दुनिया की नजरों से कैसे बच कर रहे राहुल गांधी, जानिए
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने दो महीने के अज्ञातवास के दौरान अपनी एसपीजी सुरक्षा नहीं रखी, लेकिन एसपीजी कानून के तहत इस पूरी अवधि में राहुल पर दूर से नजर रखी जा रही थी।
सूत्रों ने बताया कि 16 फरवरी को सुबह करीब 3 बजे स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) घेरे ने राहुल को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर छोड़ दिया।
एसपीजी ने विदेश में भी रखी राहुल पर नजर
सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े उच्चपदस्थ अधिकारी के मुताबिक राहुल ने आगे के लिए सुरक्षा घेरा लेने से इनकार कर दिया था।
एसपीजी कानून में यह प्रावधान है कि विदेश यात्रा के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री के परिवार वाले सुरक्षा घेरे से इनकार कर सकते हैं। लेकिन यह मामला वीवीआईपी के खतरे के ताजा आकलन पर निर्भर करता है।
सूत्रों के मुताबिक राहुल के इनकार के बावजूद एसपीजी अपना काम करती रही। उन पर हवाई अड्डे से ही दूर से नजर रखी जाने लगी। थाई एयरवेज के जहाज में भी जाते और लौटते वक्त सुरक्षाकर्मी मौजूद थे।
एसपीजी कानून के मुताबिक एसपीजी सुरक्षा हासिल शख्सियत को उसकी इच्छा से भरोसे नहीं छोड़ सकती। सूत्रों ने बताया कि दो महीने के दौरान राहुल जहां भी गए वहां की सरकार के साथ भी एसपीजी लगातार संपर्क में थी।
दो महीने की छुट्टी के बाद लौटे हैं राहुल
उल्लेखनीय है कि लगभग दो महीने की छुट्टी के बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी गुरुवार को दिल्ली लौटे आए हैं। राहुल गांधी बैकॉक से गुरुवार सुबह 11 बजे थाई एयरवेज के हवाई जहाज से दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पहुंचे।
सुबह ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और बहन प्रियंका गांधी राहुल के तुगलक लेन स्थित घर पर उनकी अगवानी के लिए पहुंच गईं। राहुल के आते ही उनकी पार्टी के अध्यक्ष के तौर पर ताजपोशी को लेकर छिड़ा विवाद भी तेज हो गया हैं। सोनिया गांधी के अध्यक्ष पद पर बने रहने की आवाज भी तेज हो गई है।
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और गांधी परिवार की वफादार शीला दीक्षित ने फिर सुर छेड़ा है कि सोनिया को ही अध्यक्ष पद पर रहना चाहिए। जबकि कैप्टन अमरिंदर सिंह समेत दूसरे वरिष्ठ नेता भी उनके खिलाफ मुंह खोल सकते हैं। वहीं पार्टी में सवाल खड़े हो रहे है कि कांग्रेस को हार से उबारने के लिए राहुल आखिर क्या बड़ा करेंगे। साथ ही उनके सामने अपनी गैर जिम्मेदार और फ्लॉप छवि को भी धोने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। इसे लेकर सबकी निगाहें उन पर टिक गई है।
19 अप्रैल को किसान रैली के दौरान वह मोदी सरकार के खिलाफ हुंकार भरेंगे।