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यंग कांग्रेस बनाने की राह पर राहुल गांधी

Sat, 25 May 2013 11:44 PM IST
नई दिल्ली/धीरज कनोजिया
नई दिल्ली/धीरज कनोजिया Updated Sat, 25 May 2013 11:44 PM IST
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rahul gandhi way to make young congress

कांग्रेस उपाध्यक्ष की कुर्सी संभालने के बाद भले ही राहुल गांधी ने सीनियर नेताओं को साथ लेने की बात कही थी। अब तक हुई संगठन की नियुक्तियों में युवाओं को तरजीह देने से कांग्रेस के अंदर सीनियर नेताओं में हड़कंप की स्थिति है।

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बिहार, पंजाब और उड़ीसा समेत कई प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों में युवा चेहरों को आगे लाया गया है। राज्य की जिला और शहर इकाइयों के फेरबदल में भी 30 से 45 साल के ज्यादातर लोगों को मौका मिला है।
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मध्य प्रदेश, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र समेत अलग अलग राज्यों के युवा नेताओं को राहुल ने दिल्ली में जिम्मेदारी देकर राष्ट्रीय पहचान दी है। मगर फिर भी वरिष्ठ नेताओं को नजरअंदाज कर अपनी नई टीम खड़ी करना राहुल के लिए आसान नहीं है।
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पार्टी में चल रहे पीढ़ीगत बदलाव के दौर में खुद की कुर्सी बचाने की कोशिश में सीनियर अब युवाओं की तरह सक्रिय हो गए हैं। 42 साल के राहुल गांधी अपने से कम या फिर हमउम्र युवाओं को संगठन में जगह देने की मुहिम में जुट गए हैं।
 
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता राहुल की इस कोशिश को भविष्य का निवेश कहते हैं। जबकि उनकी युवा बिग्रेड में शामिल और एक केंद्रीय राज्य मंत्री कहते है कि राहुल का यह प्रयास 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए नहीं बल्कि अगले पांच साल की योजना है।

अभी प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर जिन युवाओं को काम दिया गया है। वह आगामी पांच साल में बड़ी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हो जाएंगे। तब तक राहुल के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचने की प्रक्रिया भी पूरी हो जाएगी।

जैसा कि राजीव गांधी ने अपने समय में किया था। उनके लाए नेता अब केंद्र और संगठन में बड़े पदों पर हैं। कमलनाथ, अंबिका सोनी, आनंद शर्मा जैसे नेता इसके उदाहरण हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता पीसी चाको इस बारे में कहते हैं कि राहुल गांधी युवाओं के रोल मॉडल है। उपाध्यक्ष बनने के बाद अपने कामों से उन्होंने साबित कर दिया है।

बिहार में अशोक चौधरी, झारखंड के सुखदेव भगत, पंजाब में प्रताप सिंह बाजवा, उड़ीसा से जयदेव जेना जैसे नेता प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए हैं। इन सभी की उम्र 30 से 45 साल के बीच है।

प्रवक्ताओं की फौज से लेकर मीडिया में राजनीतिक चर्चा में भाग लेने के लिए बनी टीम में राहुल ने अपनी पसंद के लोगों को मौका दिया है।

राज्य तक सीमित रहे कर्नाटक के राजीव गौड़ा, कृष्णा वैरेगोड़ा, वीएन गाडगिल के बेटे अनंत गाडगिल, मुंबई के संजय झा, महाराष्ट्र के राजीव सातव, यूपी के नदीम जावेद, युवा कांग्रेस की प्रियंका चतुर्वेदी जैसी युवा शक्ति मीडिया में कांग्रेस का चेहरा बनेंगे। तो यूपी कांग्रेस फेरबदल में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में वरिष्ठों के मुकाबले युवाओं को प्राथमिकता दी गई है।

हालांकि एक सीनियर नेता ने कहा कि ऐसा नहीं है कि राहुल सिर्फ कम उम्र के लोगों को ही चाह रहे हैं। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष निर्मल खत्री को उन्होंने खुद चुना है। मध्य प्रदेश के कांतिलाल भूरिया भी उन्हीं की पसंद हैं।

पार्टी नेताओं से अनौपचारिक बातचीत में एक बात सामने आई कि राहुल कांग्रेस के होने वाले फेरबदल में कांग्रेस के महासचिवों की सूची में ज्यादा फेरबदल नहीं करेंगे। सीनियर महासचिव को दोबारा जिम्मेदारी दी जाएगी। साथ ही युवा नेताओं को एआईसीसी में सचिव स्तर पर जिम्मेदारी दी जाएगी।


अभी राहुल की युवा बिग्रेड में जितेंद्र सिंह, सचिन पायलट, आरपीएन सिंह, जितिन प्रसाद, ज्योतिरादित्य सिंधिया, मीनाक्षी नटराजन, अरुण यादव, दीपेंद्र हुड्डा, संदीप दीक्षित और शशि थरूर सरीखे चेहरे हैं, जो कि केंद्र सरकार और कांग्रेस में अहम जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

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