क्या टूट रहा है राज ठाकरे का तिलिस्म?
जहर उगलने में माहिर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे लोकसभा चुनाव में फ्लॉप साबित हो रहे हैं। इस बार उनका सिक्का नहीं चल पा रहा है।
हर छोटी-मोटी सभा का लाईव प्रसारण करने वाली मराठी मीडिया ने भी उनसे मुंह मोड़ लिया है। ऐन चुनाव के वक्त इस तरह के फ्लॉप शो से कार्यकर्ताओं में घोर निराशा है।
ऐसे में यह चर्चा आम है कि क्या लोकसभा चुनाव में मराठी मानुष राज ठाकरे को नकारने की फिराक में है। ऐसा हुआ तो यह राज ठाकरे का तिलस्म टूटना तय है।
पिछले चुनाव में बिगड़ा बीजेपी-शिवसेना का गणित
राज ठाकरे उत्तर भारतीय विरोध की बुनियाद पर मराठी भूमिपुत्रों के सबसे बड़े रहनुमा बनकर उभरे हैं। सन 2009 के चुनाव में उन्हें इसका लाभ भी मिला था।
विगत लोकसभा चुनाव में मुंबई सहित पुणे और नासिक में मनसे के रेल इंजन ने भाजपा-शिवसेना की रफ्तार पर ब्रेक लगाते हुए भगवा दल के राज्य में सत्तासीन होने के सपने को भी चकनाचूर कर दिया था।
पांच साल में स्थिति काफी बदल गई है। कुछ समय पहले तक मुंबई सहित महाराष्ट्र की मराठी जनता उनकी जनसभाओं का भाषण सुनने के लिए मराठी टेलीविजन चैनलों से चिपकी रहती थी।
टीवी पर लुढक गई राज ठाकरे की टीआरपी
राज ठाकरे अपनी हर सभा में कुछ न कुछ ऐसा कंट्रोवर्सियल बयान देते थे जो चर्चा का विषय बनता था। चुनाव प्रचार के दौरान हालांकि शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे अब भी उनका साफ्ट टार्गेट हैं लेकिन पहले की अपेक्षा मराठी टेलिविजन चैनलो में राज ठाकरे की टीआरपी लुढक गई है।
पार्टी का ग्राफ गिरने के लिए मनसे कार्यकर्ता राज ठाकरे को ही जिम्मेदार मानते हैं लेकिन इस उम्मीद के साथ कि आने वाले समय में पार्टी की स्थिति बेहतर होगी।
दरअसल, उन्हें लोकसभा चुनाव से उतना लेना-देना नहीं है बल्कि अक्टूबर में संभावित विधानसभा चुनाव की चिंता है। राज ठाकरे भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के नाम पर वोट मांग रहे हैं।
राजनाथ ने बिन मांगे समर्थन के लिए किया था तंज
भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने बिन मांगे समर्थन के लिए राज ठाकरे पर तंज कसा जिससे वे बैकफुट पर आ गए। हालांकि बाद में उन्होंने भी पलटवार किया है कि राजनाथ सिंह के लिए नहीं नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए वोट मांग रहे हैं।
बहरहाल, इस बीच अप्रत्याशित तौर पर राज ठाकरे ने प्रदेश भाजपा में गडकरी के कथित विरोधी बीड से भाजपा उम्मीदवार गोपीनाथ मुंडे को समर्थन देने की घोषणा कर दी है।
यह आश्चर्यजनक है क्योंकि इससे पहले उन्होंने दो सीट भिवंडी और पुणे में मुंडे समर्थक भाजपा उम्मीदवार के सामने मनसे का उम्मीदवार उतारकर उन्हें घेरने की कोशिश की हैं।
मनसे ने 10 सीट पर उतारे हैं उम्मीदवार
राज्य की 48 सीटों में से मनसे ने 10 सीट पर अपने उम्मीदवार उतारा हैं।
अन्य 8 सीटों पर मनसे शिवसेना के खिलाफ है। मुंबई-ठाणे में मनसे की इतनी क्षमता जरूर है कि वह शिवसेना को नुकसान पहुंचा सके लेकिन संसद की राह कठिन है।
मनसे के नेता चाहते हैं कि राज अपने पुराने तेवर में आएं लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है।