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‘करदाताओं के पैसों पर मौज कर रहे उद्योगपति’
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 27 Nov 2014 12:58 AM IST
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भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने देश के तथाकथित बड़े लेकिन बैंकों का पैसा दबाने उद्योगपतियों पर जमकर निशाना साधा है।
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उन्होंने कहा है कि ऐसे उद्योगपति सरकारी बैंकों का पैसा लौटाने में तो आनाकानी करते ही हैं, छोटे कारोबारियों को सुगमता से कर्ज मिलने का रास्ता भी रोकते हैं। ऐसे उद्योगपति पर बैंक चाह कर भी कार्रवाई नहीं कर सकते क्योंकि ये चोटी के वकील को निचली अदालतों में उतार कर स्टे हासिल कर लेते हैं।
उनका कहना है कि बड़े उद्योगपति जो मौज करते हैं, उसकी कीमत करदाता चुकाते हैं। गुजरात के आणंद में डा. वर्गीज कुरियन व्याख्यान में रघुराम राजन ने कहा कि भारत में ऐसे कुछ सुपर उद्योगपतियों का वर्ग तैयार हो गया है, जो अच्छे समय में तो मजा करते ही हैं, अपने राजनीतिक आकाओं की छत्रछाया में बुरे समय में भी मजा करते हैं। इन्हें कर्ज उपलब्ध कराने वाले अधिकतर सरकारी बैंक होते हैं, जिन्हें बुरे समय में तो पैसा नहीं ही मिलता है और अच्छे समय में भी बेहतर रिटर्न नहीं मिल पाता है। बैंकों को मन मार कर इन्हें इन्हीं की शर्तों पर ऋण देना पड़ता है। ऐसे उद्योगपति जब पैसा नहीं चुकाते हैं, तो भी इनका कुछ नहीं होता है।
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उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 में ऋण वसूली पंचाट की मदद से 30,590 करोड़ रुपये वसूले गए थे, जो कि विवादित राशि का महज 13 फीसदी है। बैंकों के 2,36,600 करोड़ रुपये फंसे हैं और मामला पंचाट में चल रहा है। उनके मुताबिक जब अर्थव्यवस्था की हालत खराब होती है, तब भी ऐसे उद्योगपति का सुख भोगते हैं।
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