कांग्रेस के अंदर भूचाल लाने की तैयारी में राहुल
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बिजली के उत्पाद बनाने वाली एक मशहूर कंपनी के बल्ब का विज्ञापन था सारे घर के बदल डालूंगा। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी इन दिनों पार्टी के शीर्ष स्तर पर कुछ ऐसा ही करना चाहते हैं। वह पार्टी के सारे पदाधिकारी बदलना चाहते हैं।
वह चाहते हैं कि कांग्रेस के सभी महासचिव, सचिव, कार्यसमिति सदस्य और मोर्चा संगठनों के प्रमुख इस्तीफा दे दें। इसके बाद राहुल अपने तरीके से नई टीम गठित करें। लेकिन ऐसा कर न पाने की वजह से वह अपनी ही कांग्रेस पार्टी जिसकी अध्यक्ष खुद उनकी मां सोनिया गांधी हैं, में एंग्रीमैन की भूमिका में आ गए हैं।
राहुल के इन तेवरों ने कांग्रेस को ऊपर से नीचे तक राहुल के समर्थकों और विरोधियों में बांट दिया है। पार्टी और दस जनपथ के इनसाइडरों की मानें तो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी राहुल को पार्टी की कमान तो सौंपना चाहती हैं, लेकिन वह चाहती हैं कि राहुल की टीम में भी उनके वह सारे वफादार उसी तरह महफूज और ताकतवर रहें जैसे कि सोनिया के पिछले 15 सालों के कार्यकाल में रहे हैं।
तो गायब हो जाएंगे सोनिया के सिपाही?
कांग्रेस में सोनिया गांधी के वफादारों में अहमद पटेल, मोतीलाल वोरा, ए.के.एंटनी, जनार्दन द्विवेदी, दिग्विजय सिंह, गुलाम नबी आजाद, अंबिका सोनी, पी. चिदंबरम, आनंद शर्मा, अशोक गहलौत, कमलनाथ, सुरेश पचौरी, मुकुल वासनिक, के.वी.थामस, सत्यव्रत चतुर्वेदी, अश्वनी कुमार, मोहसिना किदवई, गिरिजा व्यास, सलमान खुर्शीद, अजीत जोगी जैसे नेता शामिल हैं।
इनमें कुछ से राहुल खफा हैं इसलिए बदलना चाहते हैं और कुछ को इसलिए हटाना चाहते हैं कि उन्हें लगता है कि इन नेताओं से पार्टी संगठन को जितना मिल सकता था, मिल चुका है। इन्हें अब नेपथ्य में करके युवा और उन नेताओं को आगे लाना चाहिए जो ज्यादा मेहनत और ऊर्जा से काम कर सकते हैं।
वफादारों को देना चाहते हैं जिम्मेदारी
जबकि राहुल के वफादारों में मधुसूदन मिस्त्री, वीरप्पा मोईली, जयराम रमेश, सचिन पायलट, ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद, आरपीएन सिंह, मोहन प्रकाश, मोहन गोपाल, वी वी राजू, शकील अहमद, पीसी चाको, सी.पी.जोशी, अजय माकन, जीतेंद्र सिंह, दीपेंद्र हुड्डा, अशोक तंवर, रणदीप सुरजेवाला, मिलिंद देवड़ा, प्रिया दत्त, टाम वडक्कन, प्रकाश जोशी, जैसे नेताओं को माना जाता है।
राहुल अपने वफादारों को वह तमाम जिम्मेदारियां देना चाहते हैं जो इस वक्त सोनिया के वफादार पुराने नेताओं के पास हैं। सोनिया चाहती हैं कि राहुल यह काम धीरे धीरे करें और उनकी टीम मिली जुली हो।
लेकिन राहुल अपनी दादी इंदिरा गांधी की तर्ज पर इंडीकेट की तरह पार्टी को राहुल कांग्रेस की शक्ल देना चाहते हैं। राहुल के इस रुख से खफा इंदिरा राजीव के जमाने से पार्टी व परिवार के एक वफादार नेता की टिप्पणी है कि 1977 की हार के बाद इंदिरा जी उन तमाम पुराने कांग्रेसी नेताओं को मनाकर वापस लाई थीं, जो इंडीकेट सिंडीकेट विभाजन के बाद घर बैठ गए थे।