बजट: पीएम मोदी की उम्मीदों के ट्रैक पर दौड़ेगी प्रभु की रेल
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‘कठिनाइयों के बावजूद हम जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की पूरी कोशिश करेंगे।’ रेल बजट की पूर्व संध्या पर रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु के ये शब्द यह बताने के लिए काफी हैं कि उन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उम्मीदों को मूर्त रूप देने का भार है। वह रेल मंत्री बनने के बाद से ही रेलवे की खस्ता हालत का जिक्र करते आए हैं।
बावजूद इसके गुरुवार को पेश हो रहे उनके पहले रेल बजट में मुसाफिरों पर बढ़े किराये का भार शायद नहीं डाला जाएगा। लेकिन रेल मंत्री रेलवे को कमाऊ पूत बनाने की कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। इसके लिए परियोजनाओं में विनिवेश और पीपीपी मॉडल का खाका खींचा गया है। बजट पर मोदी के विजन की पूरी छाप रहेगी। स्वच्छता और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
यह लगभग तय है कि बजट में नई परियोजनाओं की ज्यादा घोषणाएं नहीं होंगी। रेल मंत्री का लक्ष्य है कि पहले से मंजूर पड़ी दो लाख 58 हजार दो सौ 77 करोड़ रुपये की योजनाओं को पूरा किया जाए। रेल मंत्री उन्हीं परियोजनाओं की घोषणा कर सकते हैं जिनसे फायदा हो सकता है। इनमें लाइनों का दोहरीकरण और तिहरीकरण शामिल है। बजट में विनिवेश के माध्यम से संयुक्त उपक्रमों की भरमार हो सकती है।
देश के सात हजार रेलवे स्टेशनों के नवीनीकरण का कार्य संयुक्त उपक्रम के जरिये हो सकता है। ट्रेनों और स्टेशनों पर स्वच्छता के लिए भी निजी हाथों का सहारा लिया जा सकता है। ज्यादा ट्रेनों की घोषणा नहीं होगी। लेकिन प्रधानमंत्री के चुनाव क्षेत्र वाराणसी और बिहार का खास ख्याल रखा जा सकता है।
मोदी की इच्छाओं का रखा जाएगा ध्यान
पिछले बजट में 220 रेलवे स्टेशनों पर हवाई अड्डे की तर्ज पर एकीकृत सुरक्षा प्रणाली को लागू करने को कहा गया था, लेकिन यह व्यवस्था 76 स्टेशनों पर ही लागू हो पाई है। इस बजट में इन रेलवे स्टेशनों के अलावा अन्य स्टेशनों पर भी इसी तरह की सुरक्षा की घोषणा हो सकती है।
मुंबई में अनारक्षित टिकट मोबाइल पर बुक करने की सुविधा दी गई है। इसे देश के अन्य चुनिंदा शहरों में भी लागू किया जा सकता है। एक राज्य के छात्रों को दूसरे राज्यों से जोड़ने के लिए रेल मंत्री छात्र स्पेशल ट्रेन की भी घोषणा कर सकते हैं।
यही नहीं प्रधानमंत्री की इच्छा पर ट्रेन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए इंजनों में ऐसा सुरक्षा प्रणाली यंत्र लगाए जाने की घोषणा हो सकती है, जिससे ड्राइवर को हवाई जहाज की तर्ज पर आने वाले खतरे के बारे में पहले ही पता लग जाए। ट्रेनों में महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला कांस्टेबलों की तैनाती के बारे में भी घोषणा हो सकती है।
उठेंगे संतुलन के सात कदम
1. मुसाफिरों पर किराये का बोझ नहीं होगा
2. ज्यादा ट्रेनों की घोषणा नहीं, लेकिन बिहार, बनारस को तवज्जो
3. नई परियोजनाओं से बचने की होगी कोशिश
4. लंबित परियोजनाओं को पूरा करने पर होगा जोर
5. स्टेशनों के नवीनीकरण के लिए निजी क्षेत्र से मिलकर होगा काम
6. स्वच्छता और सुरक्षा के लिए भी निजी क्षेत्र का लेंगे सहयोग
7. स्टेशनों पर एकीकृत सुरक्षा प्रणाली का बढ़ेगा दायरा
पीएमओ की छाप
अभी तक रेल बजट के लिए औपचारिकता वश प्रधानमंत्री कार्यालय की मंजूरी ही ली जाती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। प्रभु के पहले बजट पर पीएमओ की विशेष निगाह रही है। सूत्र यहां तक बताते हैं कि पीएमओ ने रेल मंत्री को साफ निर्देश दिए हैं कि रेलवे की परिचालन लागत में ढाई फीसदी तक की कमी लाई जाए।