{"_id":"41adb7a8-656c-11e2-93f9-d4ae52bc57c2","slug":"rajnath-challenge-to-unite-bjp","type":"story","status":"publish","title_hn":"भाजपा को एकजुट करना राजनाथ की बड़ी चुनौती","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
भाजपा को एकजुट करना राजनाथ की बड़ी चुनौती
नई दिल्ली/हरीश लखेड़ा
Updated Wed, 23 Jan 2013 08:20 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तीसरी बार भाजपा की कमान थामने वाले राजनाथ सिंह के सामने चुनौतियों के पहाड़ खड़े हैं। उन्हें एक ओर तो पार्टी को अब नौ राज्यों में विधानसभा चुनाव और अगले साल लोकसभा चुनाव के समर के लिए तैयार करना होगा, तो दूसरी ओर आंतरिक गुटबाजी के बीच वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी तथा गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी समेत तमाम बड़े नेताओं के साथ तालमेल भी बिठाना होगा।
विज्ञापन
सबसे पहले उनके लिए अपनी मजबूत टीम चुनने की चुनौती है, क्योंकि नई टीम बनाने के लिए उन्हें गुटबाजी में फंसी भाजपा के सभी दिग्गजों को साथ ले कर चलना होगा। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि गडकरी की टीम ज्यादा सक्षम साबित नहीं हई, क्योंकि कर्नाटक, झारखंड व उत्तराखंड में उस टीम की ज्यादा नहीं सुनी गई।
विज्ञापन
राजनाथ उत्तर प्रदेश से हैं, जहां पार्टी लगभग हाशिए पर है। भाजपा खुद कहती रही है कि दिल्ली के सिंहासन का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है। आडवाणी ने बुधवार को भी कहा कि उत्तर प्रदेश में पार्टी को पुराने दिन लौटाने होंगे। उत्तर प्रदेश के साथ ही उन्हें पूरे देश में पार्टी संगठन को आगामी लोकसभा चुनाव के लिए चुस्त-दुरस्त बनाना होगा। साथ ही राजनाथ सिंह को एनडीए का कुनबा बढ़ाना होगा।
विज्ञापन
राजनाथ को संगठनकर्ता और राजनीतिक प्रबंधन में माहिर माना जाता है। पिछले कार्यकाल के दौरान वे विवादों में भी नहीं घिरे, लेकिन पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं खासतौर पर अरुण जेटली, वसुंधरा राजे आदि के साथ उनके संबंध कटुता की स्थिति तक पहुंच गए थे।
संघ के करीबी माने जाने वाले राजनाथ को लेकर कहा जाता है कि तब आडवाणी के साथ भी उनके संबंध ज्यादा मधुर नहीं थे। बदली परिस्थितियों में अब उनके लिए आडवाणी की अनदेखी कर पाना आसान नहीं रहेगा, क्योंकि गडकरी की दोबारा ताजपोशी रुकवा कर आडवाणी ने साबित कर दिया है कि पार्टी में वे आज भी सबसे ज्यादा प्रभावशाली हैं।
इसी तरह गुजरात में हैट्रिक कायम कर पार्टी में अपना कद बढ़ा चुके मोदी की बात को नकार पाना उनके लिए मुश्किल होगा। इन सब मुद्दों के साथ यूपीए सरकार पर दबाव बनाए रखना भी उनके लिए एक बड़ी चुनौती होगी।