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जानिए, पहले किस घोटाले में बंसल पर लगे थे आरोप

Tue, 07 May 2013 01:30 AM IST
चंडीगढ़/ब्यूरो
चंडीगढ़/ब्यूरो Updated Tue, 07 May 2013 01:30 AM IST
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railway minister pawan bansal' s charged first another scandal

रेलमंत्री पवन कुमार बंसल को लेकर संसद में सोमवार को पहली बार हंगामा नहीं हुआ है।

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इससे पहले 14 मार्च 2011 को चंडीगढ़ में हुए बहुचर्चित बूथ घोटाले (रेहड़ी-फड़ी वालों को बूथ) में भी बंसल का नाम आने पर भाजपा ने संसद में हंगामा करते हुए त्यागपत्र की मांग की थी। उस समय बंसल केंद्रीय संसदीय कार्य एवं विज्ञान व तकनीकी मंत्री थे।

विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने उस दिन लोकसभा में शून्य काल के दौरान बूथ आवंटन घोटाले का मुद्दा उठाते हुए बंसल का त्यागपत्र मांगा था।

भाजपा सांसदों के हंगामे को देखते हुए ही तीन बार संसद की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी थी।

पवन कुमार बंसल पर आरोप था कि बूथ माफिया को उन्होंने ही शरण दी थी। बूथों की अलॉटमेंट में करोड़ों की गड़बड़ी हुई थी।

चंडीगढ़ के तत्कालीन एडीसी पीएस शेरगिल की ओर से जांच के बाद तैयार की गई रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया था कि बंसल को बूथ माफिया का संरक्षण था।

शेरगिल की ओर से रिपोर्ट सौंपने के तुरंत बाद उन्हें वापस उनके गृह राज्य पंजाब भेज दिया गया था और उन्हें पंजाब सरकार में अतिरिक्त सचिव (कृषि) पद पर नियुक्त किया गया था।
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हालांकि शेरगिल का तीन साल का कार्यकाल पूरा हो गया था। बाद में शेरगिल की ओर से तैयार की गई प्राथमिक रिपोर्ट की तीन सदस्यीय कमेटी ने जांच की थी और कमेटी ने बंसल को क्लीन चिट दे दी थी।
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यह था मामला
बिजवाड़ा मार्केट में 23 मई 1989 को आग लगी थी। इसके बाद 1991 में संपदा विभाग की ओर से अधिसूचना जारी की गई थी कि रेहड़ी-फड़ी वालों को बूथ अलॉट कर दिए जाएं।

ये बूथ सिर्फ उन्हीं रेहड़ी-फड़ी वालों को अलॉट होने थे, जिनके लाइसेंस बने हुए थे। इस अधिसूचना के जारी होने के बाद ही फर्जी लाइसेंस बनाने का खेल शुरू हो गया।

संपदा विभाग में तैनात इंस्पेक्टरों की टीम रेहड़ी मार्केटों में सर्वे के लिए जाने लगी, लेकिन एस्टेट ऑफिस के कर्मी पहले ही मार्केट के प्रधान को जानकारी दे देते थे।


फर्जी लाइसेंस लेने के बाद लोग सर्वे टीम के आने से पहले बूथ लेने के लिए रेहड़ी मार्केट में दुकान खोलकर बैठ जाते थे। बूथ बनने के बाद शिफ्टिंग शुरू हुई। यहीं से फिर से घपला शुरू हुआ।

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