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राजनीतिक विचारक रजनी कोठारी का निधन

Mon, 19 Jan 2015 01:13 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 19 Jan 2015 01:13 PM IST
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Rajni kothari died at 85.

'विकासशील समाज अध्ययन पीठ' (सीएसडीएस) के संस्थापक और राजनीतिक विचारक रजनी कोठारी का सोमवार सुबह निधन हो गया। वो 85 वर्ष के थे।

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रजनी कोठारी की पहचान देश के प्रमुख राजनीतिक जानकार, शिक्षाविद और लेखक के तौर पर रही है। उन्होंने भारतीय राजनीति के सिद्धांतों को पेश करने में अहम योगदान किया है।

1963 में उन्होंने सीएसडीएस की स्थापना की। यह दिल्ली में स्थित समाज विज्ञान और मानविकी से सम्बन्धित अनुसंधान का संस्थान है। इसके साथ-साथ उन्होंने 1980 में 'लोकायन' नाम के संस्थान की भी स्थापना की।
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देश के सियासी माहौल, दलीय प्रणाली के अध्ययन में कोठारी ने कई खास बातें कही हैं। द्विदलीय और बहुदलीय प्रणालियों की प्रचलित व्याख्याओं से अलग हट कर उन्होंने भारतीय दलीय प्रणाली की एक पार्टी के वर्चस्व वाली प्रणाली के रूप में मौलिक व्याख्या की। साथ ही कांग्रेस को प्रचलित परिभाषाओं के तहत एक राजनीतिक दल के रूप में देखने के बजाय इसे ‘प्रणाली’ के रूप में पेश किया।
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आगे चलकर कोठारी ने गैर-दलीय राजनीति के सिद्धांतों को भी सामने रखा। कोठारी एक बड़े रचनाकार रहे। 1969 में उनकी पहली पुस्तक 'पॉलिटिक्स इन इण्डिया' प्रकाशित हुई। ये पुस्तक भारतीय राजनीति को समझने का तर्कपूर्ण मॉडल पेश करती है।

85 वर्ष के थे रजनी कोठारी

Rajni kothari died at 85.

रजनी कोठारी का जन्म 1928 में एक समृद्ध गुजराती व्यापारिक घराने में हुआ था। उनके पिता बर्मा में हीरों का व्यापार करते थे। उनकी शुरुआती शिक्षा-दीक्षा आयंगारों द्वारा चलाए जाने वाले रंगून के एक स्कूल में हुई।

परिवार में बौद्धिकता की कोई परम्परा न होने के बावजूद कोठारी के पिता ने उन्हें सुशिक्षित करने में कोई कसर न छोड़ी। उनका बचपन बर्मा के अपेक्षाकृत खुले समाज में बीता।

लंदन स्कूल ऑफ़ इकॉनॉमिक्स से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद रजनी कोठारी ने कुछ दिन बड़ोदरा में क्लासिकल अर्थशास्त्र पढ़ाया। इस दौरान वे भारतीय मार्क्सवाद के प्रारम्भिक व्याख्याता और बाद में रैडिकल मानवतावाद के प्रमुख प्रवक्ता मानवेंद्र नाथ राय से भी प्रभावित हुए।

अपने जीवन के अंतिम दौर में पत्नी हंसा कोठारी और बड़े बेटे स्मितु कोठारी के निधन से आहत रजनी कोठारी दिल्ली स्थित आवास में रहते थे।

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