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जल्द पटरियों पर दौड़ेगी 'डुअल मोड' रेल इंजन

Sun, 17 Jan 2016 10:29 AM IST
Updated Sun, 17 Jan 2016 10:29 AM IST
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railway passed Dual mode rail engine design, soon it will be on track

रेल इंजन के निर्माण के क्षेत्र में जल्द ही एक बड़ी कामयाबी डीरेका के खाते में आने वाली है। इलेक्ट्रिक और डीजल दोनों से चलने वाले डुअल मोड रेल इंजन के निर्माण के डीरेका के प्रपोजल को रेलवे बोर्ड ने हरी झंडी दे दी है। बोर्ड के अप्रूवल के बाद अब प्रपोजल रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडडर्स आर्गनाइजेशन (आरडीएसओ) को भेजा जाएगा।

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आरडीएसओ से क्लीयरेंस के बाद डीरेका में डुअल मोड के उत्पादन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। साल के अंत तक पहला डुअल मोड इंजन ट्रैक पर उतारने की तैयारी है। इसके अलावा, फरवरी से 6000 हार्स पॉवर के इंजनों का निर्माण डीरेका में शुरू हो जाएगा। रेल मंत्री सुरेश प्रभु का डुअल मोड रेल इंजन का सपना साल के अंत तक साकार हो सकता है। रेलवे बोर्ड से अप्रूवल मिलने के बाद डीरेका ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
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साल के अंत तक पहला प्रोटोटाइप डुअल मोड इंजन ट्रैक पर उतर सकता है। बाकायदा इसके परीक्षण और परिणामों के आधार पर डुअल मोड इंजनों के निर्माण की शृंखला डीरेका में शुरू हो जाएगी। ये इंजन बिजली और डीजल दोनों से चलेंगे यानी जो विद्युतीकृत रेल खंड हैं वहां बिजली से और जो रेलखंड विद्युतीकृत नहीं हैं वहां यही इंजन डीजल से दौड़ेगा।

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शंटिंग में जल्द लगाए जाएंगे हाइड्रोजन इंजन

railway passed Dual mode rail engine design, soon it will be on track

इनके ट्रैक पर आने के बाद ट्रेनों के जगह-जगह इंजन बदलने की परेशानियों से रेलवे को निजात मिल जाएगी। इससे समय, श्रम और ईंधन की बचत होगी। साथ ही ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार होगा। इंजन बदलने में जाया होने वाला समय बचने से यात्रियों को सहूलियत होगी। अभी तक ट्रैक के हिसाब से ट्रेनों के इंजन बदलने पड़ते हैं। इसमें समय और ईंधन खर्च होने के  साथ ही अलग से कर्मचारियों की तैनाती की गई है।

रेलवे ने यह भी फैसला किया है कि हाइड्रोजन से चलने वाले रेल इंजन जल्द शंटिंग में लगाए जाएंगे। आरडीएसओ ने डीरेका की ओर से भेजे गए हाइड्रोजन इंजन के प्रारूप को कुछ सुझावों के साथ क्लियरेंस दे दी है। इनकी क्षमता बहुत ज्यादा नहीं है लेकिन कम ईंधन खपत के साथ शंटिंग जैसे कार्यों के लिए ये बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं।

इसके अलावा डीरेका ने दो ऐसे रेल इंजन बनाए हैं, जिनकी केबिन में ध्वनि की तीव्रता 90 डेसिबल से कम करने में सफलता पाई गई है। यह मानव स्वास्थ्य के लिहाज से निर्धारित मानक के अनुरूप है। 90 डेसिबल से भी कम आवाज वाली केबिन से लैस इन इंजनों का ट्रायल अलग-अलग रेल खंडों पर किया जा रहा है। अभी तक के परिणाम भी उत्साहित करने वाले हैं। प्रयोग सफल रहने पर दूसरे इंजनों की केबिन भी इसी तकनीक पर बनाई जाएगी। अभी ट्रेनों के इंजनों में शोर इतना रहता है कि चालक धीरे-धीरे बहरेपन की चपेट में आ जाते हैं।

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