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चुनावी अखाड़े में कैसी रहेंगी बोल्ड राखी की 'पहलवानी'?

Sat, 29 Mar 2014 11:29 AM IST
Updated Sat, 29 Mar 2014 11:29 AM IST
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rakhi sawant in election fray

भले ही आप पार्टी कहे कि चुनाव परिणाम की उन्हें चिंता नहीं है, लेकिन सही मायनों में यह फार्मूला राखी सावंत पर ज्यादा सटीक बैठता है। वह निर्दलीय चुनाव लड़ रही हैं। और उन्हें पूरा यकीन है कि वह जीतेंगी नहीं। फिर भी लड़ रही है। लेकिन राखी सावंत चुनावी मैदान में हैं तो दूसरों के लिए डरने की बात है।

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उनके बोल्ड अभिनय और वार्तालाप को जानने समझने वाले महसूस कर रहे होंगे कि नेता के तौर पर वह क्या कुछ कह सकती हैं। किसके लिए कह सकती हैं। उनका अभिनय भी कई मायनों में बेजोड़ हैं। वह मतदाताओं के घर में जाकर घर के सदस्यों के लिए बेटी, सखी, ननद, मौसी, सब कुछ बन सकती हैं। वह धाराप्रवाह ढंग से देश की गरीबी पर रो सकती हैं। क्षेत्र में काम न हो पाने की शिकायत के साथ नेताओं के नाम पर आंखों से अंगारे बरसा सकती हैं। यानि वे किसी भी रूप में दिख सकती हैं। वह अभी मुंबई उत्तर पश्चिम से निर्दलीय चुनाव लड़ रही हैं। फिलहाल मुंबई की दूसरी सीट वाले उम्मीदवारों के लिए राहत की बात है।
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बताते हैं कि कुछ दिन पहले वह भाजपा के कार्यालय भी गई थीं लेकिन बात नहीं बनी। अब शिवसेना के प्रत्याशी गजानन कीर्तिकर, अभिनेता कमाल खान और कांग्रेस के गुरुदास कामत को अपनी चुनौती दे रही हैं। तय है कि चुनाव तक मीडिया में वह खास बनी रहेंगी। हां, अपने पोस्टरों में वह फिल्म और टीवी वाली राखी सावंत नजर नहीं आतीं। उन्होंने बाकायदा अपने लिए नेहरू शैली की पोशाक सिलवाई है। सिर पर टोपी भी है। आप पार्टी की टोपी से थोड़ा हटकर। उसमें कुछ नहीं लिखा है। राखी सावंत नाम अपने आप में काफी है।

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ए के 49

rakhi sawant in election fray

कुछ राजनीतिक पंडित कह रहे हैं मोदी जम्मू में जिस ए के 49 की बात कह कर आए उससे अरविंद केजरीवाल को फायदा हुआ है। यह संदेश गया है कि मोदी के मन में कहीं न कहीं आप को लेकर डर बढ़ा है। वरना वह पहले की तरह जिक्र नहीं करते। दूसरी तरफ कुछ समीक्षक दलील दे रहे हैं कि राजनीतिक के कुशल खिलाड़ी मोदी ने सही दांव चला। केजरीवाल लगातार आरोप लगा रहे थे। गुजरात के 26 जिले भी घूम आए। मोदी कुछ न कहते तो यही संदेश जाता कि दाल में कुछ काला है।

इसलिए सुबह भाजपा ने केजरीवाल के 16 सवालों का जवाब दिया और दोपहर में मोदी अपनी चिरपरिचित शैली में ए के 47, ए के एंटनी, और ए के 49 की व्याख्या करने लगे। इन दिनों 49 का जिक्र खूब हुआ है। किसी से भी पूछिए कि 49 क्या है तो वह कह देगा कि किसी बल्लेवाज  का स्कोर नहीं, बल्कि केजरीवाल की सरकार इतने दिन चली। इसलिए मोदी के ए के 49 कहते ही देर नहीं लगी कि पहली बार वार हो ही गया। मोदी ने इसके लिए जम्मू को चुना। ए के 47 राइफल्स का जिक्र आतंकियों के संबंध में होता आया है।

