फ्रांस से 36 फाइटर जेटों को लेने की राह काफी मुश्किल
फ्रांस के साथ 36 राफेल फाइटरजेटों के सौदे को ग्रहण लगना करीब-करीब तय माना जा रहा है। रक्षा मंत्रालय के एक पूर्व अधिकारी का कहना है कि इस सौदे के अंतर्गत मौजूदा सरकार को पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी की टिप्पणी को क्रॉस कर पाना काफी मुश्किल हो रूप देने की गेंद भावी सरकार पर डाल दी थी।
सूत्र का कहना है कि पूर्ववर्ती सरकार ने सौदे को अंतिम रूप में देने के क्रम सन 2007 की निविदा को आधार माना था। इसमें तकनीकी हस्तांतरण की शर्त थी और कामर्शियल ट्रायल के तहत फाइटर जेटों की कीमत का भी उल्लेख किया था। इसमें फ्रांस से तैयार हालत और बाद में साझा कार्यक्रम के तहत मिलने वाले फाइटर जेटों की गुणवत्ता को भी वायुसेना की जरूरत के हिसाब से तय करने पर जोर दिया गया था।
लाइफ साइकिल कास्ट भी अहम मुद्दा था। सबकुछ सुनिश्चित करने के बाद तत्कालीन सरकार ने अपनी टिप्पणी के साथ सौदे को आगामी सरकार के विवेक पर छोड़ दिया था। रक्षा मंत्रालय में कार्य कर चुके संयुक्त सचिव स्तर केअधिकारी के मुताबिक इस बर्डर लाइन को क्रॉस कर पाना काफी कठिन है।
90 हजार करोड़ रुपए और चाहता है फ्रांस
मंत्रालय के एक अन्य सूत्र का कहना है अभी इस सौदे में कई पेंच हैं। इसके
चलते फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद क इस साल भारत यात्रा के दौरान
फाइटर जेट सौदे पर कोई सहमति नहीं हो सकी थी। फाइटर जेट की कीमत के
साथ-साथफ्रांस फाइटर जेट की तकनीक को हस्तांतरित करने के लिए सहमत नहीं था।
दूसरी बड़ी समस्या यह गारंटी मिलने में भी आ रही थी कि भारतीय वायुसेना के
मानक के अनुरुप यदि फाइटर जेट न मिले तो जुर्माना क्या होगा? फ्रांस फाइटर
जेटों की लाइफ साइकिल कास्ट पर शर्तें रख रहा है। उसका कहना है कि विमान
के कल पुर्जे काफी मंहगे हैं। इसलिए इसकी कीमत बढ़ेगी। हालांकि दौरे के
दौरान ओलांद ने कहा था कि दोनों देशों के बीच सौदे को लेकर बातचीत सही दिशा
में आगे बढ़ रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल की अपनी फ्रांस
यात्रा के दौरान 2007 की निविदा को रद्द करके 36 फाइटर जेट सीधे लेने पर
सहमति व्यक्त की थी। इसके लिए आधार 2007 की निविदा को ही रखा गया था।
अप्रैल 2015 में भारत ने इस नई सहमति के आधार पर सौदे को आगे बढ़ाना शुरु
किया।
यह सौदा फ्रांस के साथ फारेन मिलिट्री सेल्स के तहत होना तय हुआ। इस
बीच मिस्त्र और कतर ने 29 करोड़ डॉलर प्रति एयरक्राफ्ट पर राफेल विमानों का
सौदा किया। इसके बाद फ्रांस ने भारत के साथ होने वाले सौदे की राशि को भी
तीन गुणा तक बढ़ा दिया। अब फ्रांस 36 विमानों के लिए 90 हजार करोड़ रुपये
से अधिक चाहता है। जबकि भारत यूपीए सरकार के समय की कीमत को 2015-16 तक की
स्थिति का आंकलन करने के बाद किसी भी सूरत में 65 हजार करोड़ रुपये से अधिक
देने को राजी नहीं है।