राज्यसभा: हंगामे पर सभापति ने की गंभीर टिप्पणी
राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी ने सदन का कामकाज बधित होने को लेकर सख्त नाराजगी जताई है। शीतकालीन सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने से पहले अपने पारंपरिक संबोधन में हामिद अंसारी ने सदस्यों को आत्मचिंतन करने की नसीहत दी। उन्होंने सदस्यों को राज्यसभा की गरिमा को गिराने वाले व्यवहार से परहेज करने को कहा।
उन्होंने सांसदों को कहा कि संसदीय प्रणाली में सरकार से जवाब पूछने के नियमों का सांसदों को पूरा इस्तेमाल करना चाहिए और अपने कृत्यों से दूसरे सांसदों को इससे वंचित नहीं रखना चाहिए।
विपक्ष के हंगामे के कारण राज्यसभा में 47 घंटे का कामकाज बधित हुआ। हामिद अंसारी ने इस मुद्दे पर पिछले हफ्ते सभी दलों की बैठक भी बुलाई थी। उस बैठक में
सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच सदन सुचारू रूप से चलाने को लेकर सहमति भी बनी थी। इसके बाजवूद सदन में हंगामा जारी रहा। कई बिल बिना चर्चा के ही पास कराने पड़े।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राज्यसभा में विपक्ष के लगातार हंगामे को लेकर पिछले हफ्ते अंसारी से मुलाकात कर नाखुशी जताई थी। उसके बाद ही अंसारी ने सर्वदलीय बैठक बुलाई।
सांसदों को आत्मचिंतन करने की दी नसीहत
सभापति की टिप्पणियों पर राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि वह बड़े हैं। उनको कहने का अधिकार है। हम उस पर कुछ नहीं कहेंगे।
मगर सरकार के अड़ियल रवैये के सामने विपक्ष चुप नहीं रह सकता। अपने पारंपरिक संबोधन में अंसारी ने कहा कि सदन के कामकाज में बाधा भले ही हाल में शुरू नहीं हुई है, लेकिन इसे सदन के विभिन्न वर्ग द्वारा अलग अलग समय पर उस क्षण की रणनीति के अनुरुप विस्तृत तर्कों से जायज ठहराया जाता है, मगर इसके परिणाम स्वरूप समय की बर्बादी और सूचीबद्घ कामकाज की अनदेखी होती है।
उन्होंने सदस्यों को याद दिलाया कि सदस्यों ने एक दिसंबर को संविधान के सिद्घांतों और आदर्शों के प्रति प्रतिबद्घता को दोहराया था। अंसारी ने कहा कि हंगामे की वजह से सदस्यों का प्रश्न और शून्य काल के दौरान कार्यकारी से सवाल पूछने के मौके से वंचित करता है। साथ ही जनता से जुड़े मुद्दों पर भी बहस नहीं पाती।