'आजम खान की भाषा बोल रहे हैं मुलायम सिंह'
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रेप पर फांसी के विरोध में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मुलायम सिंह यादव के बयान से महिला संगठनों के साथ-साथ राष्ट्रीय महिला आयोग भी खासा नाराज है। महिला आयोग ने इस मामले को स्वत: संज्ञान में लिया है। आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मुलायम सिंह से जवाब तलब किया है।
साथ ही आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और चुनाव आयोग को भी चिट्ठी लिखी है। उधर, उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी उमेश सिन्हा ने जिला निर्वाचन अधिकारी संजय कुमार से बातचीत की और भाषण की सीडी भी मांगी है।
महिला आयोग ने मुलायम से अगले तीन दिनों में जवाब मांगा है। चिट्ठी में यह कहा गया है कि समय पर जवाब नहीं मिलने पर सपा सुप्रीमो को आयोग के समक्ष खुद पेश होना पड़ेगा। ममता शर्मा ने यूपी के मुख्यमंत्री से इस मामले की समीक्षा कर और कानून के मुताबिक कदम उठाने को कहा है। वहीं चुनाव आयोग को लिखे गए पत्र में इस मामले में कड़े कदम उठाने की अपील की गई है।
'मुलायम का बयान शर्मनाक और आपत्तिजनक'
महिला आयोग की सदस्य शमीना शफीक का कहना है कि मुलायम का बयान उनकी मानसिकता को दर्शाता है। चूंकि वे बड़ी राजनीतिक हस्ती हैं और उनकी बातें आम जनता को प्रभावित करती हैं, इसलिए खासतौर पर उन्हें इस तरह का शर्मनाक और आपत्तिजनक बयान नहीं देना चाहिए। सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की रंजना कुमारी ने मुलायम सिंह के बयान को दुष्कर्मियों को बढ़ावा देने वाला बताया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुलायम सिंह पहले से ही महिला विरोधी रहे हैं। संसद में महिला आरक्षण विधेयक पारित नहीं होने देने में उनका भी बड़ा योगदान रहा है। ऐसे बयान उनकी खराब मानसिकता को पेश करती है। मुलायम को अपने बयान पर महिलाओं से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी चाहिए।
रंजना कुमारी ने अबू आजमी के बयान को भी आड़े हाथ लेते हुए कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की ओर से दिये जा रहे ऐसे बयान पार्टी की आपराधिक छवि बनाती है। इसका असर उनकी महिला वोट बैंक पर होगा। लेकिन इस ओर उनका ध्यान नहीं जा रहा है। दरअसल महाराष्ट्र में सपा के अध्यक्ष अबू आजमी ने भी इस मुद्दे पर विवादित बयान देकर आग में घी डालने की कोशिश की है।
मुलायम अपने बयान पर पर कायम
बबराला में बलात्कार के मामलों में फांसी न दिए जाने के बयान पर उठे सियासी तूफान के बाद भी सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव अपने बयान पर कायम हैं। जब विदेशों में रेप के मामलों में फांसी पर प्रतिबंध है, तो भारत में ऐसा क्यों नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि फांसी पर बहस छिड़नी चाहिए। इसीलिए उन्होंने बयान दिया है। उन्होंने बलात्कारियों को फांसी देने के स्थान पर आजीवन कारावास की वकालत भी की।
बदायूं सीट से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार धर्मेंद्र यादव के पक्ष में बबराला में आयोजित चुनावी जनसभा में मुलायम ने कहा कि बलात्कार के मामले में 20-30 साल की सजा हो जाए, ताकि बलात्कारी जेल से ही न छूट सके । लेकिन, फांसी पर तो बहस छिड़नी चाहिए। इस पर बहस छेड़ने के लिए ही उन्होंने बयान दिया है। बहस छिड़ेगी तो नतीजा भी निकलेगा।
साथ ही सफाई पेश की कि वह दोषियों को सजा देने के खिलाफ नहीं है। हत्या के मामले हों या बलात्कार के, कई बार फर्जी केस दर्ज होते हैं। निर्दोष फंसा दिए जाते हैं। ऐसे में निर्दोष को फंसाने वाले पर भी मुकदमा दर्ज होना चाहिए। कहा, जहां तक रेप पर मेरे बयान का मामला है निराश और हताश लोग ही विरोध कर रहे हैं, पर शायद उन्हें पता ही नहीं है कि लोग जितना विरोध करेंगे उतनी ही मेरी लोकप्रियता बढ़ेगी। मेरा बयान गलत नहीं है। बयान पर जितना बवाल करना है, करने दीजिए। जनता में कोई विरोध नहीं है और लोग मेरी बात को समझ रहे हैं।
आजम की भाषा बोल रहे हैं मुलायम: जयाप्रदा
गजरौला में बलात्कारियों को फांसी की सजा के विरोध संबंधी मुलायम सिंह के बयान पर सांसद व अभिनेत्री जयाप्रदा खुलकर बोलीं। कहा कि यह नेताजी की नहीं रामपुर के विधायक आजम खां की भाषा है। यह महिलाओं के लिए अपमान वाली बात है।
उन्होंने कहा सपा सुप्रीमो रेप पीड़िताओं को मुआवजा, रोजगार देने संबंधी बयान भी पिछले चुनाव में दे चुके हैं। नेताजी के मुंह से यह बातें अशोभनीय लगती हैं। बातों ही बातों में जयाप्रदा ने भाजपा के पीएम पद प्रत्याशी नरेंद्र मोदी के बयानों को मतों का ध्रुवीकरण करने वाला करार दिया।
कहा कि इलेक्शन के दौरान इस तरह के बयान कुछ लोगों को डरा देते हैं और वे फिर अपने विवेक से मत का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं।