अंतरात्मा नहीं, राहुल ने नहीं बनने दिया सोनिया को PM
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एक समय गांधी परिवार के बेहद करीबी रहे और बाद में कांग्रेस से निकाले गए नटवर सिंह ने दावा किया है कि 2004 में सोनिया गांधी ने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर नहीं, बल्कि बेटे राहुल गांधी की वजह से प्रधानमंत्री का पद ठुकराया था।
नटवर सिंह के मुताबिक राहुल को डर था कि अगर उनकी मां सोनिया प्रधानमंत्री बनीं तो दादी इंदिरा गांधी और पिता राजीव गांधी की तरह उनकी भी हत्या कर दी जाएगी। इसलिए राहुल ने बेटा होने की दुहाई देते हुए सोनिया को पीएम नहीं बनने दिया।
पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने अगले महीने आने वाली अपनी किताब ‘वन लाइफ इज नॉट इनफ: एन ऑटोबायोग्राफी’ में गांधी परिवार से जुड़ी कई बातों का खुलासा किया है।
राहुल ने दिया था 24 घंटे का समय
83 वर्षीय सिंह ने अपनी इस पुस्तक के हवाले से एक टीवी चैनल को बताया कि राहुल नहीं चाहते थे कि सोनिया पीएम बनें। राहुल ने सोनिया को सोचने के लिए 24 घंटे का समय दिया था। हालांकि बेटे के तौर पर राहुल अपना निर्णय मां सोनिया को सुना चुके थे।
सिंह ने कहा कि ऐसा नहीं है कि सोनिया ने अंतरात्मा की आवाज पर पीएम पद ठुकराया हो, जैसा कि तब वह दावा करती थीं। सिंह ने यह भी दावा किया कि गत 7 मई को प्रियंका गांधी उनसे मिली थीं और अनुरोध किया था कि वह सोनिया के पीएम पद न स्वीकारने वाली बात को किताब से हटा दें।
नटवर ने दावा किया कि राहुल और सोनिया गांधी ने भी उनसे ऐसा करने की गुजारिश की थी। लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। सिंह ने बताया कि जब वह कांग्रेस पार्टी में थे। तो सानिया का कांग्रेस पर नियंत्रण इंदिरा गांधी से ज्यादा था।
'सोनिया अपने पति राजीव से बेहतर नेता'
सिंह ने यह भी दावा कि जब उन्होंने सोनिया से कांग्रेस में उनके साथ हुई ज्यादती का जिक्र किया तो सोनिया ने इसके लिए माफी मांगी।
सिंह का मानना है कि सोनिया अपने पति राजीव से बेहतर नेता हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने पुरानी कटुता की वजह से किताब नहीं लिखी है, बल्कि किताब तथ्यों पर आधारित है।
टीवी इंटरव्यू में सिंह ने मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री बनने की कहानी का भी खुलासा किया। सोनिया के इनकार के बाद मनमोहन सिंह को पीएम बनाया जाना तय हुआ था। हालांकि मनमोहन इसके लिए राजी नहीं थे। उनका मानना था कि पार्टी के पास सरकार बनाने लायक बहुमत नहीं है।
नटवर सिंह का दावा है कि मनमोहन के प्रधानमंत्री बनने से लालू यादव भी खुश नहीं थे। मालूम हो कि इराक में तेल के बदले खाद्यान्न योजना में घोटाले में नाम आने के बाद 2005 में सिंह को विदेश मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
सोनिया के पास जाती थीं फाइलें
नटवर सिंह ने संजय बारू के उस दावे की पुष्टि की जिसमें उन्होंने कहा था कि यूपीए सरकार के दौरान पीएमओ से फाइलें सोनिया गांधी के पास जाती थीं और वही उन पर अंतिम फैसला करती थीं। पुलक चटर्जी ये फाइलें लेकर सोनिया के पास जाते थे।
1991 में सोनिया गांधी तत्कालीन उप राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा को प्रधानमंत्री बनाना चाहती थीं, लेकिन खराब स्वास्थ्य के चलते उन्होंने यह पद स्वीकारने से इनकार कर दिया था, इसके बाद नरसिंह राव के नाम पर मुहर लगाई गई।