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अब अखिलेश, राहुल के बीच छिड़ेगी जुबानी जंग

Wed, 03 Apr 2013 12:43 AM IST
धीरज कनोजिया/नई दिल्ली
धीरज कनोजिया/नई दिल्ली Updated Wed, 03 Apr 2013 12:43 AM IST
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rahul gandhi vs akhilesh yadav

आगामी लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में एक बार फिर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आमने सामने होंगे।

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अखिलेश कांग्रेस उपाध्यक्ष के केंद्रीय मदद के दुरुपयोग के आरोपों का जवाब देने की तैयारी में हैं।

सपा नेता ने इस सिलसिले में तथ्य और आंकड़े जुटाते हुए मौका देखकर चौंका मारने की रणनीति बनाई है।

आगामी लोकसभा चुनाव को देखते तल्ख होते जा रहे सपा और कांग्रेस के रिश्तों की अगली कड़ी में जुबानी जंग का दौर राहुल और अखिलेश के बीच शुरू हो सकता है।

सपा के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि अखिलेश जल्द ही राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधते हुए केंद्र सरकार पर प्रदेश की ओर से मांगे गए आर्थिक पैकेज की आधे से ज्यादा राशि नहीं देने का आरोप ठोकेंगे।

मुख्यमंत्री आरोप लगा सकते हैं कि केंद्र राजनीतिक स्वार्थ के चलते प्रदेश का विकास रोककर कांग्रेस को उनकी सरकार को बदनाम करने का मौका दे रही है।

सपा सरकार के आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश ने केंद्र से लगभग 40 से 45 हजार करोड़ रुपये की मांग की थी, जिसमें से 20 हजार करोड़ की परियोजनाओं को ही मंजूरी मिली है। जबकि बाकी परियोजनाओं पर काम रोक दिया गया है।
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सूत्रों का कहना है कि रायबरेली को एम्स के लिए दी गई जमीन का मुद्दा भी अखिलेश जोर शोर से उठाएंगे। वह कहेंगे कि हम बिना किसी भेदभाव के काम करते हैं।

पूर्ववर्ती मायावती सरकार ने रायबरेली में जमीन देने का काम रोक रखा था। मगर हमने ऐसा नहीं किया।

सपा सरकार यह भी कहेगी कि वह प्रदेश में चार एम्स बनाने की मांग कर रही है। इसके लिए जमीन देने के लिए भी तैयार है। मगर रायबरेली के अलावा केंद्र सरकार कहीं और एम्स बनाने में दिलचस्पी नहीं ले रही है।
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साथ ही अखिलेश लखनऊ से रायबरेली की चार लेन के राजमार्ग के निर्माण की बात भी उठाएंगे। वह केंद्र पर आरोप लगाएंगे कि केंद्र सरकार रायबरेली तक राजमार्ग बनाने के लिए तैयार है।


मगर केंद्र इसे इलाहाबाद तक जोड़ने में टालमटोल कर रही है। ऐसे ही कई आरोप अखिलेश केंद्र पर लगाकर कांग्रेस को घेरने की तैयारी में है।

उधर, सपा नेता नरेश अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सपा सांसदों को निजी तौर से मुलाकात कर वादा दिया था कि वह जल्द ही यूपी को लेकर एक बैठक करेंगे। मगर अभी तक कोई बैठक नहीं हुई जिससे साफ साबित होता है कि केंद्र सरकार यूपी सरकार को बदनाम करना चाहती है।

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