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अगर कांग्रेस हारी तो ये होगा राहुल गांधी का अगला कदम

Fri, 02 May 2014 03:00 PM IST
Updated Fri, 02 May 2014 03:00 PM IST
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Rahul tells party he’d rather sit out than support Third Front

भले ही कांग्रेस के नेता लोकसभा चुनाव बाद पाटी की भविष्य की भूमिका को लेकर अलग-अलग बयान दे रहे हों, मगर राहुल गांधी अपने करीबी नेताओं को कुछ अलग ही संकेत दे रहे हैं।

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सूत्रों के मु़ताबिक, लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को कम सीटें मिलने की स्थिति में खिचड़ी सरकार बनाने की बजाय राहुल की प्राथमिकता विपक्ष में बैठने को लेकर मानी जा रही है।
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हालांकि करीबी नेताओं का यह भी कहना है कि सोनिया की हरी झंडी मिलने के बाद ही राहुल अपनी योजना पर आगे बढ़ सकते हैं। मगर अभी तक कांग्रेस अध्यक्ष के करीबी नेता मोदी को रोकने के लिए तीसरे मोर्च को समर्थन देने की पैरवी कर रहे हैं।

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खिचड़ी सरकार की बजाय विपक्ष में बैठना होगी प्राथमिकता

Rahul tells party he’d rather sit out than support Third Front

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने अमर उजाला को कहा कि राहुल तीसरे मोर्चे को बाहर या भीतर से समर्थन देने के तीसरे विकल्प को अपनाने की बजाय विपक्ष में रहने की स्थिति को तरजीह दे सकते हैं।

सूत्रों का कहना है कि मोदी को तीसरे मोर्चे के साथ मिलकर रोकने की रणनीति को राहुल अल्पकालिक उपाय मान रहे हैं। राहुल ने अपने करीबी नेताओं से कहा है कि अगर पार्टी का जनाधार घटता है तो वह इसे दुबारा पाने के लिए संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम करेंगे।

राहुल के करीबी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष के इन संकेतों से साफ है कि वह चुनाव बाद पार्टी में बडे़ फेरबदल के पक्ष में हैं।

राहुल की योजना के लिए सोनिया गांधी की मंजूरी जरूरी

Rahul tells party he’d rather sit out than support Third Front

इस फेरबदल में कांग्रेस के कई बुजुर्ग नेताओं को संगठन की बड़ी जिम्मेदारियों से हटाया जा सकता है। इन सीनियर नेताओं की जगह पार्टी के युवा चेहरों को लाया जा सकता है।

संगठन को मजबूत करने के चलते ही राहुल फिलहाल सरकार बनाने के जोड़-तोड़ में नहीं फंसने के संकेत दे रहे हैं। हालांकि राहुल के करीबी नेताओं का कहना है कि राहुल को अपनी इस योजना को अकेले ही मूर्त रूप देना मुश्किल होगा।

इसके लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की मंजूरी अहम रहेगी, मगर जैसा कि देखने को मिला है कि मोदी को रोकने के लिए सोनिया के करीबी नेता तीसरे मोर्चे के साथ सरकार बनाने की जोड़-तोड़ में जुटने को ही प्राथमिकता दे रहे हैं।

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