तब पाक को भारत के इस पीएम ने विदेशी ताकतों से बचाया था!
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अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के दस्तावेजों में दावा किया गया है कि शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ के करीबी माने जाने वाले भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने एक समय पाकिस्तान में सोवियत संघ विरोधी गुटों को समर्थन करने का मन बना लिया था।
हाल में सार्वजनिक किए गए सीआईए के गोपनीय दस्तावेजों में कहा गया है कि राजीव यह मानते थे कि अगर सोवियत संघ पाकिस्तान के तत्कालीन जनरल जियाउल हक के शासन को खत्म करवाता है, तो भारत वहां रूस विरोधी नागरिक समूहों का समर्थन करेगा। उनका मानना था कि दक्षिण एशिया में अमेरिका के साथ-साथ सोवियत संघ की भी दखलंदाजी का बढ़ना क्षेत्र के लिए ठीक नहीं है।
सीआईए ने शीत युद्ध के समय के इन दस्तावेजों को फ्रीडम ऑफ इंफॉर्मेशन एक्ट (भारत के आरटीआई के समान) के तहत अपनी वेबसाइट पर पोस्ट किया है। राजीव गांधी क्षेत्र में अमेरिका और सोवियत संघ का हस्तक्षेप नहीं चाहते थे।
पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन कराना चाहता था सोवियत संघ
सीआईए के 31 पेज के दस्तावेज के शीर्षक ‘द सोवियत प्रेजेंस इन अफगानिस्तान: इंप्लीकेशंस फॉर द रीजनल पावर्स एंड द यूएस’ के मुताबिक, ‘प्रधानमंत्री राजीव गांधी चाहेंगे कि दक्षिण एशिया में अमेरिका और सोवियत संघ अपनी संलिप्तता खत्म करें।’
भारत और सोवियत संघ के ऐतिहासिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए सीआईए के अप्रैल 1985 के दस्तावेज में कहा गया कि इस क्षेत्र में लंबे समय तक सोवियत संघ के हस्तक्षेप से भारत की चिंता बढ़ने की संभावना थी।
साथ ही अगर पाकिस्तान को प्रभावहीन कर दिया जाता, तो सोवियत संघ के साथ भारत का टकराव हो सकता था। भारत सोवियत संघ के खिलाफ पाक को रणनीतिक बफर जोन मानता था। रिपोर्ट के मुताबिक सोवियत संघ की योजना पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन करवाकर अफगानिस्तान से बाहर भी अपना दबदबा कायम करना था।