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राजीव गांधी ने भी अपराधी 'दोस्त की मदद' की थी

Fri, 19 Jun 2015 04:25 PM IST
Updated Fri, 19 Jun 2015 04:25 PM IST
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rajeev gandhi helped one of his convicted friend but when

अगर सुषमा स्वराज और वसुंधरा राजे सिंधिया ने आईपीएल के कमिश्नर रह चुके और अब आरोपों में फंसे ललित मोदी का साथ दिया था तो पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने भी अमरीका में कई आरोपों के तहत सज़ा पाए अपने बचपन के एक दोस्त के लिए ऐसा ही कुछ किया था। यह साल 1985 के मध्य की बात है, उस समय वो प्रधानमंत्री थे और अमरीका के सरकारी दौरे पर जाने ही वाले थे।

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हालांकि राजीव ने इस तरह के किसी हस्तक्षेप से इनकार किया था लेकिन यह ज़रूर कहा था कि उनके मित्र आदिल शहरयार को ‘ग़लत तरीक़े से ज़ेल’ भेजा गया था। शहरयार को अमरीकी राष्ट्रपति की ओर से विशेष माफ़ी मिल गई थी। गांधी परिवार के मित्र और आदिल के पिता मोहम्मद यूनुस कथित तौर पर मानते थे कि आदिल को ‘साज़िशन फंसाया’ गया था। मोहम्मद यूनुस जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के क़रीबी थे।
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कथित तौर पर राजीव गांधी ने रोनाल्ड रीगन से व्यक्तिगत तौर पर अपील की थी। इसके बाद तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति ने आदिल की 35 साल की सज़ा को माफ़ कर दिया था। आदिल पर अमरीका के फ्लोरिडा में बम विस्फ़ोट, फर्जीवाड़ा और अन्य गैरक़ानूनी गतिविधियों का आरोप था। न्यूयॉर्क टाइम्स में 15 अगस्त 1985 को छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, रीगन ने माफ़ीनामे वाले दस्तावेजों पर 11 जून को हस्ताक्षर किए थे। इसी दिन राजीव वॉशिंगटन पहुंचे थे।
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अख़बार के अनुसार, इरविन मोलोत्स्की और वॉरेन वीवर जूनियर ने कहा था, “राष्ट्रपति के बाकी दस्तावेजों से उलट, क्षमादान की बात व्हाइट हाउस द्वारा नियमित रूप से प्रकाशित नहीं की जाती थी और ना ही प्रेस को मुहैया कराई जाती थी। लेकिन शहरयार को माफी मिलने की ख़बर भारतीय अख़बरों में छपी और व्हाइट हाउस के प्रेस ऑफ़िस से इसकी पुष्टि भी की गई। व्हाइट हाउस ने जानकारी मांगने वालों को जस्टिस डिपार्टमेंट से टिप्पणी मांगने को कहा।”

दोस्त की ख़ातिर...

rajeev gandhi helped one of his convicted friend but when

वीवर के मुताबिक़, “डिपार्टमेंट के प्रवक्ता जोसफ़ क्रोविस्की ने कहा था कि आधिकारिक क्षमा दान में जितना लिखा है उससे अधिक वो नहीं बता सकते। क्षमादान में कहा गया था कि शहरयार को 1991 से पहले पैरोल नहीं दिया जाएगा।” इंडिया एब्रॉड अख़बार के मुताबिक़, राजीव गांधी ने अपने दोस्त को माफ़ी देने के लिए कहने से इनकार किया था लेकिन इतना स्वीकार किया था, “हमें विश्वास है कि उन्हें ग़लत तरीके से जेल में डाला गया।”

लेकिन ज़ेल से छूटने के बाद बीमारी और मोहभंग के कारण आदिल बहुत दिन तक ज़िंदा नहीं रहे। उनके पिता यूनुस निजी बातचीत में अक्सर कहा करते थे कि उनका बेटा ‘ग़लत संगत’ में पड़ गया था। यूनुस तुर्की, इंडोनेशिया, इराक़ और स्पेन में राजदूत रह चुके थे और वाणिज्य मंत्रालय में सचिव के पद से रिटायर हुए थे।

संजय गांधी के भी दोस्त
‘इंदिरा- द लाइफ़ ऑफ़ इंदिरा नेहरू गांधी’ क़िताब में कैथरीन फ्रैंक ने दावा किया था कि आदिल कार चुराते थे, घूमते थे और फ़िर दिल्ली में उन्हें छोड़ देते थे। हालांकि इस आरोप को यूनुस ने ख़ारिज किया है। आदिल राजीव गांधी के भाई संजय गांधी के भी बचपन के दोस्त थे। संजय गांधी ने अपनी भविष्य की पत्नी मेनका गांधी से आदिल की मौजूदगी में ही मुलाक़ात की थी।

सेना के रिटायर्ड जनरल बीडी कपूर और उनकी पत्नी छुट्टियों के दौरान, यूनुस के आधिकारिक निवास, 12 विलिंगडन क्रीसेंट में रुकते थे। उनके बेटे विन्नू की जल्द ही आदिल और संजय से दोस्ती हो गई। मेनका जनरल कपूर की भांजी थीं और वो उन्हें मिलने अक्सर आती थीं। सितंबर 1974 में संजय और मेनका शादी करने वाले थे। उस समय कपूर ने यूनुस को सुझाव दिया कि यह शादी विलिंगडन क्रीसेंट में हो लेकिन इसमें एक समस्या थी।

मेनका से शादी में भूमिका

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उस समय सरकारी खर्चों में कटौती का माहौल चल रहा था और सरकार ने सरकारी घरों की मरम्मत और सफेदी करना बंद कर दिया था। ऐसे समय आदिल ने अपने खर्चे पर रंग रोगन कराया और फूलों से घर सजवाया।

मेनका के अभिभावकों, अमतेश्वर और टीएस आनंद को डिनर समेत किसी भी चीज़ के लिए भुगतान न करने को कह दिया गया था। मेनका, इंदिरा गांधी से मतभेद के बहुत बाद तक ‘यूनुस चाचा’ को बहुत मानती रहीं। यूनुस की साल 2001 में मौत हो गई।

नब्बे के दशक में एक बार उन्हें सोनिया गांधी से झिड़की खानी पड़ी जब यूनुस ने एक बयान जारी कर कहा था कि राजीव की विधवा राजनीति में शामिल होने की जगह दिल्ली की सड़कों पर भीख मांग लेगी। इसके बाद सोनिया गांधी ने अपने क़रीबी सहयोगी वी जॉर्ज से एक स्पष्टीकरण जारी करने को कहा था जिसमें कहा गया था कि युनूस उनका प्रतिनिधित्व नहीं करते। सोनिया के कदम से आहत यूनुस ने कहा था, “नौकर नौकर ही रहता है।”

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