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राहुल की कहानियों में दिखा समाज का तानाबाना

Fri, 05 Apr 2013 01:53 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 05 Apr 2013 01:53 AM IST
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rahul gandhi addresses cii meet

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कुछ आप बीती कहानियों के जरिए भारत की मौजूदा हकीकत से उद्योगपतियों को रूबरू कराया।

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उन्होंने इन कहानियों की मदद से समाज के ताने बाने और लोगों की मजबूरियों के बारे में बेबाकी से बात की।

सीआईआई के अपने पहले भाषण में राहुल ने सबसे पहले गोरखपुर से मुंबई की अपनी ट्रेन यात्रा का जिक्र किया।

सफर से जाना देश को
उन्होंने कहा कि 36 घंटे के इस सफर में देश को जानने का मौका मिला। इस यात्रा में उन्हें एक युवक मिला, जो पेशे से बढ़ई था और वह काम के लिए मुंबई जा रहा था।

बातचीत में उसने बताया कि उसे इस बात का भरोसा है कि मुंबई में काम मिल जाएगा। राहुल ने जब उससे पूछा कि अगर उसे वहां काम नहीं मिला तो वह क्या करेगा।

उसने जवाब दिया कि वह बंगलूरू की ट्रेन पकड़ लेगा और वहां काम तलाशेगा। अगर वहां भी काम नहीं मिला तो उसका जवाब था कि वह दूसरे शहर की ट्रेन पकड़ लेगा। राहुल ने युवाओं के इस संघर्ष को ही देश की सबसे बड़ी खूबी बताया।
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गरीब महिला की कहानी
इसी तरह राहुल गांधी ने महाराष्ट्र की झुग्गी झोपड़ी की एक महिला की कहानी बताई। उन्होंने कहा कि जहां एक महिला अपने दो बच्चों के साथ रह रही थी। महिला ने बताया कि वह और उसका पति मजदूरी करते हैं।
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बच्चों से बात करने पर एक ने कहा कि वह आईएएस बनना चाहता हैं तो दूसरे ने कहा कि वह बिजनेस करना चाहता हैं।

हालात को लेकर राहुल ने जब मां को उकसाया और कहा कि उसके दोनों बच्चे अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर सकेंगे, तो महिला ने पूरे भरोसे के साथ कहा कि वह और उसका पति आठ-दस घंटे काम करते हैं। हम कम कमाते हैं। लेकिन इसके बाजवूद दोनों बच्चे अपने-अपने सपने पूरे कर लेंगे।

वहीं राहुल गांधी ने शिक्षा में व्यापक बदलाव की बात कहते हुए एक और कहानी सुनाई। उन्होंने कहा कि एक बार वह अपना पायलट का लाइसेंस बदलवाने डीजीसीए के दफ्तर गए। उन्हें एक किताब थमा दी गई। उस किताब में बताया गया था कि आपको किस तरह से हवाई जहाज से चिट्ठियां गिरानी है।

राहुल ने कहा कि जिस व्यक्ति को ए-340 उड़ाना है और आप उसे हवाई जहाज से चिट्ठियां गिराना बता रहे हैं। यह सिर्फ पायलट ट्रेनिंग में नहीं बल्कि हर जगह ऐसा है। वहीं राहुल ने देश में छिपी प्रतिभा के बारे में भी बताया।

बताई ज्ञान की कीमत
उन्होंने बताया कि एक बार उनका एक दोस्त अमेरिका से आया और इंजीनियरिंग से जुड़ा कुछ काम यहां पर करना चाहता था। उसने राहुल से पूछा कि वह इससे संबंधित जानकारी लेने के लिए आखिर कहां जाएं। तो राहुल ने कहा कि उन्हें आईआईटी जाना चाहिए। वह आईआईटी के कुछ प्रोफेसर से मिला।

उन्होंने उसके सवालों और समस्या का समाधान कर दिया। उसने आकर इसे बेहद दिलचस्पी से बताया कि आईआईटी के प्रोफेसरों ने उसकी जटिल तकनीकी समस्या को महज कुछ हजार रुपये में ही बता दिया। जबकि अमेरिका में उसे इसके लिए लगभग तीस हजार डॉलर देने पड़ते।

