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राहुल गांधी की 'जासूसी' पर क्या बोले जेटली?

Mon, 16 Mar 2015 01:45 PM IST
Updated Mon, 16 Mar 2015 01:45 PM IST
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Rahul snooping row: Government defence in parliament.

राहुल गांधी के जासूसी का मुद्दा लगातार गरमाता जा रहा है। इस मुद्दे पर सोमवार को संसद में जमकर बवाल देखने को मिला। राज्यसभा और लोकसभा दोनों ही सदनों में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और कांग्रेस के बीच जमकर हंगामा देखने को मिला। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश की।

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सबसे पहले लोकसभा में ये मुद्दा कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने उठाया। लेकिन सभापति सुमित्रा महाजन ने उन्हें इस मुद्दे को प्रश्नकाल स्थगित होने के बाद उठाने की बात कही। लेकिन राज्यसभा में इस मुद्दे पर जमकर सवाल-जवाब हुए।
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उच्च सदन में इस मुद्दे को गुलाब नबी आजाद ने उठाया। उन्होंने इस घटना को निजता पर हमला करार दिया। इस मुद्दे पर कांग्रेस को जेडीयू और समाजवादी पार्टी की ओर से समर्थन मिला। जेडीयू सांसद केसी त्यागी और सपा के नरेश अग्रवाल ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने इस मुद्दे को जासूसी से जोड़ने की कोशिश की।
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जेटली ने दिए जवाब

Rahul snooping row: Government defence in parliament.

विपक्ष के हमलावर तेवरों का जवाब देने के लिए सरकार की ओर से अरूण जेटली सामने आए। जेटली ने विपक्षी नेताओं को दो टूक शब्दों में कहा कि विपक्ष इसे सियासी मुद्दा बनाना चाहता है। ऐसे में उन्होंने इसका सियासी जवाब देते हुए यूपीए सरकार के दौरान तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि ऐसा कभी नहीं हुआ कि किसी वित्त मंत्री को अपने कार्यालय की महज इसलिए जांच करानी पड़ी हो कि कहीं उनकी जासूसी तो नहीं हो रही।

जेटली ने बताया कि ये पूरी प्रक्रिया 1957 से चली आ रही है। 1987 से दिल्ली पुलिस विशिष्ट लोगों की प्रोफाइल चेक कर रही है। ऐसा सुरक्षा की दृष्टि से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब ये प्रक्रिया शुरू हुई उस समय देश में कांग्रेस की सरकार थी। हालांकि जेटली ने ये जरूर बताया कि 1999 में इस जांच का प्रो-फॉर्मा बदला गया। जिस पर दिल्ली पुलिस अब जांच कर रही है।

जेटली ने मामले का जवाब देते हुए कहा कि इस प्रक्रिया से सोनिया गांधी भी गुजरी हैं। एक बार नहीं बल्कि कई बार उनकी प्रोफाइलिंग करवाई गई थी। जेटली ने बताया कि इस स्थिति से वो खुद भी अवगत हो चुके हैं। वहीं इस स्थिति का शिकार सुषमा स्वराज, अहमद पटेल के साथ-साथ पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, आईके गुजराल और एच डी देवगौड़ा भी हो चुके हैं।

विपक्ष को सरकार का जवाब

Rahul snooping row: Government defence in parliament.

अरूण जेटली यहीं नहीं रूके उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी का स्वास्थ्य फिलहाल ठीक नहीं है। इसके बाद भी उनके ऑफिस से ये प्रो-फॉर्मा साल 2011 में भरवाया गया।

विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए राहुल के जूते का नंबर पूछने को लेकर सवाल उठाए थे। इसका जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि सदन को ये नहीं भूलना चाहिए की पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के शव की पहचान जूते के नंबर से ही हुई थी।

हालांकि इस जवाब के बाद भी विपक्ष का हंगामा शांत नहीं हुआ। जिसके बाद जेटली ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि जरूरी हो तो दिल्ली पुलिस से जरूरी रिकॉर्ड मंगाया जाए और यूपीए सरकार के दौरान हुई जांच को देखा जाए।

सरकार के जवाब के बाद भी विपक्ष की नाराजगी बनी रही और उन्होंने सदन से वॉकआउट कर दिया। वहीं दूसरी ओर लोकसभा में प्रश्नकाल स्थगित होने के बाद 12 बजे इस मुद्दे पर चर्चा हुई। जिसमें मल्लिकार्जुन खड़गे ने मामले को गंभीर बताते हुए सरकार से सवाल खड़े किए।

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