंबर तक दोनों ने एक दिन में 8 से 9 रैलियां की। उन्होंने केवल दशहरे पर ही ब्रेक लिया था।