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रेल बजट: क्या फिर बढ़ेगा रेलवे का किराया?

Wed, 25 Feb 2015 01:59 PM IST
Updated Wed, 25 Feb 2015 01:59 PM IST
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railway fare rise in future, first railway budget of suresh prabhu?

रेल मंत्री सुरेश प्रभु एक नहीं कई मौकों पर रेलवे की माली हालत सुधारने की बात कर चुके हैं। यह बातें तो मुसाफिरों पर पड़ने वाले बोझ की ओर इशारा करती हैं, लेकिन रेल मंत्री अपने पहले रेल बजट में किराया बढ़ाकर मुसाफिरों पर बोझ डालने के पक्ष में नहीं हैं। अगर सब कुछ ठीक रहा तो इस बार के रेल बजट में यात्री किराया जस का तस रह सकता है।

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रेलवे के बोझ को कम करने के लिए रेल मंत्री एफडीआई और पीपीपी के जरिए न सिर्फ फंड का इंतजाम करने जा रहे हैं, बल्कि पिछली बार की तरह इस बार भी नए प्रोजेक्टों को तरजीह नहीं देने का भी विचार है। प्रस्तावित बजट में नई ट्रेनों और नई लाइनों घोषणा होने की उम्मीद नहीं है। बजट में मोदी की छाप जरूर रहेगी।
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महात्मा गांधी को लेकर प्रधानमंत्री के विचार किसी से छिपे नहीं हैं। जिस तरह पिछली बार के बजट में सभी धर्मों के तीर्थ स्थानों को आपस में जोड़ने के लिए ट्रेन शुरू करने की योजना थी। उसी तरह इस बार के बजट में महात्मा गांधी से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों को आपस में जोड़ने वाली ट्रेन की घोषणा हो सकती है।
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किसानों के लिए शुरू हो सकती है विशेष ट्रेन

railway fare rise in future, first railway budget of suresh prabhu?

ट्रेन का नाम गांधी धाम एक्सप्रेस रखने का विचार है। यह ट्रेन महात्मा गांधी से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों पोरबंदर, अहमदाबाद, दिल्ली, पुणे, चंपारन जैसी जगहों को आपस में जोड़ सकती है।

रेल बजट में किसानों को खास सुविधाएं देने के लिए एक ऐसी ट्रेन शुरू की जा सकती है जो किसानों की सब्जियों को आसानी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाए। यह ट्रेन एयर कंडीशनर भी हो सकती है, जिससे सब्जियां खराब नहीं हों।

नई लाइनों और ट्रेनों को लेकर प्रधानमंत्री का रुख पिछले वर्ष ही स्पष्ट हो चुका है। मंत्रियों और सांसदों की सिफारिश पर हर रेल बजट में कई ट्रेनों और लाइनों की घोषणाएं की जाती हैं। लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा।

रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने भी मुख्यमंत्रियों और सांसदों से मुलाकात में यह बात स्पष्ट कर दी है कि नए रूटों और ट्रेनों को तरजीह नहीं दी जाएगी। देश भर में की 140 ट्रेनें ऐसी हैं जो रेलवे पर बोझ बनी हुई हैं। इनसे रेलवे को लाभ नहीं हो रहा है, लेकिन इन्हें बंद भी नहीं किया जा सकता है।

इन्हीं ट्रेनों को किस तरह लाभ का जरिया बनाया जाए। रेलवे में इस पर भी विचार विमर्श जारी है। रेल यात्री किराए में बढ़ोतरी के लिए बीते माह ही रेल पैनल ने सिफारिश की है, लेकिन डीजल की लगातार घटती कीमतों के चलते रेल मंत्रालय ऐसा नहीं कर आम जनता में अपनी उदार छवि बनाने की फिराक में है।

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