सोनिया के खासमखास को राहुल ने दिया झटका
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गुजरात कांग्रेस में दो दशक से चला आ रहा अहमद पटेल युग आखिरकार खत्म हो गया। पटेल के धुर विरोधी माने जाने वाले भरत सिंह सोलंकी की प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति होना इसका प्रमाण है। कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, सोलंकी के फिर प्रदेश अध्यक्ष बनने के पीछे सबसे बड़ा कारण उनका अहमद पटेल का धुर विरोधी होना है।
पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार के तौर पर कांग्रेस में छाए रहे पटेल स्वाभाविक रूप से उन सभी निर्णयों में भी पूरी तरह हावी रहे, जो देशव्यापी थे, लेकिन गुजरात में उनकी तूती कुछ इस तरह बोलती रही कि पिछले दो दशक में प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति से लेकर स्थानीय निकायों के चुनाव में बांटे गए टिकटों में पटेल का निर्णय अंतिम रहा।
इस दौरान लड़े गए पांच विधानसभा चुनाव, पांच लोकसभा चुनाव और कई स्थानीय निकायों के चुनाव में पटेल के ही लोगों को टिकट मिलता रहा। संगठन में भी पटेल के ही वफादारों को पद प्राप्ति होती रही लेकिन फिर भी वह गुजरात में कांग्रेस की सत्ता में वापसी करवाने में असफल रहे।
भरत सिंह सोलंकी फिर बने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
उल्टा ये हुआ कि गुजरात में पटेल के समय में कांग्रेस का पूरी तरह सफाया हो गया। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस गुजरात की 26 में से एक भी सीट नहीं जीत सकी। गुजरात कांग्रेस के विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि वैसे भी राहुल गांधी अहमद पटेल को पसंद नहीं करते हैं।
2014 के लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद वह इस बात पर निर्णय कर चुके थे कि कांग्रेस को अगर पुनर्जीवित करना है तो अहमद पटेल और उनके जैसे कुछ और कांग्रेसी नेताओं को पार्टी की नीति और रीति तय करने के मामले से अलग करना होगा।
इसका नतीजा है कि 2006-07 में गुजरात कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके भरत सिंह सोलंकी को एक बार फिर से गुजरात कांग्रेस की कमान थमा दी गई है।
अब कोई ‘मैच फिक्सिंग’ न हो : वाघेला
शंकर सिंह वाघेला ने भी गुजरात में
अहमद पटेल के चलते रही स्थिति पर व्यंग्य किया। उन्होंने कहा, ‘सोलंकी जो
भी काम करने को कहें, वो सब को करना होगा, फिर वो चाहे फील्डिंग हो, बालिंग
हो या बैटिंग। बस इतना याद रहे कि अब कोई मैच फिक्सिंग न हो।’
पटेल की गैर मौजूदगी की रही चर्चा
जब भी गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष का पदभार किसी ने संभाला है, अहमद पटेल उस कार्यक्रम में मौजूद रहे हैं। शायद पहली बार ऐसा हुआ कि नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष पदभार संभाल रहे थे लेकिन पटेल गायब थे। इस दौरान उनका संदेश जरूर पहुंचा, जिसे मंच से पढ़ कर सुनाया गया। उनकी गैर मौजूदगी पार्टी कार्यकर्ताओं में चर्चा का विषय बनी रही।
कांग्रेस में सिर्फ एक ही ग्रुप : सोलंकी
अपने संबोधन में नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी ने कहा, एक बात तय है कि कांग्रेस में कोई गुटबाजी नहीं है। अगर कोई गुट है तो वो है सिर्फ सोनिया गांधी का गुट।