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सुषमा, वसुंधरा की तरह शिवराज के तारणहार नहीं बन पाए राजनाथ

Wed, 08 Jul 2015 08:10 AM IST
Updated Wed, 08 Jul 2015 08:10 AM IST
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rajnath singh did not suport shivraj singh chauhan, like sushma and vasundhara

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की तरह ही व्यापम घोटाले के सियासी भंवर में घिरे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का बचाव नहीं कर पाए।

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गृह मंत्री की सरकार की ओर से व्यापम घोटाले की सीबीआई जांच न कराने की घोषणा के अगले ही दिन खुद मुख्यमंत्री चौहान को इस आशय की घोषणा करनी पड़ी।

दरअसल, राजनाथ इस मामले में अपनी दलीलों से पार्टी नेतृत्व के साथ-साथ संघ को संतुष्ट नहीं कर पाए। खासतौर पर एक टीवी चैनल के एक पत्रकार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद मामले के राष्ट्रीय स्तर पर छा जाने के कारण पार्टी और संघ के बीच सीबीआई जांच पर सहमति बन गई।
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पार्टी और संघ को इस बात का भी डर था कि अगर नौ जुलाई की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिकूल टिप्पणी के साथ जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़ा किया तो विपक्ष के तीखे हमलों का वार झेलना मुश्किल होगा।
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दिलचस्प तथ्य यह है कि इससे पहले ललित मोदी की मदद के सवाल पर घिर कर अलग-थलग पड़ीं वसुंधरा और सुषमा के बचाव में राजनाथ ने ढाल का काम किया था।

राजनाथ न केवल संघ को साधने में कामयाब हुए थे, बल्कि इसके बाद पार्टी भी इनके बचाव में खड़ी हुई थीं। हालांकि, तब केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को उन्हें बराबर साथ मिला था।

मगर इस बार विरोधी राजनाथ पर पड़ रहे भारी

rajnath singh did not suport shivraj singh chauhan, like sushma and vasundhara

सूत्रों के मुताबिक इससे पहले ललित मोदी की मदद के आरोपों से घिरे नेताओं के बचाव में एक गुट ने संघ नेतृत्व के समक्ष सरकार और पार्टी में विरोधी गुट को निशाना बनाए जाने की दलील दी थी।

तब संघ ने भी संतुलन कायम रखने के लिए इस दलील को न केवल स्वीकार किया था, बल्कि इन नेताओं के बचाव में भी उतर आया था।

खासतौर पर सुषमा के आरोपों से घिरने के तत्काल बाद पार्टी के एक सांसद की पूरे मामले में आस्तीन के सांप का हाथ होने की दलील और दूसरे सांसद की भगोड़े की मदद पर उठाए गए सवाल ने भी पार्टी के अंदर के खींचतान को जाहिर कर दिया था। पार्टी में चर्चा है कि तब राजनाथ अपने विरोधियों पर भारी पड़े थे, मगर इस बार विरोधी खेमा उन पर भारी पड़ गया।

विचित्र संयोग पर पार्टी में चर्चा
मोदी सरकार के एक साल का कार्यकाल पूरा होने पर एक गुट विशेष के नेताओं के आरोपों से घिरने के विचित्र संयोग पर नए सिरे से चर्चा शुरू हुई है।

आरोपों से घिरीं सुषमा स्वराज, वसुंधरा राजे, रमन सिंह और शिवराज सिंह चौहान पार्टी के एक विशेष गुट से जुड़े रहे हैं। भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे महाराष्ट्र सरकार के दो मंत्री पंकजा मुंडे और विनोद तावड़े को भी केंद्रीय आलाकमान की पसंद देवेंद्र फडणवीस के प्रतिद्वंद्वी के तौर पर देखा जाता है।

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