राफेल: भारत में निवेश नहीं करना चाहता फ्रांस
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फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की सीधी खरीद को लेकर सौदेबाजी में आई अड़चन के कारण भारतीय वायु सेना के आधुनिकीकरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। भारतीय पक्ष राफेल सौदे की राशि का एक निश्चित हिस्सा भारत में निवेश करने पर जोर दे रहा है, जबकि फ्रांस का कहना है कि ऐसा करने से राफेल विमानों की लागत बढ़ जाएगी।
इसके अलावा भारतीय वायु सेना इन विमानों में अपने हिसाब से बदलाव चाहती है, जिससे कि इनमें वह अपने हिसाब से हथियार ले जा सके। अभी इन विमानों का निर्माण फ्रांसीसी हथियारों के हिसाब से किया गया है। इससे भी विमानों की लागत बढ़ने की संभावना है।
हाल ही में फ्रांस ने मिस्र और कतर के साथ इन विमानों का सौदा किया है। सूत्रों का कहना है कि इन देशों की तुलना में भारत के साथ सौदेबाजी में कीमतें कम नहीं की जा सकती।
अपने हिसाब से बदलाव की रखी शर्त
अनुमान लगाया जा रहा है कि भारत को एक राफेल लड़ाकू विमान करीब 20 करोड़
डॉलर में पड़ेगा। इस साल अप्रैल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस
यात्रा के दौरान अचानक से 36 राफेल विमानों की खरीद सीधे करने की घोषणा की
थी।
उसके बाद से ही दोनों देशों के अधिकारी सौदे को अंतिम रूप देने की
कोशिश कर रहे हैं। भारत चाहता है कि इन विमानों को बनाने वाली फ्रांसीसी
कंपनी डसॉल्ट एविएशन करोड़ों डॉलर के इस सौदे की 30 फीसदी राशि भारत में
निवेश करे।
रक्षा सूत्रों का कहना है कि आधुनिक लड़ाकू विमानों की खरीद में
और देरी आने वाले समय में चीन और पाकिस्तान की तुलना में भारतीय वायु सेना
की मारक क्षमता से समझौता करना होगा।
इससे पहले पूर्व की यूपीए सरकार 126
राफेल विमानों का सौदा कर रही थी। उस सौदे में 108 विमानों को भारत में
तैयार करने की शर्त रखी गई थी। लेकिन, मोदी सरकार ने उस सौदे को ठंडे बस्ते
में डाल दिया