डायबिटीज होने के बावजूद कर सकेंगे रेलवे में नौकरी
डायबिटीज से पीड़ित युवाओं के लिए राहत भरी खबर। रेलवे की नई व्यवस्था के तहत अब डायबिटीज पीड़ित युवा भी रेलवे में नौकरी कर सकेंगे। अभी तक रेलवे में फ्रेश ज्वाइनिंग या मृतक आश्रित कोटे के तहत की जाने वाली नियुक्ति के दौरान लिए जाने वाले मेडिकल टेस्ट में डायबिटीज पीड़ित युवाओं को छांट दिया जाता था, लेकिन मोदी सरकार ने यह पाबंदी हटा दी है।
रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे को इस संबंध में पत्र भी जारी कर दिया है। बता दें कि रेलवे में डायबिटीज से पीड़ित युवाओं की भर्ती नहीं की जाती। चाहे मामला मृतक आश्रित कोटे के तहत की जाने वाली नियुक्ति का हो या फिर रेलवे भर्ती बोर्ड, रेलवे भर्ती सेल की ओर से निकाली गई नियुक्तियों का।
इन सभी भर्तियों में मेडिकल टेस्ट के दौरान बहुत से अभ्यर्थी इस लिए छांट दिए जाते हैं कि उन्हें डायबिटीज है। इसे लेकर कुछ युवा कोर्ट भी चले गए। कुछ मामलों में माना गया है कि डायबिटीज गंभीर बीमारी नहीं है।
कमेटी डायबिटीज पीड़ित अभ्यर्थियों की जांच करेगी
युवाओं को हो रही इस दिक्कत को देखते हुए रेलवे ने अब नई व्यवस्था के तहत डायबिटीज पीड़ित अभ्यर्थियों को राहत देने की तैयारी की है। इसके लिए रेलमंत्री ने जोनल रेलवे से एक मेडिकल कमेटी बनाने को कहा है।
तीन सदस्यीय मेडिकल कमेटी डायबिटीज पीड़ित अभ्यर्थियों की जांच करेगी। इसके लिए बोर्ड की ओर से एक मेडिकल फिटनेस चार्ट भी जारी किया गया है। इसमें फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोस, पीपीपी, हीमोग्लोबिन आदि के निर्धारित मानक तय किए गए हैं।
इस दौरान कमेटी यह भी देखेगी डायबिटीज की वजह से संबंधित अभ्यर्थी के किसी अंग में तो कोई खराबी नहीं आई है। कमेटी की ओके रिपोर्ट के बाद संबंधित अभ्यर्थी की ज्वाइनिंग का रास्ता भी साफ हो जाएगा। रेलवे बोर्ड के निदेशक अवस्थापना नीरज कुमार ने इस संबंध में सभी जोनल रेलवे को पत्र जारी कर कमेटी गठित करने का निर्देश दिया है।
रेलवे की ओर से डायबिटीज पीड़ित अभ्यर्थियों का मानक
फास्टिंग प्लाज्मा------126 या उससे अधिक
पीपीपी-----200 या उससे अधिक
हीमोग्लोबिन----6.5 या उससे अधिक