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राहुल vs मोदी: किसमें कितना है दम

Mon, 10 Jun 2013 11:00 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Mon, 10 Jun 2013 11:00 AM IST
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rahul gandhi and narendra modi who has strength

नरेंद्र मोदी के भाजपा का चुनाव अभियान समिति अध्यक्ष चुने जाते ही तय हो गया है कि 2014 के लोकसभा चुनाव मोदी बनाम राहुल होंगे।

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यूं तो दोनों में अनेक असमानताएं हैं, लेकिन उनकी उल्लेखनीय समानता यह है कि दोनों अपनी-अपनी पार्टी के ‘पोस्टर बॉय’ भी।

किसमें सांगठनिक क्षमता अधिक

राहुल गांधी:
कांग्रेस ने उन्हें कुछ महीने पहले बड़ी जिम्मेदारी सौंपते हुए पार्टी उपाध्यक्ष बनाया है। पार्टी के युवा नेताओं पर उनका प्रभाव है। राज्य इकाइयों और छात्र इकाइयों में भी उन्होंने चुनाव कराए हैं।
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राज्य कांग्रेस इकाइयों पर धीरे-धीरे वे युवा पदाधिकारियों को जगह दिला रहे हैं।

नरेंद्र मोदी: भाजपा में उनका प्रभाव बीते कुछ वर्षों में काफी बढ़ा है और आज वे ऐसे नेता बन चुके हैं, जिन्हें चुनावी जीत का ट्रंप कार्ड माना जा रहा है।
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गुजरात में लगातार तीन बार भाजपा की सरकार उनके कारण ही बनी है। उनके नेतृत्व में कई राष्ट्रीय नेता भी चलने को तैयार हैं।

कौन है प्रखर वक्ता

राहुल गांधी:
अपने अंग्रेजी दां अंदाज में वह साफगोई से बात करते हैं। मुद्दों को उठाते हैं। कुछ मौकों पर वे मंच पर बातों के साथ ड्रामा को भी मिक्स करते हैं।

इसके बावजूद वे अपनी बातों से कोई जादुई प्रभाव छोड़ने में अभी तक कामयाब नहीं दिखे हैं।

नरेंद्र मोदी: उनकी बातों का जादू पिछले कुछ समय से लोग देख रहे हैं। वे ऐसे नेता के रूप में उभरे हैं, जिन्हें लोग सुनना चाहते हैं। उनकी बातें खरी-खरी और तार्किक होती हैं।

वे अक्सर ऐसे सवाल उठाते हैं जो विरोधियों को मुश्किल में डाल देते हैं।

सत्ता का अनुभव

राहुल गांधी:
उनके पास सत्ता का कोई अनुभव नहीं है। राज्य या केंद्र के स्तर पर उन्होंने कभी कोई सत्ता पद अभी तक नहीं लिया है। हालांकि उन्हें खुद प्रधानमंत्री अपने मंत्रिमंडल में आने का निमंत्रण दे चुके हैं।

नरेंद्र मोदी: गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में वे देश के सबसे कामयाब प्रशासक कहे जा सकते हैं। गुजरात की उत्तरोत्तर तरक्की ने देश-दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है।

वे अनुशासित और महत्वाकांक्षी माने जाते हैं।

चुनावी जीत

राहुल गांधी:
2009 में राहुल के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को मिली 22 सीटें उनकी एकमात्र चुनावी उपलब्धि है। इसके अलावा उन्होंने जिन-जिन विधानसभा चुनावों में पार्टी की कमान थामी, नाकामी हाथ लगी।

नरेंद्र मोदी: पिछले साल ही गुजरात चुनाव में मोदी ने जीत की हैट्रिक लगाई। ऐसी सफलता का इतिहास कम ही है। लेकिन राज्य के बाहर पिछले दिनों कर्नाटक में उनका कोई प्रभाव नहीं दिखा, जहां उनकी पार्टी सत्ता से बाहर हो गई।


कौन अधिक विवादित

राहुल गांधी:
वे कूल हैं। हैंडसम हैं। देश के सबसे पसंदीदा कुंवारों में उनकी गिनती होती है। उनके नाम पर कोई विवाद नहीं है।

नरेंद्र मोदी: 2002 के गुजरात दंगे हों या फिर किसी की पत्नी को ‘करोड़ों की गर्लफ्रेंड’ बताना, मोदी विवादों से दूर नहीं हैं।

किसे पता हैं मुद्दे

राहुल गांधी:
कांग्रेसी उन्हें राष्ट्रीय नेता मानते हैं। स्वाभाविक है कि ऐसे में उन्हें स्थानीय मुद्दों का पता नहीं है। यही कारण है कि विधानसभा चुनावों में कभी उनके नेतृत्व में कांग्रेस नहीं जीती।

लेकिन राष्ट्रीय मुद्दों पर वे अक्सर चुप्पी साधे रहते हैं, जबकि देश उनके विचार जानना चाहता है।

नरेंद्र मोदी: अगर 2002 के दंगों को छोड़ दें तो मोदी हर स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दे पर बोलना पसंद करते हैं। उनकी बातें तार्किक होती हैं और लोगों पर असर भी करती हैं।

पाकिस्तान और चीन के साथ संबंधों जैसे अंतरराष्ट्रीय मामलों में भी वे खुल कर अपनी राय रखते रहे हैं।

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