अब नहीं दोहराया जाएगा राहुल का 'फॉर्मूला'
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लोकसभा चुनाव की करारी हार के बाद अब कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के चुनावी प्रयोगों को पार्टी विधानसभा चुनाव में आजमाने का जोखिम नहीं उठाना चाहती।
लिहाजा, आगामी विधानसभा चुनावों में किसी भी सीट पर पार्टी में आंतरिक चुनाव के जरिए उम्मीदवार के चयन की प्रणाली यानी प्राइमरी को अपनाने नहीं जा रही है।
खुद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने इस प्रयोग को नहीं अपनाने की बात कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को कही है। हालांकि लोकसभा चुनाव के समय सभी सीटों पर पार्टी की ओर से पर्यवेक्षक भेज के सर्वेक्षण कर उम्मीदवार चयन करने के फॉर्मूले को विधानसभा चुनावों में अपनाया गया है।
लोकसभा चुनाव में अपनाया गया था प्राइमरी फार्मूला
सर्वेक्षण के काम की अगुवाई कर रहे कांग्रेस महासचिव मधुसूदन मिस्त्री ने चुनावी राज्यों के प्रभारियों को रिपोर्ट भी सौंप दी है। लोकसभा चुनाव में लगभग 16 सीटों पर राहुल गांधी ने प्राइमरी चुनाव के जरिए उम्मीदवार का ऐलान किया था।
इस प्रणाली के तहत पार्टी के अंदर बाकायदा पार्टी के नेताओं के बीच आपस में चुनाव हुआ। जो विजयी हुआ, उसे ही टिकट देने का ऐलान किया गया। तब राहुल को इस प्रयोग के लिए पार्टी के अंदर ही विरोध सहना पड़ा था।
उत्तर प्रदेश में बेनी प्रसाद वर्मा ने खुलेआम इस प्रणाली को पैसे के बल पर टिकट खरीदने का आसान तरीका बताया। अंदरखाने भी हाईकमान को इसे लेकर कई शिकायतें आई थी। कई जगह धरने प्रदर्शन भी हुए।
आगामी चुनाव में ये फॉर्मूला नहीं
सूत्रों का कहना है कि इन शिकायतों को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड और जम्मू कश्मीर के विधानसभा चुनाव में प्राइमरी प्रणाली को लागू नहीं किया जाएगा।
लोकसभा चुनाव के समय मधुसूदन मिस्त्री की अध्यक्षता में सभी सीटों पर सर्वेक्षण किया गया था। इस सर्वेक्षण के आधार पर चयन उम्मीदवार के अलावा सभी प्रदेश कांग्रेस इकाइयों की सिफारिश पर टिकट बांटी गई थी।
इस प्रक्रिया का भी कई नेताओं ने विरोध किया था। मगर इस प्रयोग को दोबारा आजमाया गया है। मिस्त्री ने हरियाणा, झारखंड, जम्मू कश्मीर और महराष्ट्र के सर्वेक्षण के नतीजे इन प्रदेश के प्रभारी महासचिवों को सौंप दिए है।