आखिर दिन राहुल का दांव, गांधी बनाम मोदी लेकिन...

साणंद/अमरेली/अहमदाबाद/इंदुशेखर पंचोली Updated Wed, 12 Dec 2012 01:25 AM IST
Rahul stake last day gandhi vs modi but
लोकसभा चुनाव-2014 में कांग्रेस के घोषित तारणहार राहुल गांधी चुनाव प्रचार के आखिरी दिन गुजरात के रण में पहुंच ही गए। यूपी चुनाव में अपने गुस्से के कारण चर्चित हुए राहुल ने चुनाव का शोर थमने से पहले तीन जनसभाओं को संबोधित किया, लेकिन उनके तेवर गायब थे।

नरेंद्र मोदी का नाम लिए बिना उन्होंने आरोपों की झड़ी भी लगाई, लेकिन वैसा दमखम नहीं दिखा जो सपा या बसपा के खिलाफ होता था। सियासी जंग का रुख मोदी बनाम गांधी में तब्दील होने की उम्मीद भी पूरी नहीं हुई। राहुल ने चुनाव की जमीनी हकीकत भांपते हुए वर्तमान की जगह इतिहास का दामन थामा। बवाल वाले सवाल छोड़ दिए। मोदी के गुजरात को महात्मा गांधी के गुजरात की कसौटी पर आंकने की कोशिश की और कांग्रेस को वोट देने की अपील तक किए बिना फैसला गुजरात की जनता पर छोड़ दिया।

राहुल का भाषण तीनों सभाओं में कमोबेश एक ही था। उन्होंने महात्मा गांधी का नेहरू परिवार से रिश्ता याद दिलाते हुए आजादी के संघर्ष में जवाहरलाल नेहरू के जेल जाने का किस्सा सुनाया। बताया, उस दौरान महात्मा गांधी इलाहाबाद पहुंचे, तो जमीन पर सोए। तर्क था, जवाहरलाल जेल में जमीन पर सो रहे हैं, तो वे कैसे गद्दे पर सो सकते हैं?

फिर बात आगे बढ़ाई, गांधी के बहाने लोकतंत्र, लोकतांत्रिक संस्थाओं और अभिव्यक्ति की आजादी के मुद्दे उठाए और सवाल किए कि मौजूदा मुख्यमंत्री कितनी आजादी देते हैं। गुजरात में आम आदमी की नहीं, सिर्फ एक आदमी की सुनी जाती है। जनता के सपने उसके सपने नहीं है, वह अपने सपने पूरे करने में लगा है।

राहुल ने इसी बहाने सूचना के अधिकार में गुजरात में अटकीं 14 हजार से ज्यादा अर्जियों और लोकायुक्त की तैनाती न कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के आरोप भी मोदी पर जड़ दिए। साथ ही साल भर में विधानसभा की महज 20-25 बैठकें होने और विपक्ष को बाहर फिंकवा देने का हवाला देते हुए मोदी की तानाशाही पर तंज कसे।

... तो महात्मा गांधी की इच्छा क्यों नहीं पूरी करते राहुल?
राहुल के सभाओं और आरोपों के बाद नरेंद्र मोदी कहां चूकने वाले थे? उन्होंने अपनी सभाओं में न सिर्फ राहुल की लोकसभा में 85 में से महज 24 दिन की हाजिरी का आंकड़ा पेश कर दिया, बल्कि राहुल को चुनौती दे डाली कि वे महात्मा गांधी की इच्छा के अनुरूप कांग्रेस को भंग क्यों नहीं कर देते?

हम तो देखने आए हैं
राहुल की सभा के बाद साणंद में कई ग्रामीणों से हुई बातचीत में खुलासा हुआ कि वे राहुल गांधी को महज देखने के लिए आए हैं। गांव से जुटाए गए श्रोताओं को हिंदी में दिया गया राहुल का भाषण समझ ही नहीं आया। हालांकि उनका कहना था, वे वोट कांग्रेस को ही देंगे।

सोच-समझकर चुनी जगह
कांग्रेस ने राहुल के लिए तीनों सभाओं की जगह बेहद सोच समझकर चुनी थी। अमरेली में केशुभाई पटेल के कारण भाजपा को तगड़ी चुनौती मिल रही है। वहीं, मोदी को ब्रांड बनाने वाले साणंद में गलत टिकट वितरण से कार्यकर्ताओं में बेहद असंतोष है, जिसके चलते भाजपाई उम्मीदवार मुश्किल में हैं। कांग्रेस इस सीट को अपनी झोली में मान रही है।

चुनाव का शोर थमा, पहले दौर की वोटिंग कल
गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 87 सीटों पर चुनाव प्रचार का शोर मंगलवार शाम 5 बजे थम गया। इन सीटों पर 13 दिसंबर को वोट डाले जाएंगे। आखिरी दिन कांग्रेस और भाजपा ने पूरी ताकत झोंकते हुए प्रदेश में 50 के करीब चुनावी सभाएं कीं। इस दौर में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अर्जुन मोढवड़िया, सांसद सोमाभाई पटेल नेता प्रतिपक्ष शक्ति सिंह गोहिल, राज्य के वित्त मंत्री वजुभाई वाला सहित कई मंत्रियों और गुजरात परिवर्तन पार्टी के प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री केशूभाई पटेल की किस्मत का फैसला होना है।

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