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फिक्रमंद है मुसलमान, खौफ में नहीं: रहमानी

Thu, 10 Dec 2015 05:15 AM IST
Updated Thu, 10 Dec 2015 05:15 AM IST
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Rahmani says Muslims Is concerned, not in awe.

देश में लगातार माहौल खराब किया जा रहा है। मुसलमानों की धार्मिक आस्था को चोट पहुंचाने की कोशिश की जा रही हैं, मगर मुसलमान खौफ में नहीं हैं। हालांकि वे फिक्रमंद हैं कि, इस माहौल से कैसे निपटा जाए। इसके लिए आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड लड़ाई लड़ रहा है।

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संविधान में सभी को बराबरी का हक दिया गया है, सरकारों को भी संविधान के मुताबिक चलना होगा। ये बातें आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारी महासचिव मौलाना वली रहमानी ने बोर्ड की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहीं।
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रहमानी ने कहा कि, केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा योग, सूर्य नमस्कार को बढ़ावा देना मुसलमानों की धार्मिक आस्थाओं को चोट पहुंचाने की कोशिश है। एक विशेष धर्म की मान्यताओं को औरों पर थोपने की कोशिश संविधान के खिलाफ है। सरकारी संसाधनों को किसी खास मजहब की तरक्की के लिए इस्तेमाल करना भी संविधान के खिलाफ है।
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'देश में लगातार खराब किया जा रहा है माहौल'

Rahmani says Muslims Is concerned, not in awe.

रहमानी ने कहा कि, इसी वजह से दीन बचाओ दस्तूर बचाओ जैसी बहस करने को तहरीक बनाई गई, जिसका बड़ा कार्यक्रम अमरोहा में गुरुवार को है। इसमें सभी धर्मों के विद्वानों को आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि इस माहौल के बाद भी मुसलमान खौफ में नहीं है, बल्कि फिक्रमंद हैं। आतंकवाद के सवाल पर उन्होंने अमेरिका को भी कठघरे में खड़ा किया।

हम क्यों मिलें पीएम मोदी से
देश के माहौल को लेकर प्रधानमंत्री से मिलने पर पूछे गए सवाल के जवाब में रहमानी ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नहीं मिलेंगे। हम संविधान के अनुरूप काम की वकालत कर रहे हैं। उसका अमल भी करेंगे। हमारी बात उन तक खुद पहुंच जाएगी।

संविधान के खिलाफ काम न हों
आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि सरकार के अधीन चलने वाले कालेजों और स्कूलों में सूर्य नमस्कार और योग न कराया जाए। असल मामला संविधान के तकाजों को पूरा करने और सरकारी संस्थानों में संविधान के खिलाफ कामों को रोकने का है। आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड हिंदुस्तान के संविधान के मुताबिक काम करना चाहता है और असंवैधानिक कामों को रोकना चाहता है।

56 सदस्यीय बोर्ड के 28 मेंबर ही पहुंचे

Rahmani says Muslims Is concerned, not in awe.

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड कार्यकारिणी की बैठक में 56 सदस्यीय कार्यकारिणी में सिर्फ 28 सदस्य ही पहुंचे। अध्यक्ष मौलाना सैयद राबे हसनी नदवी भी किसी कारण से नहीं आ सके। उनकी गैर मौजूदगी में कार्यकारी महासचिव मौलाना वली रहमानी ने अध्यक्षता की।

आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक बुधवार को अमरोहा में हुई, जिसमें कई अहम मुद्दों पर विचार विमर्श हुआ। बताया गया कि 56 सदस्यों को शामिल होना था लेकिन 28 सदस्य ही पहुंचे।

अध्यक्ष मौलाना सैयद राबे हसनी नदवी स्वास्थ्य खराब होने के कारण नहीं आ सके। कार्यकारिणी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली, बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक एडवोकेट जफरयाब जिलानी भी किसी कारणवश नहीं आ सके।

मौलाना निजामुद्दीन को श्रद्धांजलि दी गई

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आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के महासचिव मौलाना निजामुद्दीन साहब के पिछले दिनों निधन होने पर सभी सदस्यों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मौलाना निजामुद्दीन के निधन के बाद मौलाना वली रहमानी कार्यकारी तौर पर महासचिव का कार्य देख रहे हैं।

मुसलमानों के हितों का सबसे बड़ा मंच है बोर्ड
अमरोहा। आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मुसलमानों के सभी मरकज, बरेलवी, देवबंदी, शिया, सुन्नी आदि सभी ग्रुप इसमें शामिल होते हैं। इसका काम मुस्लिम पर्सनल ला को सुरक्षित रखना है। यह पूरी तरह से शरीयत और कुरान हदीस के मुताबिक मुसलमानों के हकों में फैसले लेता है।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की महिला कान्फ्रेंस

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आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की महिला सदस्यों ने दीन बचाओ दस्तूर बचाओ कान्फ्रेंस से पहले महिलाओं को उनके हक और किरदार की जानकारी दी।

देश के कई शहरों से पहुंचीं महिला विद्वानों ने कहा कि कौम की तरक्की में महिलाओं का अहम किरदार है। महिलाएं ही परिवार बनातीं हैं, इसलिए महिलाएं अपना किरदार शरीयत के मुताबिक निभाएं। कान्फ्रेंस में मुसलमानों में दहेज के मामले बढ़ने पर चिंता जताई गई और बच्चों की शिक्षा पर जोर दिया गया।

मंडी धनौरा मार्ग पर एक महाविद्यालय प्रांगण में बुधवार को आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक के बाद बोर्ड की ओर से महिला कान्फ्रेंस आयोजित की गई। कान्फ्रेंस में मुख्य वक्ता के तौर पर बोर्ड की सदस्य हैदराबाद से आईं डॉ.आसमा जहरा ने महिलाओं का आह्वान किया कि वह अपने परिवार को शरीयत के मुताबिक चलाएं।

बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि शिक्षित होने से समाज की तरक्की होगी। कोलकाता से आईं नूरजहां शकील ने भी मुस्लिम महिलाओं के अखलाक पर जोर दिया। कहा कि महिलाओं की जिम्मेदारी पुरुषों से कम नहीं है। वह घर में रहकर एक अच्छा परिवार बनाती हैं, कौम की तरक्की के लिए महिलाओं को कुरान और हदीस के अनुसार बच्चों को शिक्षा देनी चाहिए।

कान्फ्रेंस में लखनऊ से पहुंची डॉ. सूफिया नसीम और दिल्ली से ममदुहा माजिद ने भी बच्चों की शिक्षा पर जोर दिया। महिला कांफ्रेंस में तहनीयत इथर, जीनत महताब के अलावा कई अन्य महिला विद्वानों ने विचार रखे। महिला कांफ्रेंस करीब ढाई घंटे चली।

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