भाजपा-कांग्रेस में जुबानी जंग, दंगों का जिम्मेदार कौन?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भाजपा के प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के हमलों पर पार्टी ने पलटवार किया है।
बीजेपी ने राहुल को याद दिलाया है कि सिख दंगों को लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कहा था कि जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है।
भाजपा ने कहा कि दस साल में पहला साक्षात्कार देने वाले राहुल गांधी देशवासियों के लिए कोई उम्मीद नहीं जगा पाए और हर जिम्मेदारी से भागते दिखे।
टिप्पणियों से तिलमिलाई भाजपा
राहुल की मोदी के खिलाफ टिप्पणियों से तिलमिलाई भाजपा ने कहा कि 2002 में दंगों को रोकने के लिए गुजरात पुलिस की फायरिंग में कई दंगाई मारे गए थे, जबकि 1984 के सिख दंगों को रोकने के लिए पुलिस ने एक भी गोली नहीं चलाई।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि गुजरात दंगों को लेकर राहुल को जानकारी नहीं है। सच्चाई राहुल के दावों के ठीक विपरीत है।
गुजरात में हजारों लोग गिरफ्तार किए गए और पुलिस की गोली से लगभग 300 दंगाई मारे गए। मामले भी दर्ज हुए व सैकड़ों को सजा हुई।
'खून का बदला खून के लगे थे नारे'
दूसरी ओर 1984 के दंगों में 31 अक्तूबर की दोपहर को जब एम्स में इंदिरा गांधी का पार्थिव शरीर रखा हुआ था, वहां खून का बदला खून के नारे लगे थे।
जेटली का आरोप है कि तब कांग्रेस के नेता दंगाई भीड़ का नेतृत्व करते देखे गए थे। भाजपा नेता ने कहा कि अब तो दंगों को लेकर अदालत भी मोदी को क्लीन चिट दे चुकी है।
इसी मामले में भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि महंगाई, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर हमेशा खामोश रहने वाले राहुल ने एक दशक में साक्षात्कार देने के लिए जब पहली बार मुंह खोला तो उसमें भी वह यूपीए सरकार, कांग्रेस व खुद की जिम्मेदारी से भागते दिखे।
नीतीश भी कूदे जुबानी जंग में
वहीं बिहार में आगामी लोकसभा चुनाव के लिए संभावित कांग्रेस-राजद गठबंधन से तिलमिलाए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राहुल गांधी पर जमकर हमला बोला।
उन्होंने 1984 के सिख विरोधी दंगे और 1989 के भागलपुर दंगे के लिए तत्कालीन कांग्रेस नीत केंद्र और राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया। नीतीश ने राहुल के अध्यादेश फाड़ने की घटना को दिखावा करार दिया।
नीतीश ने पत्रकारों से बातचीत में 2002 के गुजरात दंगे के लिए भाजपा को आडे़ हाथों लेते हुए कांग्रेस को भी कठघरे में खड़ा किया।
नीतीश ने कहा कि देश में हुए सभी दंगों से सभी भारतीयों का सिर शर्म से झुक जाता है। जिम्मेदार लोगों को खुद इन दंगों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
निशाने पर लालू, राहुल पर भी बरसे
नीतीश ने कहा, ‘ऐसी घटनाओं के लिए कोई भी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।’
इसी तरह उन्होंने 1990 में सत्ता में आने पर तत्कालीन राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की सरकार पर भी निशाना साधा, जिसने तमाम तथ्य होने के बावजूद भागलपुर दंगे की जांच बंद करा दी थी।
नीतीश ने राहुल के अध्यादेश फाड़ने की घटना को दिखावा करार दिया है। नीतीश ने कहा कि जब राहुल ने अपनी ही सरकार के अध्यादेश को फाड़ा था तो बहुतों ने उनकी आलोचना की थी, मगर मैने उस समय उनका समर्थन किया था।
'राहुल की कथनी और करनी में बड़ा अंतर'
कांग्रेस के समर्थन से सरकार चला रहे नीतीश ने कहा, ‘मगर, बाद में मुझे अहसास हुआ कि यह महज दिखावा था।’
कांग्रेस के राजद के साथ संभावित गठबंधन पर बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा कि यही सबसे बड़ा अंतर है राहुल की कथनी और करनी में।
नीतीश ने इसी दौरान 30 जनवरी को किशनगंज में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के शिलान्यास समारोह में उन्हें आमंत्रित नहीं किए जाने पर केंद्र सरकार को जमकर कोसा। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार इससे गलत परंपरा कायम की है।