राहुल मान गए तो जीएसटी पर बन जाएगी बात
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जीएसटी पर पीएम नरेंद्र मोदी और सोनिया-मनमोहन की बातचीत के बाद सरकार को सिर्फ राहुल गांधी की जिद ही एक अड़चन नजर आ रही है। माना जा रहा है कि कांग्रेस के अंदर जीएसटी दर की अधिकतम सीमा 18 फीसदी पर डटे रहने को लेकर असमंजस की स्थिति है।
जबकि सरकार का मानना है कि संविधान संशोधन बिल में टैक्स की अधिकतम सीमा 18 फीसदी रखने की मांग अव्यवहारिक है। जीएसटी से जुड़े विवादों के हल के लिए न्यायिक ट्रिब्यूनल के गठन की मांग भी उचित नहीं। क्योंकि इसके गठन से कार्यपालिका के हाथों से टैक्स तय करने का अधिकार सीधा न्यायपालिका के पास आ जाएगा।
वैसे, पीएम मोदी और सोनिया-मनमोहन की शुक्रवार को चर्चा के बाद एनडीए सरकार के रणनीतिकार बिल पारित होने की राह बनती देख रहे हैं। सरकार के एक वरिष्ठ रणनीतिकार ने पीएम मोदी के मीडिया के लिए आयोजित दिवाली मिलन कार्यक्रम के दौरान साफ कहा कि मनमोहन सिंह समेत कांग्रेस के तमाम दिग्गजों को इन दोनों बिंदुओं पर कोई एतराज नहीं है।
मगर राहुल गांधी का अभी जिद छोड़ना बाकी है। शायद इसीलिए पीएम के साथ हुई चर्चा में सकारात्मक रुख दिखाने के बावजूद सोनिया गांधी ने पार्टी के भीतर बातचीत के बाद ही सरकार को अपने रुख से अवगत कराने की बात कही।
सरकार का रुख
सरकार का रुख साफ है कि जीएसटी की कैपिंग की सीमा 18 फीसदी पर लगाई जाती है तो कर दरों में बदलाव के लिए बार-बार संविधान संशोधन करना पड़ेगा। सरकार के रणनीतिकारों का कहना है कि सामान्य कारोबार के लिए 18 फीसदी टैक्स की सीमा ठीक हो सकती है। मगर भोग और विलास की वस्तुओं में 18 फीसदी सीमा लगाना अव्यावहारिक है।
उदाहरण के लिए बीएमडब्ल्यू कार से लेकर लग्जरी सामानों के आयात पर सरकार 60 फीसदी से ज्यादा डयूटी लगाना चाहेगी। मगर जीएसटी में 18 फीसदी सीमा तय करने से ऐसा करना मुमकिन नहीं होगा। साथ ही यदि आर्थिक हालात बेहतर या खराब होते हैं तो भी कर की दर घटाने या बढ़ाने के लिए संविधान में संशोधन करना होगा जो व्यावहारिक नहीं है।
इसी तरह ट्रिब्यूनल के गठन को लेकर भी सरकार के रणनीतिकार कह रहे हैं कि अगर कर तय करने का अधिकार ट्रिब्यूनल को दिया जाता है तो कार्यपालिका खुद अपने हाथ काटेगी। सरकार का मानना है कि न्यायपालिका का पहले से ही कार्यपालिका के कई क्षेत्रों में व्यापक दखल है। ऐसे में कर तय करने का अधिकार देना घातक होगा।
सरकार ने जीएसटी काउंसिल में ही विवादों के हल का प्रभावी विकल्प कांग्रेस को सुझाया है। वस्तुओं की आवाजाही पर एक फीसदी की अतिरिक्त लेवी लगाने के मुद्दे पर सरकार ने संकेत दिए हैं कि कांग्रेस की लेवी हटाने की मांग को मानने के लिए वह राजी हो सकती है।
राहुल के सिर सेहरा बांधने की कोशिश
अगर जीएसटी को राहुल की हरी झंडी मिल जाती है तो कांग्रेस इसका सेहरा पूरी तरह उनके सिर बांधेगी। इसे लेकर पार्टी में रणनीति शुरू हो गई है। शनिवार को कांग्रेस उपाध्यक्ष ने लोकसभा में संसदीय दल के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई वरिष्ठ नेताओं के साथ इस मुद्दे पर बैठक की।
कांग्रेस सूत्रों का दावा है कि सरकार एक फीसदी अतिरिक्त कर के प्रस्ताव को खत्म करने के लिए तैयार हो गई है, जबकि 18 फीसदी की सीमा और ट्रिब्यूनल की मांग को भी कुछ फेरबदल करने की सरकार के प्रस्ताव को भी कांग्रेस मान सकती है। सोनिया और मनमोहन सिंह की प्रधानमंत्री से चाय पर चर्चा के बाद अब कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी सक्रिय हो गए हैं।
उन्होंने शनिवार को कई नेताओं से मुलाकात कर इस विषय की जानकारी ली। माना जा रहा है कि कांग्रेस जीएसटी में कुछ बदलाव के साथ पास कराने के लिए तैयार है। मगर साथ ही पार्टी चाहती है कि भूमि अधिग्रहण की तर्ज पर इसमें बदलाव का श्रेय राहुल गांधी को मिले।
मनमोहन की अहम भूमिका
विपक्ष के सकारात्मक रुख के बाद सरकार को उम्मीद है कि जीएसटी सरीखा अहम बिल शीत सत्र में ही संसद की दहलीज पार कर लेगा। वैसे जीएसटी पर विपक्ष और सरकार के बीच बना गतिरोध कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात के बाद टूट गया।
मगर जीएसटी पर पक्ष और विपक्ष के बीच रिश्तों की बर्फ पिघलाने में अहम भूमिका पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की रही है। सरकार के शीर्ष सूत्रों के अनुसार देश के दोनों सियासी दलों के बीच जीएसटी पर बर्फ पिघलाने की नींव बीते दिनों संपन्न कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी के बेटे की शादी में ही पड़ गई थी।
सिंघवी के बेटे के विवाह समारोह में शामिल होने गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब मनमोहन से जीएसटी पर उनके दल की राय जानने की कोशिश की तो पूर्व पीएम ने कहा कि इसके लिए उन्हें सीधे कांग्रेस अध्यक्ष से बात करनी चाहिए। बताया जा रहा है कि तब से ही सरकार के रणनीतिकारों ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से संवाद साधने का सीधा प्रयास शुरू किया।
बृहस्पतिवार को खुद पीएम मोदी ने सोनिया और मनमोहन से फोन पर बातचीत कर उन्हें अपने निवास पर चाय के बहाने चर्चा के लिए बुलाया।
संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा है कि जीएसटी पर कांग्रेस ने सकारात्मक रुख दिखाया है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि यह बिल शीत सत्र में ही संसद से पारित हो जाएगा।
वहीं कांग्रेस की 3 आपत्तियों को दूर करने के सवाल पर सरकार के एक आला मंत्री का कहना है कि सरकार के कुछ वरिष्ठ मंत्री और यूपीए के पूर्व मंत्रियों को लेकर एक समूह बन सकता है, जो विवाद के बिंदुओं पर आपसी सहमति से रास्ता निकालेगा।
हालांकि समिति के ढांचे पर उन्होंने कहा है कि इसपर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। लेकिन कहा जा रहा है कि सरकार की ओर से इस ढांचे में वित्त मंत्री अरुण जेटली, संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू के साथ वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमन को जगह मिल सकती है।