बीजेपी के 'मार्गदर्शकों' पर कार्रवाई नहीं चाहते राजनाथ सिंह
पूर्व भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने बिहार चुनाव के बाद पार्टी आलाकमान की मुखालफत में आवाज बुलंद करने वाले बुजुर्ग नेताओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई न करने की वकालत की है।
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, राजनाथ सिंह का मानना है कि पार्टी के भीतर उठ रहे विरोध के स्वरों का कुचला नहीं जाना चाहिए, बिहार में हार के कारणों की समीक्षा की जानी चाहिए और उचित कदम उठाने चाहिए। पार्टी के ही एक अन्य पूर्व अध्यक्ष वैंकेया नायडू ने कहा कि लाल कृष्ण आडवाणी ने पार्टी के विस्तान में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने जो बातें कही हैं, वो पार्टी फोरम में की जाती तो अच्छा होता। फिर भी उन पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि भाजपा मार्गदर्शक मंडल में शामिल पितृपुरुष लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, वरिष्ठ नेता शांता कुमार और यशवंत सिन्हा बुधवार को एक बयान जारी कर बिहार चुनाव में मिली करारी हार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अध्यक्ष अमित शाह पर सीधा हमला बोला था।
उस समय भाजपा की ओर से तीन पूर्व अध्यक्षों वैंकेया नायडू, राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी न जवाबी बयान जारी करते हुए मोदी और शाह का बचाव किया गया था। गडकरी ने बुजुर्ग नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
गोविंदाचार्य ने मोदी सरकार को दी क्लीन चिट
राजनाथ सिंह का मानना है कि बुजुर्गों नेताओं ने जो भी कहा है उसकी समीक्षा होनी चाहिए, और ऐसे कदम उठाए जाने चाहिए जो पार्टी के हित में हो। पूर्व भाजपा महासचिव गोविंदाचार्य ने भी बिहार चुनाव के मसले पर मोदी सरकार का क्लीन चिट दे दी है।
एबीपी न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा है कि बिहार चुनाव केंद्र सरकार का जनमत संग्रह नहीं था। उन्होंने बुजुर्ग नेताओं के बयान से भी खुद को अलग कर लिया और कहा उस बयान से उनका कोई लेनादेना नहीं है।
बुजुर्गों नेताओं के कड़े तेवर के बाद भाजपा नेतृत्व की ओर से भी सुलह सफाई की कोशिश की गई है। गुरुवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मोर्चा खोलने वाली टीम में शामिल मुरली मनोहर जोशी से मुलाकात की। जेटली ने जोशी से हुई मुलाकात को निजी बताया है।
सुलह की कोशिश में मुरली मनोहर जोशी से मिले जेटली
जेटली करीब आधे घंटे तक जोशी के निवास पर रहे। दोनों के बीच इस दौरान क्या बातचीत हुई इसका ब्यौरा नहीं मिल पाया है। माना जा रहा है कि विवाद के बीच ही प्रधानमंत्री के ब्रिटेन दौरे के कारण मामला संभालने की जिम्मेदारी जेटली को मिली है।
जेटली बुधवार को अपने बेटे के साथ लालकृष्ण आडवाणी के घर भी गए थे।
सुलह सफाई की कोशिश के बीच पार्टी के एक अन्य बुजुर्ग नेता करिया मुंडा ने पार्टी नेतृत्व पर निशाना साध कर बिहार चुनाव पर पार्टी में विवाद के जारी रहने के संकेत दिए हैं। उधर सांसद शत्रुघ्न सिन्हा का नेतृत्व के खिलाफ हमलावर रुख कायम है। उन्होंने गुरुवार को भी नेतृत्व पर हमला बोलना जारी रखा।
उन्होंने जेटली पर निशाना साधते हुए कहा, 'मैं राज्यसभा से चुन कर नहीं आए, बल्कि मेरा जनाधार है।'
बुजुर्ग नेताओं के खिलाफ क्या बोले थे गडकरी
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह का पक्ष लेते हुए बुजुर्ग नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी।
उन्होंने कहा, 'हमने पार्टी प्रमुख शाह से कहा है कि गैर-जिम्मेदाराना बयान देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनके बयानों से पार्टी की छवि धूमिल हो रही है।’
उन्होंने कहा कि जब पार्टी हारती है तो हर कोई समीक्षा की बात करता है लेकिन जब पार्टी की जीत होती है तो कोई इसके विश्लेषण की चर्चा नहीं करता है। गडकरी ने कहा कि इस तरह का बयान मोदी और शाह की नेतृत्व करने की क्षमता के खिलाफ बगावत जैसा काम है। उन्होंने कहा कि वह इस मसले पर आडवाणीजी से बात करेंगे।
साझा बयान में क्या कहा था बुजुर्ग नेताओं ने
बिहार विधानसभा चुनाव की हार के बाद भाजपा के बुजुर्ग नेताओं ने बुधवार की शाम बयान जारी कर कहा कि, 'नेतृत्व ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली हार से सबक नहीं सीखा।'
उन्होंन कहा कि शिकस्त दिलाने वाले नेताओं के बचाव के लिए हार के लिए सामूहिक जिम्मेदारी की बात कही जा रही है, जबकि हार की निष्पक्ष और विस्तृत समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंन ये भी कहा कि हार की ईमानदारी से समीक्षा वे लोग नहीं कर सकते जिन्होंने इस चुनाव का संचालन और नेतृत्व किया है।
बुजुर्ग नेताओं ने बीते एक साल में पार्टी की कार्यशैली में आए बदलाव पर भी गहरी नाराजगी जताई है। बयान में कहा गया है कि बीते एक साल में पार्टी का आम सहमति वाला चरित्र खो गया है। इसकी भी समीक्षा होनी चाहिए कि चंद लोगों द्वारा मनमाने तरीके से पार्टी को चलाया जा रहा है।