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खजाने में जहरीले कोबरा की बात झूठी थी?

Wed, 13 Aug 2014 07:01 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 13 Aug 2014 07:01 PM IST
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Rai’s report punctured the myth of temple treasure.

केरल के श्रीपद्मनाभ स्वामी मंदिर में मौजूद खजाने और इसके बंद तहखानों को लेकर नया खुलासा हुआ है।

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'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर के खजाने को लेकर कही जा रही कई कहानियां झूठी हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि
पूर्व कैग प्रमुख विनोद राय ने मंदिर के तहखानों के बारे में प्रचलित कहनियों का खंडन किया है। 2011 में कैग की निगरानी में ही श्रीपद्मनाभ स्वामी मंदिर से करीब एक लाख करोड़ कीमत का खजाना निकाला गया था।

हालांकि उस समय मंदिर के पांच तहखानों के अलावा अन्य तहखानों को नहीं खोला गया। कहा गया कि यदि उन्हें खोला गया तो प्राकृतिक आपदा आ सकती है या कोई बड़ी घटना घट सकती है।
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बताया गया कि मंदिर के तहखानों में कोबरा जैसे जहरीले सांप मौजूद हैं, जो इस खजाने की रक्षा करते हैं और किसी को भी इनके अंदर जाने की इजाजत नहीं देते।

2002 में पांच बार खुला है तहखाना-

Rai’s report punctured the myth of temple treasure.

हालांक‌ि पूर्व कैग प्रमुख ने इन कहानियों का खारिज कर दिया।

तहखाना-बी को खोलने पर अशुभ संकेत या घटनाओं की कहानियों से पर्दा हटाते हुए राय ने कहा कि उनकी जानकारी में यह तहखाना-बी 1990 से अब तक सात बार खोला गया है।‌ 1990 में दो बार और 2002 में पांच बार खोला गया है।

उन्होंने बताया कि मंदिर में मौजूद रिकॉर्ड बुक से पता चला है कि तहखाना-बी से 2002 में चांदी की कुछ चीजें निकाली गईं थीं और सोने की कुछ घड़े जमा कराए गए थे।

अपनी रिपोर्ट में पूर्व सीएजी ने कहा है कि 2011 में मंदिर के पांच तहखाने ही खोले गए थे, जिसमें एक लाख करोड़ से ज्यादा की कीमत का खजाना मिला था।

मंदिर का यह अकूत खजाना मूर्तियों, गहनों, हथियारों, बर्तन और सिक्कों के रूप में निकला था। हालांकि मंदिर प्रशासकों की ओर से मामले की सुनवाई कर रहे वकील वेनूगोपाल खजाने के बारे में कोर्ट में अपना डर बयान किया था।

मंदिर का खजाने से क्यों लगता है डर?

Rai’s report punctured the myth of temple treasure.

अंतिम सुनवाई के दौरान त्रावणकोर के पूर्व शासकों का पक्ष रख्‍ाने वाले वकील केके वेनूगोपाल ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने तहखानों में मौजूद खजाना और इनके हालात के बार में काफी पढ़ा है।

उन्होंने कहा कि इमाइली गिलक्रिस्ट हैच की लिखी हुई एक किताब 'त्रावणकोरः ए गाइड बुक फॉर विजिटर' में लिखा है मंदिर का पूरा इलाका भयानक सांपों से घिरा है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि लेखक हैच उन लोंगों में से एक है जिन्होंने 1908 और 1931 में इस खजाने को लूटने का प्रयास थक चुके थे।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि इस खजाने से जजों की जिंदगी को भी खतरा हो सकता है और यही कारण है कि वह मंदिर के अन्य तहखानों को नहीं खोलने देना चाहते हैं। इस पर पूर्व सीएजी राय ने अपनी राय में कहा कि पूरे इलाके के छान-बीन की जरूरत है जिससे सच्चाई सामने आ सके।

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