112 रुपए के लिए मुख्य सचिव को भी लगाने पड़े चक्कर
नौकरशाही में मुख्य सचिव की हैसियत मुख्यमंत्री से कम नहीं होती, लेकिन उसी मुख्य सचिव को मात्र 112 रुपए का बिल पास करने के लिए एड़ियां घिसनी पड़ जाए, तो आप क्या कहेंगे? लालफीताशाही की इन्तहां या कुछ और?
दरअसल राजस्थान में ऐसा ही वाकया सामने आया है। वित्त विभाग के अधिकारियों ने राज्य के मुख्य सचिव राजीव महर्षि का 112 रुपए का यात्रा भत्ते के बिल पास ही नहीं किया।
मुख्यमंत्री वसुंधराराजे के हस्तक्षेप के बाद महर्षि को ये पैसे मिल पाए। और तो और वरिष्ठ अधिकारियों को मसले को सुलझाने के लिए 20 बैठकें करनी पड़ीं।
मामले की चर्चा हाल ही में भाजपा नेता घनश्याम तिवारी ने विधानसभा में की।
वसुंधरा राजे को करना पड़ा हस्तक्षेप
दरअसल राजीव महर्षि ने चंद दिनों पहले सरकारी कामकाज से दिल्ली की यात्रा की था। लौटने के बाद उन्होंने अपनी हवाई यात्रा का 13,112 रुपए का बिल वित्त विभाग को भेजा। बिल में 112 रुपए का सर्विस चार्ज भी शामिल था।
वित्त विभाग ने 13,000 रुपए का बिल पास कर दिया, लेकिन सर्विस चार्ज के 112 रुपए देने से मना कर दिए। महर्षि विभाग के रवैये से बहुत ही नाराज हुए। उन्होंने विरोध स्वरूप एक नोट लिखा और पैसे देने की मांग की। हालांकि महर्षि के नोट के बाद काम होने के बजाय, और अटक गया।
मामले ने एक विवाद का रूप ले लिया, जिसे हल करने के लिए वित्त सचिव समेत कई आला अधिकारियों की 20 बैठकें हुई। इन बैठकों का नतीजा एक मोटी फाइल के रूप में सामने आया।
वित्त सचिव ने अंतिम निर्णय लेने के लिए ये फाइल मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पास भेजी। राजे ने मामले को सुलझाने के लिए कुछ नियमों में छूट देने की इजाजत दी, जिसके बाद मुख्य सचिव का बिल पास किया जा सका।