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मोदी के लिए राजनाथ बने संकट मोचक?

Updated Wed, 25 Feb 2015 02:33 PM IST
Rajnath singh comes forward crisis on land acquisition Mock.
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भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव के मुद्दे पर फंसी केंद्र की मोदी सरकार के संकट मोचक बनकर वही केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह सामने आए हैं, जिन्हें हाशिए पर डालने की हर मुमकिन कोशिश शुरु में की गई। राजनाथ सिंह ने भी सरकार और पार्टी में साफ कर दिया है कि किसान हितों के मुद्दे पर वह सरकार के भीतर बहुत ज्यादा नहीं झुकेंगे।



उन्होंने लोकसभा में पेश भूमि अधिग्रहण विधेयक में किसान हितों की सुरक्षा के लिए जरूरी संशोधन पेश करके उन्हें नए कानून का हिस्सा बनाने का रास्ता निकाला है। ये संशोधन भाजपा सांसदों द्वारा ही पेश किए जाएंगे।


सरकार का संकट सुलझाने के लिए पिछले तीन दिनों से गृह मंत्री लगातार पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से लगातार बातचीत कर रहे हैं।

यह जानकारी देने वाले भाजपा की किसान राजनीति से जुड़े एक नेता ने बताया कि पर्दे के पीछे की राजनाथ सिंह की इस कवायद के बलबूते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा संसदीय दल की बैठक में कहा कि सरकार इस कानून से पीछे नहीं हटेगी। साथ ही उन्होंने बीच का रास्ता निकालने की गुंजाइश रखने के लिए कहा कि अच्छे संशोधनों का स्वागत होगा।

मोदी ने जताया राजनाथ पर भरोसा

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इस मुद्दे पर भाजपा की पूरी किसान लॉबी राजनाथ सिंह के पीछे एकजुट है और संघ नेतृत्व से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक ने इस मामले में बीच का रास्ता निकालने की जिम्मेदारी राजनाथ सिंह को दी है। विवादित भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के पैरोकार मंत्रियों को फिलहाल किनारे कर दिया गया है।

राजनाथ सिंह लगातार उन किसान संगठनों के नेताओं से बात कर रहे हैं, जिन्हें सरकार के खिलाफ धरना देने के लिए अण्णा हजारे की टीम ने बुलावा भेज रखा है। इनमें देश के 34 किसान संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं जिन्होंने सोमवार को दिल्ली में बैठक करके सरकार से बातचीत करने का फैसला किया है। बताया जाता है कि इन संगठनों को सरकार तक लाने के लिए राजी करने में राजनाथ सिंह के करीबी किसान नेता डा. कृष्णवीर चौधरी की कोशिश कामयाब रही।

शनिवार को सैफई और हरिद्वार से लौटने के बाद से ही राजनाथ सिंह भूमि अधिग्रहण विवाद में फंसी अपनी सरकार के संकट को सुलझाने में जुट गए। इस सिलसिले में उन्होंने उसी शाम अपने निवास पर ग्रामीण विकास मंत्री वीरेंद्र सिंह, पार्टी की वरिष्ठ नेता विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और किसान नेता डा. कृष्णवीर चौधरी के साथ करीब दो घंटे गहन चर्चा की।

किसान नेताओं से मिले गृह मंत्री

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मंगलवार की शाम अपने कार्यालय में भी राजनाथ सिंह ने भारतीय किसान संघ के महासचिव प्रभाकर केलकर और भारतीय कृषक समाज के नेता कृष्णवीर चौधरी के साथ भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैत, युद्धवीर सिंह, हरियाणा भूमि बचाओ संघर्ष समिति के महावीर गूलिया, जम्मू कश्मीर किसान संगठन परिषद के राजेश शर्मा, दिल्ली देहात की 360 खापों प्रधान चौधरी रामकरण सोलंकी, किसान नेता केसरी सिंह गुर्जर और छत्तीसगढ़ के डा. राजाराम त्रिपाठी से मुलाकात की।

इस मुलाकात में किसान नेताओं ने गृह मंत्री से भूमि अधिग्रहण कानून में सामाजिक प्रभाव आंकने की स्थाई व्यवस्था करने, अधिग्रहण के लिए वास्तविक भूस्वामियों के 70 फीसदी की सहमति अनिवार्य करने, भूमि अधिग्रहण की उचित संस्था( एप्रोप्रिएट बॉडी) में भूस्वामी किसानों का प्रतिनिधित्व देने, पांच साल तक अगर अधिग्रहीत भूमि बेकार पड़ी रहती है तो भूस्वामी को वापस देने, बिल्डरों, निजी अस्पतालों और निजी शिक्षा संस्थानों को सीधे भूस्वामी से जमीन खरीदने, 24-2 का प्रावधान जारी रखने, जब तक भूस्वामी के खाते में मुआवजे की रकम जमा न हो जाए जमीन का कब्जा ने लेने और देश की खाद्यान्न सुरक्षा की कीमत पर बहु फसली भूमि का अधिग्रहण न होने देने की बात कही।

किसानों ने कहा कि देश में करीब साढ़े पांच लाख वर्ग किलोमीटर गैर कृषि भूमि है। सरकार विकास की परियोजनाओं के लिए उसे चिन्हित करके उसका उपयोग क्यों नहीं करती।

संघ से भी मिले हैं अहम निर्देश

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बताया जाता है कि राजनाथ को संघ नेतृत्व की तरफ से इस बात के लिए हरी झंडी मिल गई है कि वह भूमि अधिग्रहण कानून में किसानों के हितों की रक्षा को सुनिश्चित करें।

इसके अलावा भाजपा के कई सांसदों और नेताओं ने भी राजनाथ सिंह से मिलकर भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव के बाद पार्टी और सरकार की किसान विरोधी छवि बनने पर चिंता जताई है।

गौरतलब है कि भूमि अधिग्रहण कानून -2013 में किसानों के हितों के संरक्षण के लिए जिन महत्वपूर्ण प्रावधानों को राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली भाजपा ने जुड़वाने में अहम भूमिका अदा की थी, मौजूदा अध्यादेश में उन्हें ही हटा दिया गया है। जबकि 2013 में लोकसभा में तत्कालीन नेता विपक्ष सुषमा स्वराज और ग्रामीण विकास मंत्रालय की संसदीय समिति की अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने लंबी कवायद केबाद वह सारे संशोधन पेश किए थे, जिन्हें कानून में जोड़ा गया था।
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