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मनमोहन की ताजपोशी पर ही उठने लगे सवाल

Wed, 11 Dec 2013 11:33 AM IST
धीरज कनोजिया/अमर उजाला, दिल्ली
धीरज कनोजिया/अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 11 Dec 2013 11:33 AM IST
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raising questions on manmohan singh appointment

चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार को लेकर दो दिन चुप्पी होने के बाद अब ज्वालामुखी फूट गया है।

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शुरूआत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने की है। अय्यर ने मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाने को लेकर पार्टी के नेतृत्व पर ही सवाल उठा दिया है।

अय्यर के हल्ला बोल से कांग्रेस हाईकमान ने तो किनारा कर लिया। मगर पार्टी के नेताओं ने अपने अपने स्तर पर अय्यर पर धावा बोल दिया। हार से कांग्रेस के भीतर मची खलबली खुले आम हो गई।

अभी तक हार के कारणों और इसकी समीक्षा करने को लेकर ही बात हो रही थी। मगर पार्टी के जख्मों पर अय्यर ने नमक डाल दिया। अय्यर ने कहा कि 2009 में प्रधानमंत्री बनाने का फैसला सुरक्षित रख लिया जाना चाहिए था।
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उन्होंने पार्टी के पुनर्गठन की मांग करते हुए कहा कि कांग्रेस को विपक्ष में बैठकर अपनी गलतियों का आत्ममंथन करना चाहिए। गौरतलब है कि 2009 के लोकसभा चुनाव के समय खुद सोनिया गांधी ने चुनाव घोषणा पत्र में बनी अपनी फोटों पर हाथ रखकर मनमोहन सिंह की तस्वीर की ओर इशारा कर उनकी उम्मीदवारी का ऐलान किया था।
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अब अय्यर कह रहे है कि वह मनमोहन सिंह को बदलने की बात नहीं कह रहे है। वह पार्टी में जान फूंकने की बात कह रहे है। जैसा कि 1985 में राजीव गांधी ने किया था। अय्यर ने चेतावनी दी कि अगर कांग्रेस ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया। तो वह बड़ी मुश्किल में फंस सकती है।

अय्यर की बेबाक राय को लेकर पार्टी में घमासान मच गया। कांग्रेस नेता विलास राव मुत्तेमवार ने कहा कि अय्यर सरकार में इतने बड़े पदों पर रहे। तब उन्होंने पार्टी फोरम में यह बात नहीं। अब जब पार्टी को हार मिली है तो वह नकारात्मक राय देकर पार्टी का ही नुकसान कर रहे है।


वहीं कांग्रेस प्रवक्ता राज बब्बर ने अय्यर की बात को उनकी निजी राय बताया। उधर, मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को निशाने बनाने का सवाल ही नहीं है। अगर कोई ऐसा कर रहा है तो यह बेहद गलत बात है। उधर हार से पार्टी में निराशा है। कई बड़े वरिष्ठ नेता दबी जुबान में कह रहे है कि अब जाने का समय आ गया है। मगर अय्यर ने जिस तरह से खुलकर बयानबाजी की है। उसे पार्टी नेताओं में जबरदस्त रोष है।

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