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'BJP ने की थी आरक्षण में बदलाव की कोशिश'

Wed, 28 Oct 2015 09:38 PM IST
Updated Wed, 28 Oct 2015 09:38 PM IST
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Rajnath government tried to change reservation policy in 2001

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण नीति की समीक्षा संबंधी बयान के बाद बीजेपी लगातार ये दावा कर है कि वह आरक्षण कानून में बदलाव नहीं करेगी।

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नालंदा की चुनावी रैली में सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि आरक्षण नीति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और जहां-जहां भी भाजपा की सरकार होगी उसे 'जस का तस' रखा जाएगा। मोदी ने कहा, 'बाबा साहब अंबेडकर द्वारा सामाजिक रूप से पिछड़े तबकों को दिया गया अधिकार मेरी सरकार कभी वापस नहीं लेगी।'
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प्रधानमंत्री मुखर होकर आरक्षण का बचाव कर रहे हैं। मुंबई में एक कार्यक्रम में भी उन्होंने कहा की आरक्षण पर पुनर्विचार कतई नहीं होगा।

बिहार की चुनावी राजनीति में दलित और पिछड़ी जातियों का वर्चस्व है, मोदी इस तथ्य को बखूबी समझते हैं। मोहन भागवत के बयान के बाद भाजपा ने बिहार विधानसभा चुनावों में जो नुकसान उठाया है या उठाने वाली है, उसकी भरपाई की जिम्मेदारी मोदी के कंधे पर ही है, इसलिए वह कह रहे हैं कि भाजपा ने कभी आरक्षण में बदलाव का प्रयास किया है और न कभी करेगी। हालांकि ये सच नहीं है।
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2001 में राजनाथ सरकार ने की आरक्षण में बदलाव की कोशिश

Rajnath government tried to change reservation policy in 2001

मोदी का दावा है कि बीजेपी की सरकारों ने आरक्षण नीति में कभी बदलाव का प्रयास नहीं किया, जबकि ये सच नहीं है।

कैचन्यूज में भारत भूषण ने लिखा है कि 2001 में उत्तर प्रदेश की तत्कालीन भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने मौजूदा आरक्षण नीति में बदलाव का प्रयास किया था। राजनाथ सिंह मौजूदा केंद्र सरकार में गृहमंत्री हैं। राजनाथ सरकार ने अन्य पिछड़ी जाति (OBC) और अनुसूचित जाति (SC) समूहों को उप समूहों बांटकर तय आरक्षित कोटे में विभाजन का प्रयास किया था।

राजनाथ सरकार ने जो समूह बनाए थे वे आय आधार‌ित क्रीमी लेयर या नॉन क्रीमी लेयर जैसे नहीं ‌थे, बल्‍कि कई जातियों को आरक्षण के दायरे से ही बाहर करने का प्रयास किया गया था।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने राजनाथ सरकार की कोशिशों पर पानी फेर दिया था, और उनके प्रस्ताव को रद्द कर दिया गया।

यादवों और जाटवों का कोटा कम कर दिया था राजना‌थ ने

Rajnath government tried to change reservation policy in 2001

उत्तर प्रदेश की राजनाथ सिंह सरकार ने पिछड़ी जातियों के 27 फीसदी कोटे में यादव, अहिर और यदुव‌ंशियों का कोटा 5 फीसदी तय किया था, जबकि अनुसूचित जातियों और जनजातियों के 21 फीसदी कोटे में जाटव, चमार और धुसिया जातियों का कोटा 10 फीसदी तय किया ‌गया था।

अनुसूचित जनजातियों का कोटा घटा कर दो से एक फीसदी कर दिया गया था, ताकि प्रदेश में कुल कोटा 50 फीसदी तक ही बना रहे। राजनाथ सरकार के फैसले का राजन‌ीतिक दलों समेत जाति समूहों ने भी कड़ा ‌विरोध किया। सुप्रीम कोर्ट उस फैसले को रद्द कर चुका है, हालांकि राजनाथ सिंह की न‌िजी वेबसाइट पर ये एक उपलब्धि के रूप में दर्ज है।

जून, 2001 में राजनाथ सिंह एक समिति बनाई थी, जिसे उन्होंने 'सामाजिक न्याय समिति' नाम दिया था। यूपी सरकार के तत्कालीन संसदीय कार्यमंत्री हुकुम सिंह को इसका अध्यक्ष बनाया गया था, स्वास्‍थ्य मंत्री रामपति शस्‍त्री और विधानपरिषद सदस्य दयाराम पाल सदस्य थे।

आरक्षण कम करने के लिए सर्वे भी कराया था

Rajnath government tried to change reservation policy in 2001

उस समिति को ये पता करने जिम्‍मेदारी दी गई थी कि आरक्षण का लाभ उन्हें मिल पा रहा है या नहीं, जिन्हें इनकी आवश्यकता है। समिति को आरक्षण नीति में बदलाव की सिफारिशें देने का निर्देश भी दिया गया था। भाजपा सरकार ने ये फैसला 'आरक्षण न‌ीतियों की गड़बड़ियां' दूर करने के लिए किया था।

सामाजिक न्याय समिति ने 60 दिनों में अपनी र‌िपोर्ट सौंप दी। भाजपा सरकार ने उसके बाद एक सामाजिक न्याय (30 जुलाई से 6 अगस्त, 2001) सप्ताह मनाया, जिसमें समिति के सुझावों पर राय मांगी गई ‌थी। राजनाथ सरकार ने उस समय सरकार नौकरियों में जातियों के कुल प्रतिनिधित्व का आंकलन करने के लिए एक सर्वेक्षण भी कराया था।

उस सर्वे के बाद राजनाथ सरकार ने ये नतीजा निकाला था कि आरक्षण अधिकांश लाभ ‌पिछड़ी जातियों में यादवों को और अनुसूचित जातियों में जाटव, चमार और धुसिया को ही मिल रहा है। इन्हीं नतीजों के बाद यादवों और जाटवों को आरक्षण सी‌मित कर दिया गया था।

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