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5 साल में बदल जाएगा रेलवे, रेल बजट होगा पुराने दिनों की बात

Fri, 12 Jun 2015 03:05 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 12 Jun 2015 03:05 PM IST
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railway should go in private hands, rail budget should be phased out

भारतीय रेल को नई दशा और दिशा देने के लिए बनाई गई बिबेक देवराय कमेटी की बहुप्रतिक्षित रिपोर्ट जल्द ही रेल मंत्रालय को सौंपी जा सकती है।

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रेलवे के ढांचे में सुधार के लिए रिपोर्ट में कई बदलावों की चर्चा की गई है और 5 साल का रोडमैप तैयार किया गया है, जिसके आधार पर रेलवे की दशा बदलने की बात कही जा रही है।
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रिपोर्ट में रेलवे की आर्थिक गतिविधियों के संचालन के लिए नियामक प्राधिकरण बनाकर रेल बजट को खत्म करने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में ट्रेनों के संचालन को प्राइवेट हाथों में देने की बात भी कही गई है जिसकी शुरुआत सवारी गाड़ियों से की जा सकती है।
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नियामक प्राधिकरण बनाने की अनुशंसा

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मार्च में कमेटी की अंतरिम रिपोर्ट जहां रेलवे के बदलाव को लेकर आक्रामक दृष्टिकोण अपनाने की बात की गई थी, वहीं अंतिम रिपोर्ट में नियमित बदलावों की बात कही गई है।

रिपोर्ट में रेलवे के लिए स्वतंत्र और अर्ध-न्यायिक रेलवे नियामक प्राधिकारण बनाने की अनुशंसा की गई है। अगर ये सिफारिश मानी गई तो अगले पांच साल के भीतर रेलवे बजट बीते दिनों की बात हो जाएगी।

रिपोर्ट के मुताबिक अगर ये सिफारिशें अगले पांच साल में लागू की गई और सामाजिक लागत के प्रभावों को भी बेहतर बनाया गया को रेलवे बजट पुरानी बात हो जाएगी।

कमेटी ने किया अपना बचाव

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रिपोर्ट ने कहा कि सरकार रेलवे पर सामाजिक लागत का सारा दबाव रेलवे पर सब्सिडी के रुप में डाल देती है। रेलवे के हालात बदलने और संसाधन जुटाने के रास्ते सुझाने के लिए इस कमेटी का गठन पिछले साल सितम्बर में किया गया था।

रेलवे बोर्ड अंतिम रिपोर्ट मिलने के बाद इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जून के आखिरी में सौंपेगा। रिपोर्ट में अनुशंसा की गई है कि रेलवे मंत्रालय को त्रिस्तरीय सचिव व्यवस्था पर आधारित होना चाहिए लेकिन इसमें रेलवे बोर्ड सम्मिलित नहीं होगा।

रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे में निजी कंपनियों के निवेश को बढावा देना होगा और यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इसके लिए प्रतिस्पर्धा का माहौल भी तैयार हो।

प्राधिकरण नहीं कर सकता मंत्रालय को बाध्य

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रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कमेटी भारतीय रेलवे निजीकरण की सिफारिश नहीं कर रही है लेकिन एक स्वतंत्र नियामक संस्था के साथ मिलकर हमें काम करना होगा।

कमेटी वैश्वविक उदारीकरण की पक्षधर है लेकिन निजीकरण अथवा विनियमन की नहीं। कमेटी ने जिस नियामक प्राधिकरण को बनाने की सिफारिश की है वो किरायों की समीक्षा तो कर सकता है लेकिन मंत्रालय को बाध्य नहीं कर सकता।

कमेटी ने यह भी अनुशंसा की है कि यदि रेलवे को किसी बाहरी मदद की जरुरत हो तो वो उसे मिल सके। कमेटी के पैनल में ‌बिबेक देवराय के साथ साथ सात अन्य लोग भी थे।

जिसमें कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर, एनएसई के पूर्व प्रबंध संचालक रवि नारायन, पूर्व वित्तीय कमिशनर, आर. कश्यप, केन्द्र में पॉलिसी रिसर्च के लिए वरिष्ठ फेलो पार्थ मुखोपाध्याय और पूर्व प्रबंधकर्ता गुरुचरण दास शामिल थे।

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