रूसी मिखाइल क्लाशनिकोव को भले अपनी ईजाद की हुई ए के 47 पर गर्व था, लेकिन इस बात का मलाल था कि इस राइफल का गलत इस्तेमाल भी हो रहा है। इसलिए ए के 47 के साथ अच्छे भाव नहीं उभरते। अगर ए के 47 की लय में कोई ए के 49 भी कह दे, तो इसकी प्रतिध्वनि व्यंग्य में ही उभरती है। यह किसी को विचलित भी कर सकती है। कह नहीं सकते कि पहली बार मोदी के जरिए टिप्पणी होने की खुशी में या उस व्यंग्य से विचलित होने पर ताबड़तोड़ आप वालों ने प्रेस कांफ्रेस बुला ही डाली। भाव यही था कि सही मायनों में अब शास्त्रार्थ शुरु हुआ है।

हराओ चाचा मामा को

rakhi sawant in election fray

चुनाव में ऐसी अपील आपने कम ही देखी होगी। लालू यादव की बेटी मीसा इन दिनों अपने लिए वोट मांगने से ज्यादा यह कहती है कि चाचा और मामा को हराइए। उसके चाचा यानी राम कृपाल यादव और मामा साधु यादव। जब बिहार में लालू का सितारा बोलता था तो ये दोनों पार्टी के सबसे अहम लोग होते थे।

रामकृपाल यादव से पारिवारिक प्रगाढ़ रिश्तों के चलते मीसा के लिए वह चाचा की तरह थे। और साधु तो घर-बाहर-पार्टी सब कुछ देखते थे। लेकिन गंगा में इस बीच बहुत पानी बह गया है। सारण में अब साधु यादव अपनी बहन के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं, वही पाटलिपुत्र का टिकट न मिलने पर रामकृपाल यादव, लालू यादव की बेटी को चुनौती दे रहे हैं। ऐसे में मीसा लोगों से कह रही है कि चाचा, मामा को हराइए।

यही राजनीति और कुर्सी का खेल है। मीसा कल तक जिन चाचा मामा की गोद में खेली होगी, वही अब आंखों में खटक रहे है। सवाल विरासत का है। लालू ने भी सोच समझकर दांव चला है। राजनीतिक विरासत दूसरे में क्यों जाने देते। राबड़ी देवी की अपनी सीमा है, लिहाजा अपनों की नाराजगी सहकर भी मीसा को मैदान में उतार दिया है।

वोट मांगेगी आयशा टाकिया

rakhi sawant in election fray

मुंबई नॉर्थ सेंटर से सपा उम्मीदार फरहान आजमी के आने से चुनाव दिलचस्प होने जा रहा है। सुनील दत्त और नर्गिस की बेटी प्रिया दत्त के कारण यह सीट पहले ही सुर्खियों में रहती आई है। भाजपा ने उनके सामने स्व प्रमोद महाजन की बेटी पूनम महाजन को उतारा है। इधर सपा ने मुंबई सपा अध्यक्ष अबु आजमी के बेटे फरहान आजमी को टिकट देकर चुनाव को और रोमांचक बना दिया है।

अब सपाई इस बात की उम्मीद करने लगे हैं कि फरहान के लिए वोट मांगने उनकी पत्नी आयशा टाकिया आजमी जरूर मतदाताओं के पास जाएंगी। उनके ससुर अबु असीम आजमी जब विधान सभा चुनाव लड़े थे, तो आयशा टाकिया ने रोड शो करके उनके लिए वोट मांगे थे। अबु असीम आजमी वह चुनाव जीते थे। सपाई अब उम्मीद कर रहे हैं कि मुंबई नार्थ सेंटर की सीट जहां मुस्लिम आबादी अच्छी खासी है, सपाई अपनी साइकिल दौड़ा सकते हैं। खासकर एक समय की चर्चित अभिनेत्री आयशा टाकिया की ग्लैमरस छवि और मोहक मुस्कान लोगों पर अपना असर छोड़ सकती है। उसकी अपील पर लोग गौर करेंगे। आयशा टाकिया ने कम ही फिल्में की है। लेकिन उनके अभिनय को सराहा गया।

कुछ समय पहले वह कलर्स चैनल में सिंगिग के महासंग्राम में होस्ट बनकर आईं। इसे काफी सराहा गया। अब सपाईयों को लगता है कि आशा टाकिया के रोड शो से कुछ बात बनेगी। सपा ने नब्बे के दशक में कांग्रेस के जनाधार को काफी नुकसान पहुंचाया था। फरहान के आने से थोड़ी चिंता प्रिया दत्त की बढ़ गई होगी।

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