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कोहरे से निपटेगी रेलवे की 'क्लोन' ट्रेन

Thu, 01 Jan 2015 09:42 AM IST
Updated Thu, 01 Jan 2015 09:42 AM IST
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Railways would deal fog with 'clone' train

सर्दियां शुरू होते ही कोहरे की मार के चलते थोक के भाव लेट होती ट्रेनें न अब यात्रियों के जी का जंजाल बनेंगी और न ही रेलवे को इससे जूझना पड़ेगा। कोहरे की मार से जूझ रहे नार्दन रेलवे ने इससे निपटने का नया उपाय खोज निकाला है।

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सर्द मौसम में कोहरे से बचने के लिए रेलवे क्लोन ट्रेन के द्वारा इसे मात देने की तैयारी में हैं। दो दिन पूर्व दिल्ली भुवनेश्वर मार्ग पर इसका प्रयोग भी सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। ऐसे में अगले कुछ दिनों में लगभग 30 महत्वपूर्ण ट्रेनों के रूट पर इसे लागू करने की योजना है।
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सर्दियों के मौसम में रेलवे की सबसे बड़ी समस्या होती है कोहरा। खासकर उत्तर भारत में जबरदस्त कोहरे के चलते सैकडों की संख्या में ट्रेनों के टाइम में फेरबदल होता है। कई ट्रेनों को तो लंबे समय के लिए रद भी करना पड़ जाता है।
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क्या है क्लोन व्यवस्‍‌था

Railways would deal fog with 'clone' train

कोहरे से निपटने के लिए कोई हाइटेक तकनीक न होने के कारण अभी तक रेलवे ट्रेनों का समय परिवर्तित कर जैसे तैसे परिचालन कर पाता है। लेकिन अब जल्द ही इस समस्या को दूर करने की तैयारी चल रही है।

रेलवे ने इसके लिए क्लोन ट्रेन का आइडिया निकाला है। इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार रेलवे अब कोहरे की समस्या को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण ट्रेनों के रूट पर क्लोन ट्रेन चलाने के आइ‌डिया पर काम कर रहा है।

असल में ट्रेन कोहरे के चलते लेट होने के कारण कई बार घंटों घंटों की देरी से अपने गंतव्य पर पहुंचती है। ऐसे में उसकी साफ सफाई और अन्य जरूरी कार्यों में भी कई घंटे का समय लग जाता है जिसके चलते ट्रेन उक्‍त स्टेशन से वापसी में निर्धारित समय से काफी देरी से रवाना हो पाती है। ऐसे में रेलवे अब महत्वपूर्ण ट्रेनों के लिए कुछ अतिरिक्‍त रैक चलाने की व्यवस्‍था कर रहा है।

महत्वपूर्ण ट्रेनों के रखे जाएंगे अतिरिक्‍त रैक

Railways would deal fog with 'clone' train

ऐसे में उसकी साफ सफाई और अन्य जरूरी कार्यों में भी कई घंटे का समय लग जाता है जिसके चलते ट्रेन उक्‍त स्टेशन से वापसी में निर्धारित समय से काफी देरी से रवाना हो पाती है। ऐसे में रेलवे अब महत्वपूर्ण ट्रेनों के लिए कुछ अतिरिक्‍त रैक चलाने की व्यवस्‍था कर रहा है।

जो ट्रेन देरी से आएगी उसके इंजन को पहले से तैयार रखे गए अतिरिक्‍त रैक के साथ जोड़कर उस ट्रेन के समय पर रवाना कर दिया जाएगा। जबकि जो रैक देरी से आया है बाद में उसकी क्‍लीनिंग और बैटरी चार्जिंग आदि कार्य आराम से किए जा सकेंगे।

इसका फायदा यह होगा कि ट्रेन आएगी तो देरी से लेकिन उसे वापिस समय से भेजा जा सकेगा। ऐसे में एक तरफ की देरी से यात्रियों को राहत मिल सकेगी। हालांकि फिलहाल यह व्यवस्‍था कुछ महत्वपूर्ण ट्रेनों के रूट पर ही की जाएगी।

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