तीन माह बाद फिर बढ़ेगा रेल किराया?
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रेल किराए में भारी वृद्धि को लेकर भले ही हायतौबा मच रही है, लेकिन यह सिलसिला थमने वाला नहीं है। डीजल व बिजली की दरों में वृद्धि को देखते हुए अक्तूबर तक फिर किराए में 5 फीसदी तक की वृद्धि हो सकती है। हर 6 माह में ईंधन के मूल्य में हुई वृद्धि को रेल किराए में शामिल करने का नीतिगत फैसला यूपीए सरकार में ही हो चुका था।
तत्कालीन रेल मंत्री पवन बंसल ने किराए में घाटे को पूरा करने के लिए फ्यूल एडजस्टमेंट कंपोनेंट (एफएसी) नीति बनाई थी। इसके तहत नए किराए में 4.2 प्रतिशत ईंधन मद में वृद्धि की गई है। यह वृद्धि अप्रैल 2014 के पहले के ईंधन की कीमत में आई तेजी के आधार पर हुई है।
महंगाई की मार झेलने के लिए हो जाएं तैयार
अप्रैल से अक्तूबर तक बिजली व डीजल की दरों में होने वाली वृद्धि की मार एक बार फिर रेल यात्रियों को झेलने के लिए तैयार रहना होगा। रेलवे सूत्रों के अनुसार बजट के बाद एफएसी कमेटी की बैठक बुलाई जा सकती है।
इराक संकट के चलते डीजल के दामों में तेजी आने के आसार हैं। यही नहीं भविष्य में कोयले के दाम बढ़ने से बिजली की दरों में भी वृद्धि होगी। इन सबका असर किराए व मालभाड़े पर भी पड़ेगा।