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राहुल गांधी को सता रहा है शरद पवार का डर!

Sun, 28 Jul 2013 10:47 AM IST
धीरज कनोजिया/नई दिल्ली
धीरज कनोजिया/नई दिल्ली Updated Sun, 28 Jul 2013 10:47 AM IST
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rahul gandhi worried to sharad pawar on food security law

खाद्य सुरक्षा कानून अभी जमीन पर लागू नहीं हुआ है मगर कांग्रेस नेताओं में इसका श्रेय लूटने की होड़ मच गई है। गरीबों को योजना का फायदा पहुंचाने के लिए इसे जमीन पर ठीक ढंग से लागू करने की फिक्र करने की बजाय कांग्रेसी इसके नाम को लेकर सोच में पड़ गए हैं।

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राहुल गांधी के साथ शनिवार को हुई बैठक में ज्यादातर प्रदेश अध्यक्षों ने योजना को इंदिरा या फिर राजीव गांधी के नाम पर रखने की मांग कर डाली।

प्रदेश अध्यक्षों का तर्क था कि जब तक कि योजना का नाम गांधी परिवार के किसी सदस्य के नाम पर नहीं रखा जाएगा तब तक इसका फायदा कांग्रेस को नहीं मिलेगा और भाजपा समेत विपक्ष शासित राज्य सरकारें इसका फायदा उठा लेंगी।
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प्रदेश अध्यक्षों ने तर्क दिया कि राष्ट्रीय रोजगार गारंटी का नाम बदलकर महात्मा गांधी के नाम पर रखने के बाद ही कांग्रेस को इसका चुनावी फायदा मिला था। वहीं सरकार की ओर से ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि अध्यादेश को संसद से मंजूरी मिलने के बाद इस दिशा में विचार किया जाएगा। पहले ऐसा करने से भाजपा भड़क सकती है।
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शनिवार को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सभी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों और विधायक दल के नेताओं के साथ बैठक कर कानून पर बात की। बैठक में ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश और खाद्य मंत्री के वी थॉमस ने भी अपनी बात रखी।
ओडिशा, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गुजरात के कांग्रेस अध्यक्षों ने इसका नाम बदलकर राजीव या फिर इंदिरा गांधी के नाम पर करने की मांग की।

सहयोगी दलों को श्रेय नहीं लेने देना चाहते हैं राहुल
पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की महत्वाकांक्षी और लोकसभा चुनाव में गेमचेंजर माने जा रहे खाद्य सुरक्षा कानून का श्रेय कांग्रेस अपने सहयोगी दलों खासकर एनसीपी प्रमुख और केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार को नहीं लेने देना चाहती है।

बैठक में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष माणिक राव ठाकरे से कहा कि इसका श्रेय शरद पवार न उठाने पाएं, यह बात वह सुनिश्चित करें।


उन्होंने कहा कि इससे जनता को फायदा होगा। यह हमारी बड़ी उपलब्धि है। पार्टी कार्यकर्ता जनता को बताए कि उसने आम आदमी को सबसे पहले सूचना का अधिकार, फिर वन क्षेत्र में जमीन का अधिकार, शिक्षा का अधिकार और फिर मनरेगा के रूप में काम का अधिकार दिया।

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