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कांग्रेस को भी नहीं पची पांच रुपये की थाली
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Fri, 26 Jul 2013 11:53 PM IST
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गरीबी का मजाक उड़ाने वाले बयानों पर उठे बवाल से कांग्रेस की सांसे फूल गई हैं।
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मजबूरन पार्टी नेताओं की ओर से पांच रुपये और बारह रुपये में भोजन की थाली मिलने के बयानों पर डैमेज कंट्रोल में जुट गई है। इस कोशिश के तहत पार्टी ने कहा कि वह अपने नेताओं के बयानों से सहमत नहीं है।
बाजार में टमाटर के भाव 80 रुपये किलो है तो प्याज 40 रुपये किलो बिक रहे हैं। हरी सब्जियों के भाव भी आसमान पर हैं, लेकिन महंगाई के इस जमाने में भी दिल्ली में पांच रुपये में और मुंबई में 12 रुपये में भोजन की थाली मिल जाती है।
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ये थाली कहां मिलती है इसका पता हमें और आपको हो न हो, कांग्रेस नेता रशीद मसूद और राज बब्बर को जरूर है।
उन्होंने इसका पता लोगों को बता भी दिया है, लेकिन उनकी यह थाली खुद उनकी पार्टी को ही नहीं पच रही है। मजबूरन पार्टी ने अपने दोनों नेताओं के बयान से किनारा कर लिया है।
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अपने बयान पर बढ़ते बवाल और पार्टी के मूड को भांपते हुए राज बब्बर ने 12 रुपये के अपने बयान पर खेद जता दिया है, लेकिन गरीबी का मजाक उड़ाने वाले बयान के लिए उन्होंने माफी नहीं मांगी है।
गरीबी का मजाक उड़ाने वाला बयान कांग्रेस के इन दो नेताओं के साथ ही केंद्रीय मंत्री फारूक अब्दुल्ला की ओर से भी आया है।
उन्होंने कहा है कि अगर आप चाहें तो एक रुपये में अपना पेट सकते हैं, नहीं तो 100 रुपये में भी पेट नहीं भरेगा। इस मुद्दे पर बढ़ते विवाद को देखते हुए उन्होंने भी अपने बयान पर खेद जता दिया है।
मसूद और राज बब्बर की ओर से दिए गरीबी का मजाक उड़ाने वाले बयानों पर शुक्रवार को विवाद बढ़ गया। मीडिया की सुर्खियों में राज बब्बर और मसूद के बयानों की आलोचनाओं का दौर शुरू हो गया।
रिपोर्टरों ने बाजार में जाकर पांच और 12 रुपये का खाना ढूंढना शुरू कर दिया। इस पर लोगों ने खुलकर गुस्सा जाहिर किया।
लिहाजा, पार्टी महासचिव अजय माकन को ट्वीट करना पड़ा कि हम अपने नेताओं के बयानों से सहमत नहीं हैं।
इतना ही नहीं, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पार्टी भी डैमेज कंट्रोल की कसरत में जुट गई है। पार्टी ने कहा कि वह पांच और 12 रुपये में भोजन की थाली मिलने के अपने नेताओं के बयानों से सहमत नहीं है।
उधर, पार्टी की नियमित ब्रीफिंग में कांग्रेस प्रवक्ता रेणुका चौधरी को सवालों का जवाब देना भारी पड़ गया। उन्होंने बस इतना कहा कि राज बब्बर ने अफसोस जता दिया है और अजय माकन ने इन बयानों को नकार दिया है। ऐसे में इस मामले को यहीं खत्म कर देना चाहिए।
वैसे मसूद और राज बब्बर के बयानों से कांग्रेस के कई नेता सहमत नहीं हैं। पार्टी के शीर्ष स्तर पर भी माना जा रहा है कि ऐसे बड़बोलेपन से पार्टी को सियासी नुकसान हो सकता है।
सिब्बल ने की गरीबी की परिभाषा की आलोचना
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री कपिल सिब्बल योजना आयोग की गरीबी की परिभाषा से सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा है कि आयोग ने गरीबी का आकलन करने के लिए जो तरीका अपनाया है वह सही नहीं है।
उन्होंने कहा कि आज के समय में पांच लोगों का परिवार पांच हजार रुपये में एक महीने गुजारा नहीं कर सकता।
गौरतलब है कि योजना आयोग ने ग्रामीण क्षेत्रों में 4080 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 5000 रुपये प्रति माह से अधिक खर्च करने वाले पांच सदस्यों वाले परिवार को गरीबों की श्रेणी से बाहर माना है।
कहां कितने में मिलती है भोजन की थाली
तिहाड़ जेल---50 रुपये
राज्य के जेलों में---30-32 रुपये
संसद कैंटीन---18 रुपये (सरकार देती है प्रतिदिन 3.5 लाख रुपये की सब्सिडी)
योजना आयोग की थाली---32 रुपये
मुंबई में कांग्रेस कार्यालय कैंटीन---50 रुपये