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लखनऊ में राजनाथ को सता रहा है भितरघात का डर?

Wed, 02 Apr 2014 05:26 PM IST
Updated Wed, 02 Apr 2014 05:26 PM IST
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rajnath singh facing in tough fight in lucknow

लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे ज़ोर पकड़ रही हैं। साथ ही बढ़ रही है भितरघात की चर्चा और पार्टी के अंदर की जातिगत राजनीति।

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राजनाथ के लिए अंदर से जितना ख़तरा है उतना ही बड़ा ख़तरा उनको कांग्रेस की रीता बहुगुणा जोशी से है। भले ही मुलायम सिंह यादव ने अशोक वाजपेयी को हटा कर और अभिषेक मिश्रा को टिकट देकर उनकी मुश्किल कम करने की पूरी कोशिश की है, लेकिन प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रहे राजनाथ की डगर फ़िलहाल कठिन है।
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ग़ाज़ियाबाद छोड़ लखनऊ से अटल बिहारी वाजपेयी की राजनीतिक विरासत की ज़िम्मेदारी राजनाथ सिंह ने अपने ऊपर लेने की ठानी और अपने को अटलजी का उत्तराधिकारी मानने वाले लालजी टंडन के पर कतर दिए गए। साल 2009 में लखनऊ से सांसद रहे टंडन को इस बार टिकट नहीं मिला।

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राजनाथ ने लखनऊ से लड़ने की ख़बर टंडन को नहीं दी

rajnath singh facing in tough fight in lucknow

जिस प्रकार मीडिया में यह बात आई कि लखनऊ से इस बार राजनाथ चुनाव लड़ेंगे और टंडन को इसकी ख़बर भी नहीं दी गई, उससे टंडन आहत थे। राजनाथ से बात के बाद उनकी नाराज़गी दूर तो हुई लेकिन उस दिन से यह चर्चा आम है कि कहीं न कहीं आहत टंडन अपने पार्टी अध्यक्ष को चोट ना पहुंचा दें।

वैसे तो राजनाथ ने लखनऊ में अपनी प्रेस वार्ता में यह कहा था कि वह टंडन के आग्रह से ही लखनऊ से चुनाव लड़ रहे हैं और टंडन भी चुनाव की तैयारियों में गंभीरता से लगे हैं। बातचीत में भी टंडन और उनके सहयोगी यह ज़ाहिर नहीं होने देते हैं कि उनमें आपसी मनमुटाव है। लेकिन बीते कुछ वर्षों की और हाल ही की घटनाओं से नहीं लगता कि दोनों पक्ष एक दूसरे पर पूरा भरोसा रख कर काम कर रहे हैं।

इस कड़ी की पहली घटना साल 2009 की है जब विधान सभा उपचुनाव के लिए लखनऊ पश्चिम से अमित पुरी ने भारतीय जनता पार्टी की ओर से अपना नामांकन दाख़िल किया था।

राजनाथ के बेटे और कुछ अन्य ठाकुर बना रहे रणनीति

rajnath singh facing in tough fight in lucknow

अमित पुरी चुनाव हार गए और उन्होंने टंडन को दोषी ठहराया। इसके दो कारण थे। पहला यह कि लखनऊ पश्चिम टंडन का गढ़ है। और दूसरा यह कि टंडन अपने बेटे गोपाल को टिकट दिलाना चाहते थे। साथ ही यह भी कहा जाता है कि पुरी को टिकट दिलाने में राजनाथ का हाथ था।

साल 2012 के विधान सभा चुनाव में गोपाल टंडन को टिकट मिला लेकिन वह भी चुनाव हार गए। इस हार का दोष दिया गया राजनाथ को। अपनी हार का कारण समझाते हुए अमित पुरी कहते हैं, "साल 2009 के उपचुनाव में मैं दल का प्रत्याशी बना, दिल का नहीं।" यह पूछने पर कि वह किसके दिल के प्रत्याशी नहीं बन सके- जनता या पार्टी के कुछ नेताओं के, तो पुरी बोले, "भाजपा के एक धड़े का।"

आज उसी धड़े के लालजी टंडन और उनके बेटे गोपाल दोनों ही राजनाथ की मदद करते नज़र आते हैं किन्तु राजनाथ के बेटे पंकज सिंह और कुछ अन्य ठाकुर भी चुनावी रणनीति बनाने में सक्रिय हैं। कुछ अन्य जाति के कार्यकर्ताओं को यह नहीं सुहा रहा है कि 'ठाकुर' उनको आज्ञा दें।

एक और बात। पिछले माह होली के बाद लालजी टंडन ने हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी एक कवि सम्मलेन का आयोजन किया। लेकिन इस साल के आयोजन में फ़र्क़ यह था कि वहाँ रीता बहुगुणा जोशी, अशोक वाजपेयी और अभिषेक मिश्रा भी मौजूद थे।

जोशी के साथ टंडन की फ़ोटो दे रही भितरघात को हवा

rajnath singh facing in tough fight in lucknow

लखनऊ के कुछ समाचारपत्रों ने जोशी से बतियाते हुए टंडन की फ़ोटो प्रकाशित कर भितरघात की चर्चा को मज़बूती देने की कोशिश की। पुरी इन बातों को ज़्यादा महत्व नहीं देते हैं। वह इतना ज़रूर मानते हैं कि चुनाव मुश्किल होगा लेकिन जीत राजनाथ की ही होगी।

साज़िश की बात पर पुरी कहते हैं कि कुछ लोग यह कहते सुने गए हैं कि ठाकुर और ब्राह्मण को यदि अंग्रेज़ी में लिखा जाए तो उनके पहले अक्षर को जोड़ कर टीबी बनता है जो एक जानलेवा बीमारी होती है।

ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि लखनऊ के 18 लाख मतदाताओं में ब्राह्मणों की संख्या 15-20 प्रतिशत है और 60 हज़ार से 65 हज़ार राजपूत हैं जबकि मुस्लिम वोटरों की संख्या 25-27 प्रतिशत है।

लखनऊ के मौजूदा विधायकों में तीन ब्राह्मण हैं और लोकसभा के तीन प्रत्याशी रीता बहुगुणा जोशी, अभिषेक मिश्रा एवं नकुल दुबे भी ब्राह्मण हैं। हेमवती नंदन बहुगुणा के बाद राजनाथ प्रदेश के दूसरे पूर्व मुख्यमंत्री हैं जो लखनऊ से सांसद का चुनाव लड़ रहे हैं।

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