राहुल की ब्रिटिश नागरिकता मामले में याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के नागरिकता विवाद संबंधी याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका में इस मामले की सीबीआई जांच कराने की गुहार की गई थी। शीर्ष अदालत ने उस दस्तावेजों की प्रामणिकता पर सवाल खड़ा किया जिसमें कथित तौर पर राहुल गांधी ने ब्रिटिश नागरिकता होने की बात कही गई है।
चीफ जस्टिस एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ ने वकील एमएल शर्मा द्वारा दाखिल इस याचिका को फालतू करार देते हुए कहा कि जनहित याचिका किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं दायर की जाती। पीठ ने याचिकाकर्ता वकील पर सवालों की झड़ी लगा दी। पीठ ने कहा कि आप राष्ट्रपति के पास प्रतिनिधिमंडल लेकर कैसे गए? आपको ये दस्तावेज कहां से मिले? आप सीबीआई के पास क्यों गए, यह गलत प्रक्रिया है।
पीठ ने कहा कि अगर किसी सांसद ने गलत शपथपत्र दिया है तो आपको चुनाव आयोग के पास जाना चाहिए था। एमएल शर्मा ने दावा किया कि राहुल गांधी ने यूनाइटेड किंग्डम में रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के समक्ष कंपनी के दस्तावेजों में खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया था।
ऐसी जनहित याचिकाएं होनी चाहिए दाखिल
चीफ जस्टिस एचएल दत्तू ने अपना तजुर्बा बताते हुए कहा कि मानसिक रोग से पीड़ित बच्चों के शेल्टर होम में हमने पाया कि वहां रहने वाले 44 बच्चे एक टूथपेस्ट, एक टूथब्रश और एक तौलिये से गुजारा करते हैं। जब कोई बच्चा ऐसे रोग से पीड़ित हो जाता है तो उसके अभिभावक उसे वापस घर ले जाने को तैयार नहीं होते। चीफ जस्टिस ने इशारा किया कि इस तरह के मुद्दे पर जनहित याचिकाएं दाखिल होनी चाहिए।
चीफ जस्टिस एचएल दत्तू ने इस याचिका से इस कदर नाराज दिखे कि उन्होंने याचिकाकर्ता वकील एमएल शर्मा से कहा कि मैं दो दिन बाद सेवानिवृत्त हो रहा हूं, इसलिए मुझे जुर्माना लगाने के लिए बाध्य न कीजिए।
सुनवाई केदौरान राहुल गांधी की पैरवी करने के लिए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल मौजूद थे लेकिन उन्हें अपनी दलील पेश करने का मौका ही नहीं मिला। बिना उनके एक शब्द बोले ही सुप्रीम कोर्ट ने राहुल के खिलाफ दाखिल याचिका खारिज कर दी।