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राजनाथ ने संभाली सिद्धू को मनाने की जिम्मेदारी
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Sat, 13 Apr 2013 12:56 AM IST
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चुनावी मजबूरी में भाजपा अपने नाराज सांसद और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू को मनाने में जुट गई है। उन्हें मनाने का काम स्वयं पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने संभाला है।
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हालांकि पार्टी सिद्धू से खफा है, मगर वह इस साल होने वाले कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अगले साल लोकसभा चुनाव में अपने स्टार प्रचारक को खोने का खतरा मोल लेना नहीं चाहती। यही कारण है कि खुद राजनाथ ने उन्हें फोन कर मिलने के लिए बुलाया। इस पर सिद्धू मिलने के लिए राजी हो गए।
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माना जा रहा है कि सिद्धू और राजनाथ की मुलाकात शनिवार को हो सकती है। पार्टी सूत्रों ने बताया कि राजनाथ ने सिद्धू को फोन कर हड़बड़ी में कोई फैसला करने से पहले मिल कर अपनी बात रखने पर जोर दिया। साथ ही आश्वासन दिया कि पार्टी उनकी शिकायतों को दूर करेगी।
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सिद्धू भी सकारात्मक रुख अपनाते हुए मिलने के लिए राजी हो गए। आईपीएल के मैच के सिलसिले में दिल्ली में मौजूद सिद्धू राजनाथ के सहारनपुर चले जाने के कारण शुक्रवार को उनसे नहीं मिल पाए। माना जा रहा है कि अब दोनों की मुलाकात शनिवार को हो सकती है।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना था कि दरअसल यह बड़ी सच्चाई है कि सिद्धू पार्टी के स्टार प्रचारक होने के साथ-साथ पार्टी के चर्चित सिख चेहरा भी हैं। स्टार प्रचारक के तौर पर उनकी दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में जबर्दस्त मांग होगी।
ऐसे में अगर सिद्धू कार्यकारिणी में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किए जाने और कुछ अन्य छोटी मांगें स्वीकार किए जाने पर मान जाते हैं तो बात बन सकती है। उधर, पार्टी महासचिव जेपी नड्डा ने इस आशय की खबरों का खंडन किया कि पार्टी अध्यक्ष ने उन्हें सिद्धू को मनाने की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने कहा कि सिद्धू दिल्ली आ कर राजनाथ से खुद बातचीत करेंगे।
गौरतलब है कि राजनाथ ने इसी महीने घोषित अपनी टीम से सिद्धू का पत्ता काट दिया था। फेरबदल में न केवल सिद्धू से सचिव पद की जिम्मेदारी ले ली गई, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारिणी से भी बाहर कर दिया गया। पार्टी सूत्रों के मुताबिक आलाकमान उनसे पार्टी को समय न देने तथा गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान केशूभाई पटेल के लिए आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल के कारण नाराज था।
गौरतलब है कि पटेल के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद हालात संभालने के लिए खुद गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को मोर्चा संभालना पड़ा था। दूसरी ओर सिद्धू बदली परिस्थितियों में अपनी अनदेखी से नाराज थे और इससे पहले अमृतसर की जगह दिल्ली की किसी संसदीय सीट से आगामी लोकसभा चुनाव लड़ने की मुहिम में जुटे थे। इस मोर्चे पर सफलता न मिलती देख सिद्धू ने आलाकमान पर दबाव बनाने के लिए पत्नी के सहारे नाराज होने का दांव चला।