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राजनाथ को भाजपा की कमान, निर्विरोध अध्यक्ष बने

Thu, 24 Jan 2013 01:21 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Thu, 24 Jan 2013 01:21 AM IST
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rajnath becomes bjp president

राजनाथ सिंह बुधवार को निर्विरोध भाजपा अध्यक्ष चुन लिए गए। उन्होंने तीसरी बार पार्टी की कमान थामी है। बुधवार को अध्यक्ष पद के लिए सिर्फ राजनाथ सिंह ने ही नामांकन पत्र दाखिल किया। इसके बाद निर्वाचन अधिकारी थावर चंद गहलौत ने उनके निर्विरोध चुने जाने का ऐलान कर दिया।

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इससे पहले पार्टी संसदीय बोर्ड की बैठक में राजनाथ के नाम पर मुहर लगाई गई। वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के प्रस्ताव पर नितिन गडकरी समेत सभी सदस्यों ने एक सुर में हामी भर दी। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा अध्यक्ष रह चुके राजनाथ सिंह अब 2014 के संसदीय चुनाव के दौरान भी पार्टी की कमान थामे रहेंगे। उनका कार्यकाल 22 जनवरी 2015 को समाप्त होगा।
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अध्यक्ष चुने जाने के बाद अपने पहले संबोधन में राजनाथ सिंह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तारीफ के साथ ही आडवाणी की सलाह पर अमल करने का भरोसा दिलाया। आडवाणी ने संगठन को मजबूत बनाने व भ्रष्टाचार से कोई समझौता नहीं करने की बात कही थी। साथ ही सिंह ने नितिन गडकरी की तारीफ की और कहा कि पूरी भाजपा उनके साथ खड़ी है।
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तीसरी बार भाजपा की कमान थामने के बाद राजनाथ पूरे रंग में दिखे। उन्होंने यूपीए सरकार और कांग्रेस पर पर जमकर हमला बोला और कार्यकर्ताओं से आगामी लोकसभा चुनाव के लिए कमर कसने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार वोट बैंक की राजनीति के लिए देश को सांप्रदायिक तौर पर बांट रही है। गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे की कड़ी निंदा करते हुए राजनाथ ने कार्यकर्ताओं से बृहस्पतिवार के आंदोलन को सफल बनाने की अपील की।

पद नहीं, जिम्मेदारी समझकर थामी है कमान
भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्होंने पद नहीं, बल्कि जिम्मेदारी समझकर पार्टी की कमान संभाली है, क्योंकि आज हालात ठीक नहीं हैं और उनके सामने कई चुनौतियां हैं। साथ ही उन्होंने विश्वास जताया कि इस साल विभिन्न राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी को जीता हासिल होगी और अलग साल लोकसभा चुनाव के बाद केंद्र में भाजपा के नेतृत्व में राजग की सरकार बनेगी।


सिंह ने कहा कि आज देश के सामने समस्याएं मुंह खोले खड़ी हैं और देश की जनता को इनसे सिर्फ भाजपा ही निजात दिला सकती है। ऐसे में उन्हें पूरा विश्वास है कि 2014 में केंद्र में राजग की ही सरकार बनेगी। भाजपा अध्यक्ष ने आतंकवाद के मुद्दे पर केंद्र सरकार को जमकर कोसा और कहा कि कांग्रेस नीत यह सरकार आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के प्रति गंभीर नहीं है। उन्होंने भ्रष्टाचार के लिए भी कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया।

चुनौतियां जिनसे होना होगा दो-चार
- गुटबाजी में फंसी भाजपा को एकजुट करना
- लालकृष्ण आडवाणी और नरेंद्र  मोदी समेत सभी बड़े नेताओं के साथ तालमेल बिठाना
- इस वर्ष 9 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी को सफलता दिलाना
- 2014 के लोकसभा चुनाव में राजनाथ की होगी असली परीक्षा
- एनडीए का कुनबा बढ़ाने की होगी चुनौती
- यूपीए सरकार पर दबाव बनाए रखना
- अपने गृह राज्य उत्तर प्रदेश में पार्टी को मजबूत करना

खासियत:
- बेदाग राजनीतिक जीवन
- वाकपटुता और शब्दों से खेलने में माहिर
- तेज तर्रार नेता और विवादित बयानों से दूरी
- सरल स्वभाव और धीर-गंभीर व्यक्तित्व
- कर्मठ व जमीनी नेता की छवि
- संगठनकर्ता और राजनीतिक प्रबंधन में माहिर
- सभी को साथ लेकर चलने की कला
- संघ से करीबी

खामियां:
- पिछली बार कई वरिष्ठ नेताओं खासतौर पर अरुण जेटली, वसुंधरा राजे आदि से उनके संबंध कटु बन गए थे तब गुटबाजी बढ़ाने का भी आरोप लगा था
- पिछली बार अध्यक्ष रहते हुए लोकसभा के चुनाव में पार्टी का संख्या बल और घट गया था
- गृह राज्य उत्तर प्रदेश में भाजपा की स्थिति दयनीय

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