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प्रधानमंत्री की अथॉरिटी को राहुल ने किया तहस नहस
धीरज कनोजिया/नई दिल्ली
Updated Sat, 28 Sep 2013 12:02 AM IST
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राहुल गांधी ने दागी माननीयों को बचाने को लाए गए अध्यादेश की धज्जियां उड़ाकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अथॉरिटी को सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया है।
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दरअसल, प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने ही अध्यादेश को मंजूरी दी थी। यही नहीं, पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की मौजूदगी में ही कांग्रेस कोर ग्रुप में बाकायदा अध्यादेश लाने को हरी झंडी दी गई थी।
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राहुल के सवाल उठाने के बाद देश और दुनिया में पीएम मनमोहन सिंह की सर्वोच्चता पर प्रश्न चिन्ह लग गया है।
अध्यादेश को लेकर राहुल गांधी ने ऐसे वक्त में गंभीर सवाल उठाए हैं, जब मनमोहन सिंह अमेरिका के दौरे पर हैं। ऐसे में सवाल उठाने से पूरे देश और दुनिया में गलत संदेश जाने की बात कही जा रही है।
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जिस अध्यादेश को पीएम की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने मंजूर किया, उसे राहुल खुलेआम बकवास कहते हुए फाड़कर फेंकने की बात कर रहे हैं।
कांग्रेस उपाध्यक्ष ने सीधे पीएम को चुनौती दे दी है। इस पूरे घटनाक्रम में मनमोहन सिंह की छवि को बड़ा झटका लगा है।
पीएम ने इसकी सफाई देते हुए कहा है कि राहुल ने इस मुद्दे पर उनको चिट्ठी भी लिखी है। वह इस संबंध में कैबिनेट में चर्चा करेंगे।
पार्टी के अंदर कुछ लोगों का कहना है कि चिट्ठी लिखकर किसी फैसले पर ऐतराज किया जा सकता था। जैसा कि कई बार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी कर चुकी हैं।
मगर खुलेआम फैसले की धज्जियां उड़ाना राजनीतिक शिष्टाचार के तहत शोभा नहीं देता। महंगी रसोई गैस समेत महंगाई और भ्रष्टाचार से जुड़े तमाम मुद्दों पर सोनिया सरकार के फैसले से इतर राय रख चुकी हैं।
मगर उन्होंने हमेशा चिट्ठी लिखकर अपनी असहमति प्रकट की। राहुल के ऐतराज के बाद अध्यादेश के वापस होने की बात है।
ऐसे में यह भी संदेश जाना लाजमी है कि प्रधानमंत्री को राहुल गांधी की वजह से पीछे हटना पड़ा। राजनीतिक हलकों में राहुल के इस कदम को सुनियोजित भी कहा जा रहा है।
दरअसल, जिस तरह से अध्यादेश को लेकर लोगों में कांग्रेस की छवि गलत बन रही है और साथ ही राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के भी इसके पक्ष में नहीं होने के संकेत थे।
यही नहीं कांग्रेस कोर ग्रुप में इसे मंजूरी दी गई। सोनिया और अहमद पटेल भी कोर ग्रुप में शामिल हैं। कुल मिलाकर इसे लेकर राजनीतिक सहमति थी।
मगर जब अध्यादेश को लेकर फजीहत होने लगी और पासा उलटा पड़ने लगा तो कहा जा रहा है कि राहुल को बाकायदा योजनाबद्ध तरीके से सामने लाकर अध्यादेश का विरोध करने की रणनीति बनाई गई।
कांग्रेस महासचिव अजय माकन से जब पूछा गया कि राहुल ने विरोध कर एक तरह से प्रधानमंत्री की अथॉरिटी पर ही क्या सवाल खड़ा नहीं किया है तो उन्होंने इस बात को खारिज करते हुए कहा कि राहुल की राय को तोड़ मरोड़ कर पेश नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने अपनी राय दी है जोकि कि कांग्रेस की राय है।