राहुल ने कहा कि देश में लोगों को पता ही नहीं कि उनके ज्ञान की क्या कीमत है, क्योंकि वह बाजार से जुड़े नहीं है।

वहीं अमेठी में राहुल गांधी ने जब एक महिला को आगे बढ़ने के लिए ऊंचा उठने की बात बताते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति जॉन कैनेडी की कही बात की मिसाल दी कि उठती लहरों के बीच नाव की भी ऊंचाई बढ़ेगी।

तो महिला ने कहा कि भैया हमारे पास तो नाव ही नहीं है। राहुल ने इस कहानी के जरिए देश में बुनियादी ढांचे की कमियों को बताते हुए व्यवस्था को मजबूत करने की बात कही।

किस्मत खींच लाई राजनीति में
राहुल ने कहा कि वह भाग्यवश राजनीति में आ गए। इसके पीछे खास परिवार से डीएनए लिंक होना भी बड़ी वजह रही। लेकिन वह खांटी राजनेता नहीं हैं और न ही बनना चाहते हैं।

चीन ड्रैगन, भारत मधुमक्खी का छत्ता
चीन को ड्रैगन कहा जाता है और भारत को हाथी। लेकिन भारत हाथी नहीं हैं। वह मधुमक्खी का छत्ता है। हमारी राजनीतिक व्यवस्था लोकतांत्रिक है जिसमें सबकी आवाज सुनी जाती है और जवाब दिया जाता है जबकि चीन में ऐसा नहीं है।

तब कलावती और अब गिरीश
राहुल ने बताया कि कुछ साल पहले वह गोरखपुर से ट्रेन से मुंबई जा रहे थे। सफर के दौरान वह ट्रेन में लोगों से घूमकर बात करते रहे। यहां उन्हें मुंबई में पेंटर का काम करने वाला गिरीश भी मिला।

ट्रेन मुंबई पहुंची तो गिरीश ने राहुल से अपने घर चलने का आग्रह किया। सुबह के चार बजे थे। वे गिरीश के घर पहुंचे। वहां छोटे से कमरे में छह लोग सो रहे थे।


गिरीश राहुल और उनकी टीम से चाय पीने का आग्रह करता रहा। राहुल ने बताया कि गिरीश की कहानी इस देश की कहानी है कि कैसे लाखों लोग अपने सपनों का संघर्ष कर रहे हैं।

संसद में 2008 में राहुल ने महाराष्ट्र के विदर्भ की गरीब महिला कलावती का जिक्र किया था। कर्ज में डूबे उसके पति ने आत्महत्या कर ली थी।

राहुल का विजन
देश में सौहार्द का माहौल बनाए रखने से होगी तरक्की।
देश का आर्थिक विजन केवल धन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें अलग-थलग लोगों के प्रति संवेदना, सहानुभूति भी होना चाहिए।
अल्पसंख्यकों, महिलाओं और दलितों को भी साथ लेकर चलना होगा।
लोगों की रोजगार, शिक्षा और सूचना के क्षेत्र में न्यूनतम जरूरतें पूरी की जानी चाहिए।
भारत में सपनों, सकारात्मक और साहसी विचारों की भरमार है।
गरीब, कारोबारी और मध्य वर्ग- देश का विकास तभी होगा, जब हम इन तीनों वर्गों को साथ लेकर चलेंगे।
प्रधानमंत्री या अन्य कोई और अकेला कुछ नहीं कर सकता, एक अरब लोगों को सशक्त बना दीजिए सभी समस्याएं हल हो जाएंगी।
स्थानीय मुद्दों से जुड़े फैसलों में प्रधानों की भूमिका होनी चाहिए।
इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाना अकेले सरकार के बस में नहीं, उद्योग जगत दे साथ।
सिस्टम की समस्याओं को दुरुस्त करने के लिए गंभीर उपाय करने की जरूरत।

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