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राहुल ने सरपंचों को दिया सुरक्षा का भरोसा
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Fri, 28 Sep 2012 12:50 AM IST
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जम्मू-कश्मीर के पंच-सरपंचों को मिल रही आतंकी धमकियों और इस्तीफों के सिलसिले की वजह से कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी काफी चिंतित हैं। उन्होंने सरपंचों को भरोसा दिया है कि उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य की ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार की भी है। इसलिए उनकी हिफाजत का पूरा ख्याल रखा जाएगा।
जम्मू-कश्मीर के सरपंचों के एक प्रतिनिधिमंडल से बृहस्पतिवार को हुई मुलाकात में राहुल गांधी ने यह भरोसा दिया। साथ ही राहुल ने जल्द ही सूबे का दौरा कर सरपंचों के हालातों की जमीनी हकीकत से रूबरू होने का वादा किया। वहीं, सरपंचों ने राहुल गांधी से शिकायत की है कि प्रदेश की उमर सरकार उनसे सहयोग नहीं कर रही है। सरपंचों ने इसके लिए राहुल से उमर सरकार पर दबाव डालकर न्याय दिलाने की गुहार की। राहुल ने सरपंचों को इस्तीफा नहीं देने के लिए कहा है। सरपंच प्रतिनिधियों के मुताबिक राहुल ने मारे गए सरपंचों को 20 लाख रुपये तक मुआवजा देने की भी बात कही है।
जम्मू-कश्मीर में पंच-सरपंचों पर हो रहे हमलों की आवाज बृहस्पतिवार को राहुल के दरबार तक जा पहुंची। जम्मू-कश्मीर पंचायत कांफ्रेंस के 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राहुल से मुलाकात कर प्रदेश में सरपंचों के लिए पैदा मुश्किल हालातों को बयां किया। राहुल से मुलाकात के बाद पंचायत कांफ्रेंस के संयोजक शफीक मीर ने बताया कि उन्होंने राहुल को बताया कि राज्य सरकार उनके साथ सहयोग नहीं कर रही है। उनके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार हो रहा है। सूबे की पंचायतों को दूसरे राज्यों की तरह अधिकार नहीं है।
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प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य ने तो यहां तक कह दिया कि अगर उमर सरकार 73वां संविधान संशोधन लागू नहीं करती तो कांग्रेस जम्मू-कश्मीर की गठबंधन सरकार से बाहर आ जाए। राहुल ने इस मसले पर राज्य सरकार से बात करने का भरोसा दिया है। शफीक मीर ने कहा कि उन्होंने शहीद सरपंचों के परिजनों को 20 लाख का मुआवजा देने की मांग की है। राहुल ने इस मांग को पूरा करने का आश्वासन दिया है। साथ ही राहुल ने सरपंचों को केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों से मिलने के लिए कहा है।
वहीं, सरपंचों की सुरक्षा को लेकर राहुल गांधी ने अपने सहयोगियों से बैठक करने के लिए कहा है। सरपंच प्रतिनधि के मुताबिक राहुल का कहना है कि वह सरपंचों की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार से बात करेंगे। वह जल्द जम्मू-कश्मीर का दौरा करेंगे। संभावना है कि वह जम्मू और कश्मीर दोनों जगह एक-एक महापंचायत कर सकते हैं। साथ ही राहुल ने पंचों को कहा है कि वह इस्तीफ न दें। अगर वह ऐसा करेंगे तो लोकतंत्र के लिए नकारात्मक संदेश जाएगा।
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जम्मू-कश्मीर के सरपंचों के एक प्रतिनिधिमंडल से बृहस्पतिवार को हुई मुलाकात में राहुल गांधी ने यह भरोसा दिया। साथ ही राहुल ने जल्द ही सूबे का दौरा कर सरपंचों के हालातों की जमीनी हकीकत से रूबरू होने का वादा किया। वहीं, सरपंचों ने राहुल गांधी से शिकायत की है कि प्रदेश की उमर सरकार उनसे सहयोग नहीं कर रही है। सरपंचों ने इसके लिए राहुल से उमर सरकार पर दबाव डालकर न्याय दिलाने की गुहार की। राहुल ने सरपंचों को इस्तीफा नहीं देने के लिए कहा है। सरपंच प्रतिनिधियों के मुताबिक राहुल ने मारे गए सरपंचों को 20 लाख रुपये तक मुआवजा देने की भी बात कही है।
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जम्मू-कश्मीर में पंच-सरपंचों पर हो रहे हमलों की आवाज बृहस्पतिवार को राहुल के दरबार तक जा पहुंची। जम्मू-कश्मीर पंचायत कांफ्रेंस के 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राहुल से मुलाकात कर प्रदेश में सरपंचों के लिए पैदा मुश्किल हालातों को बयां किया। राहुल से मुलाकात के बाद पंचायत कांफ्रेंस के संयोजक शफीक मीर ने बताया कि उन्होंने राहुल को बताया कि राज्य सरकार उनके साथ सहयोग नहीं कर रही है। उनके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार हो रहा है। सूबे की पंचायतों को दूसरे राज्यों की तरह अधिकार नहीं है।
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प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य ने तो यहां तक कह दिया कि अगर उमर सरकार 73वां संविधान संशोधन लागू नहीं करती तो कांग्रेस जम्मू-कश्मीर की गठबंधन सरकार से बाहर आ जाए। राहुल ने इस मसले पर राज्य सरकार से बात करने का भरोसा दिया है। शफीक मीर ने कहा कि उन्होंने शहीद सरपंचों के परिजनों को 20 लाख का मुआवजा देने की मांग की है। राहुल ने इस मांग को पूरा करने का आश्वासन दिया है। साथ ही राहुल ने सरपंचों को केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों से मिलने के लिए कहा है।
वहीं, सरपंचों की सुरक्षा को लेकर राहुल गांधी ने अपने सहयोगियों से बैठक करने के लिए कहा है। सरपंच प्रतिनधि के मुताबिक राहुल का कहना है कि वह सरपंचों की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार से बात करेंगे। वह जल्द जम्मू-कश्मीर का दौरा करेंगे। संभावना है कि वह जम्मू और कश्मीर दोनों जगह एक-एक महापंचायत कर सकते हैं। साथ ही राहुल ने पंचों को कहा है कि वह इस्तीफ न दें। अगर वह ऐसा करेंगे तो लोकतंत्र के लिए नकारात्मक संदेश जाएगा।